चिटफंड कंपनी पीएसीएल (पर्ल्स) के निवेशकों को रिफंड दावा सुधारने के लिए दो महीने का अतिरिक्त समय मिला है। न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) आरएम लोढ़ा समिति ने बैंक खाते और सत्यापन से जुड़ी कमियां दूर करने की समय-सीमा 6 अक्टूबर 2026 तक बढ़ा दी है। निवेशक सेबी के पीएसीएल रिफंड पोर्टल पर लॉगिन कर दावे की स्थिति देखने के साथ जरूरी दस्तावेज अपलोड कर सकते हैं।
कंपनी के खिलाफ 2014 से आंदोलन कर रहे ऑल इन्वेस्टमेंट सेफ्टी ऑर्गनाइजेशन (एआईएसओ) का दावा है कि छत्तीसगढ़ में 30 लाख से ज्यादा निवेशकों के करीब 25 हजार करोड़ रुपए फंसे हैं। इनमें रायपुर के 10 हजार निवेशकों के 20.21 करोड़, दुर्ग जिले के करीब 3.50 लाख निवेशकों के 150 करोड़ रुपए शामिल हैं। समिति ने इससे पहले दावा सुधारने के लिए पोर्टल 7 मई से 6 अगस्त 2026 तक खोला था। इस अवधि में बड़ी संख्या में निवेशक बैंक खाते और बॉन्ड से जुड़े दस्तावेज अपलोड नहीं कर पाए। अब वे बैंक सत्यापन की कमियां दूर कर दस्तावेज दोबारा जमा कर सकेंगे।
2019 में देशभर से आए थे 1.50 करोड़ दावे
रिफंड आवेदन के लिए पोर्टल पहली बार 2019 में छह महीने के लिए खोला गया था। एआईएसओ के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी नरेश सागरवंशी के मुताबिक उस दौरान देशभर के 1.50 करोड़ निवेशकों ने दस्तावेज जमा किए थे। वर्ष 2019 से 2026 के बीच करीब 40 लाख निवेशकों को 3720 करोड़ रुपए लौटाए गए हैं। सागरवंशी का दावा है कि देशभर में पीएसीएल के 5.85 करोड़ निवेशकों ने करीब 49,100 करोड़ रुपए जमा किए थे। अब दावा सुधारने की अवधि बढ़ने से उन निवेशकों को राहत मिलेगी, जिनके आवेदन बैंक खाते या सत्यापन संबंधी कमी के कारण अटके हुए हैं।
20 थानों में कंपनी के खिलाफ एफआईआर
पुलिस के अनुसार पीएसीएल के खिलाफ कवर्धा, गोबरानवापारा, मौदहापारा, मनेंद्रगढ़, रानीतरई, सूरजपुर, पलारी, छोटेबेठिया, कुंडा, बेमेतरा, बेरला, पटेवा, चारामा और रतनपुर सहित प्रदेश के 20 थानों में एफआईआर दर्ज हैं। मामलों में कंपनी के डायरेक्टरों समेत कई लोगों को आरोपी बनाया गया है। मनेंद्रगढ़ और सूरजपुर में कंपनी से जुड़ी 33 लाख रुपए की कृषि भूमि भी चिह्नित की गई थी।
रायपुर के 10 हजार निवेशक परेशान
करीब पांच साल पहले रायपुर जिले के 10 हजार से ज्यादा निवेशकों ने रकम वापसी के लिए आवेदन किया था। इनके 20.21 करोड़ रुपए कंपनी में फंसे हैं। सबसे ज्यादा निवेशक अभनपुर क्षेत्र के बताए गए हैं। इनमें कुछ लोगों ने 50 लाख से एक करोड़ रुपए तक जमा किए थे। प्रशासन ने रायपुर जिले और इससे लगे ओडिशा क्षेत्र में कंपनी की 20 करोड़ रुपए से ज्यादा की संपत्ति चिह्नित की है। इसे कुर्क करने की कार्रवाई चल रही है।
अन्य चिटफंड कंपनियों पर कार्रवाई
- 53 प्रकरणों में 76.37 करोड़ रुपए की संपत्ति पर कार्रवाई कोर्ट में प्रक्रियाधीन है। {34 प्रकरणों में 73.23 करोड़ रुपए की संपत्ति की नीलामी प्रक्रिया कोर्ट में चल रही है। {67 प्रकरणों में 98 करोड़ रुपए की संपत्ति नीलाम कर राशि शासन के खाते में जमा की गई है।
- 101 प्रकरणों में 171 करोड़ रुपए की संपत्ति नीलाम करने का आदेश कोर्ट जारी कर चुका है। किया है।