रायपुर। महिला जनप्रतिनिधियों की जगह उनके पति या अन्य रिश्तेदारों द्वारा प्रतिनिधि के तौर पर काम करने की व्यवस्था पर रोक लगाने के लिए राज्य सरकार ने राजपत्र जारी कर दिया है। सरकार के इस कदम के बाद प्रदेश में राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है। भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने इस फैसले को महिला सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है।
चंद्राकर का कहना है कि इस निर्णय को राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से अलग हटकर महिला नेतृत्व को मजबूत करने के नजरिए से देखा जाना चाहिए।
महिला नेतृत्व को मजबूत करने की कोशिश
अजय चंद्राकर ने कहा कि प्रदेश के नगरीय निकायों में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण, जबकि पंचायतों में 50 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है। ऐसे में यदि निर्वाचित महिला प्रतिनिधि की जगह उनके रिश्तेदार काम करते हैं, तो इससे महिला नेतृत्व की वास्तविक भूमिका प्रभावित होती है।
उन्होंने कहा कि महिला जनप्रतिनिधियों को खुद निर्णय लेने और अपनी जिम्मेदारियां निभाने का अवसर मिलना चाहिए। उनके मुताबिक रिश्तेदारों के हस्तक्षेप पर रोक लगाने का फैसला महिला सशक्तिकरण की दिशा में अहम कदम है।
कांग्रेस के आरोपों पर चंद्राकर का पलटवार
महिला राजनीति में भाजपा नेताओं के हस्तक्षेप को लेकर कांग्रेस की ओर से लगाए गए आरोपों पर भी चंद्राकर ने पलटवार किया। उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए पार्टी की आंतरिक राजनीति को लेकर तीखी टिप्पणी की।
चंद्राकर ने कहा कि इस विषय को राजनीतिक विवाद बनाने के बजाय महिला प्रतिनिधियों को वास्तविक अधिकार और जिम्मेदारी मिलने के मुद्दे के तौर पर देखा जाना चाहिए।
विश्व आदिवासी दिवस पर भी कांग्रेस को घेरा
विश्व आदिवासी दिवस को लेकर कांग्रेस के बयान पर भी अजय चंद्राकर ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को पहले अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मूल निवासियों के दिवस से जुड़े प्रस्ताव को ठीक से पढ़ना चाहिए।
चंद्राकर ने कहा कि भाजपा को कांग्रेस से मार्गदर्शन लेने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कांग्रेस से यह भी सवाल किया कि उसके शासनकाल में आदिवासियों के लिए क्या किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के शासन के दौरान नक्सलवाद के कारण आदिवासी समुदाय को काफी नुकसान उठाना पड़ा।
झीरम मामले को लेकर कांग्रेस पर निशाना
झीरम मामले की NIA की विशेष अदालत में चल रही सुनवाई को लेकर कांग्रेस नेताओं की टिप्पणियों पर भी अजय चंद्राकर ने हमला बोला।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस नेता खुद ही जज बन जाएं और कांग्रेस भवन से ही फैसला सुना दें। चंद्राकर ने आरोप लगाया कि कांग्रेस को झीरम मामले की सच्चाई से ज्यादा इस मुद्दे पर राजनीति करने में रुचि है।
कांग्रेस के जनसंपर्क अभियान पर भी टिप्पणी
कांग्रेस के जनता से जुड़ने के अभियान पर अजय चंद्राकर ने कहा कि पार्टी फिलहाल अपने पुराने राजनीतिक स्वरूप को वापस पाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने इसे कांग्रेस के राजनीतिक अस्तित्व को मजबूत करने की कवायद बताया।
महिला प्रतिनिधित्व, आदिवासी दिवस, झीरम मामला और कांग्रेस के जनसंपर्क अभियान को लेकर प्रदेश की सियासत में बयानबाजी जारी है। ऐसे में महिला जनप्रतिनिधियों के रिश्तेदारों के प्रतिनिधि के तौर पर काम करने पर रोक लगाने वाला सरकार का यह फैसला आने वाले दिनों में राजनीतिक चर्चा का अहम मुद्दा बन सकता है।