बलरामपुर। भ्रष्टाचार के मामले में दोषी ठहराए गए शिक्षा विभाग के सहायक ग्रेड-2 कर्मचारी गौतम सिंह आयम पर बड़ी कार्रवाई हुई है। अदालत से सजा मिलने के बाद जिला शिक्षा अधिकारी ने उन्हें शासकीय सेवा से बर्खास्त कर दिया है। गौतम सिंह को एंटी करप्शन ब्यूरो ने 13 अगस्त 2024 को 12 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया था।
12 हजार रुपये रिश्वत लेते ACB ने दबोचा था
गौतम सिंह आयम उस समय विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) कार्यालय वाड्रफनगर में सहायक ग्रेड-2 के पद पर संलग्न थे। उनकी मूल पदस्थापना शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय इंजानी, विकासखंड वाड्रफनगर में थी।
13 अगस्त 2024 को एंटी करप्शन ब्यूरो रायपुर की टीम ने कार्रवाई करते हुए उन्हें 12 हजार रुपये की रिश्वत स्वीकार करते हुए गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद उन्हें अदालत में पेश किया गया, जहां से न्यायिक अभिरक्षा में जिला जेल रामानुजगंज भेज दिया गया था।
48 घंटे से ज्यादा जेल में रहने पर हुए निलंबित
गिरफ्तारी के बाद गौतम सिंह को 48 घंटे से अधिक समय तक न्यायिक अभिरक्षा में रहना पड़ा। सरकारी सेवा नियमों के तहत इस स्थिति में उन्हें कलेक्टर बलरामपुर-रामानुजगंज के आदेश पर तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया था।
इसके बाद रिश्वत मामले में न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ती रही।
कोर्ट ने माना- रिश्वत की मांग की गई थी
मामले में विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम), बलरामपुर स्थान रामानुजगंज की अदालत ने 15 मई 2026 को फैसला सुनाया था।
अदालत के समक्ष पेश किए गए साक्ष्यों के आधार पर यह माना गया कि गौतम सिंह आयम ने प्रार्थी नितेश रंजन पटेल से एरियर्स भुगतान के बदले पहले 20 हजार रुपये की मांग की थी। इसके बाद 12 हजार रुपये की रिश्वत राशि स्वीकार की गई।
भ्रष्टाचार के मामले में 3 साल की सजा
अदालत ने साक्ष्यों के आधार पर गौतम सिंह आयम को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के संशोधित प्रावधानों की धारा 7 के तहत दोषी ठहराया।
कोर्ट ने उन्हें 3 वर्ष के कठोर कारावास के साथ 10 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई।
अब सरकारी नौकरी से भी बर्खास्त
अदालत के फैसले की प्रमाणित प्रति और संबंधित दस्तावेज शिक्षा विभाग को मिलने के बाद विभागीय स्तर पर भी कार्रवाई शुरू की गई। मामले की समीक्षा के बाद जिला शिक्षा अधिकारी ने गौतम सिंह आयम को शासकीय सेवा से बर्खास्त करने का आदेश जारी कर दिया।
इस तरह रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़े जाने के करीब दो साल बाद गौतम सिंह पर विभागीय कार्रवाई पूरी हुई। अदालत की सजा के बाद अब उन्हें सरकारी नौकरी से भी हाथ धोना पड़ा है।