Sugar Price News: देश में चीनी की कीमतों में लगातार तेजी के बीच केंद्र सरकार घरेलू बाजार में सप्लाई बढ़ाने के लिए एथेनॉल उत्पादन में गन्ने के इस्तेमाल को सीमित करने पर विचार कर रही है। प्रस्तावित बदलाव अगले चीनी सीजन से लागू किए जा सकते हैं। इस पर अंतिम फैसला अगले महीने के अंत तक आने की संभावना जताई जा रही है।
सरकार का मानना है कि अगर एथेनॉल के लिए गन्ने के डायवर्जन को कम किया जाता है, तो ज्यादा गन्ना चीनी उत्पादन में इस्तेमाल होगा। इससे घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ सकती है और आयात की जरूरत कम करने में मदद मिल सकती है।
महाराष्ट्र और कर्नाटक में कम बारिश से बढ़ी चिंता
महाराष्ट्र और कर्नाटक देश के प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्यों में शामिल हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, इन दोनों राज्यों में अपेक्षाकृत कम बारिश होने से अगले सीजन के गन्ना उत्पादन को लेकर चिंता बढ़ी है।
अगर गन्ने की उपलब्धता घटती है और उससे चीनी उत्पादन कम होता है, तो एथेनॉल के बजाय चीनी उत्पादन को प्राथमिकता देने से घरेलू सप्लाई को बनाए रखने में मदद मिल सकती है। हालांकि, इस प्रस्ताव पर सरकार की ओर से अभी आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
करीब 30 लाख मीट्रिक टन चीनी बाजार में आ सकती है
मौजूदा सीजन में चीनी मिलों ने कुल उत्पादन का करीब 10 प्रतिशत, यानी लगभग 30 लाख मीट्रिक टन चीनी के बराबर गन्ना, एथेनॉल उत्पादन की ओर डायवर्ट किया था।
अगर अगले सीजन में इस डायवर्जन को सीमित किया जाता है, तो इतनी अतिरिक्त मात्रा में चीनी घरेलू बाजार के लिए उपलब्ध हो सकती है। इससे कम उत्पादन की स्थिति में संभावित कमी को कुछ हद तक संतुलित करने में मदद मिल सकती है।
एक महीने में करीब 10% बढ़े चीनी के दाम
भारतीय बाजार में पिछले एक महीने के दौरान चीनी की कीमतों में लगभग 10 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। मांग बढ़ने और सप्लाई को लेकर चिंता के बीच कीमतें रिकॉर्ड स्तर के आसपास पहुंच गई हैं।
त्योहारों के दौरान लोगों की आवाजाही और खान-पान से जुड़ी मांग बढ़ने की संभावना है। ऐसे में आने वाले महीनों में भी चीनी की कीमतों पर दबाव बने रहने की आशंका जताई जा रही है।
एथेनॉल के लिए मक्का और चावल पर जोर
सरकार पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल ब्लेंडिंग के लक्ष्य को बनाए रखना चाहती है। ऐसे में अगर गन्ने से एथेनॉल का उत्पादन कम किया जाता है, तो इसकी भरपाई के लिए मक्का और चावल जैसे अन्य फीडस्टॉक के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जा सकता है।
बताया जा रहा है कि देश में मक्का और चावल का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है, जिससे एथेनॉल उत्पादन को बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
गन्ने के जूस और B-Heavy Molasses से एथेनॉल पर लग सकता है अंकुश
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत चीनी मिलों को गन्ने के जूस और B-Heavy Molasses से एथेनॉल उत्पादन की अनुमति सीमित की जा सकती है।
इसके बजाय मिलों को मुख्य रूप से C-Heavy Molasses से एथेनॉल बनाने की अनुमति देने पर विचार किया जा रहा है। C-Heavy Molasses वह गाढ़ा शीरा है, जिसमें चीनी बनाने की प्रक्रिया के दौरान अधिकांश चीनी पहले ही निकाल ली जाती है।
नए सीजन से पहले तय होगा एथेनॉल एलोकेशन
नवंबर से शुरू होने वाले नए मार्केटिंग वर्ष के लिए चीनी उद्योग को एथेनॉल का आवंटन सीजन शुरू होने से पहले तय किए जाने की संभावना है। इसके बाद सरकारी तेल कंपनियां एथेनॉल खरीदने के लिए टेंडर जारी करेंगी।
सरकार पहले ही चीनी के निर्यात पर प्रतिबंध लगा चुकी है। इसके अलावा पिछले महीने व्यापारियों के लिए चीनी का स्टॉक रखने की सीमा भी लागू की गई थी।
चीनी मिलों की कमाई पर ज्यादा असर की उम्मीद नहीं
उद्योग से जुड़े अधिकारियों का मानना है कि अगर एथेनॉल उत्पादन के लिए गन्ने के इस्तेमाल पर प्रस्तावित रोक या सीमा लागू होती है, तो चीनी मिलों पर बड़ा आर्थिक दबाव नहीं आएगा। इसकी वजह यह है कि मौजूदा परिस्थितियों में गन्ने से चीनी बनाकर घरेलू बाजार में बेचने से मिलों को एथेनॉल उत्पादन की तुलना में बेहतर आय मिलने की संभावना है।
B-Heavy और C-Heavy Molasses में क्या अंतर है?
B-Heavy Molasses: यह चीनी बनाने की प्रक्रिया से मिलने वाला ऐसा बाय-प्रोडक्ट है, जिसमें C-Heavy Molasses की तुलना में चीनी की मात्रा अधिक होती है। इसे एथेनॉल उत्पादन के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
C-Heavy Molasses: यह चीनी निकालने की प्रक्रिया के अंतिम चरण में बचने वाला गाढ़ा शीरा होता है, जिसमें अधिकांश चीनी पहले ही निकाल ली जाती है और बची हुई चीनी की मात्रा काफी कम होती है।