रायपुर – स्वतंत्रता दिवस के राष्ट्रीय उत्साह और धर्माराधना की पावन ऊर्जा का अद्भुत संगम देखने को मिला। श्री दिगम्बर जैन बड़ा मंदिर, मालवीय रोड में चल रहे पावन समयोपदेश वर्षायोग 2026 के अंतर्गत धार्मिक एवं देशभक्तिपूर्ण कार्यक्रमों का भव्य आयोजन हुआ। मंदिर परिसर में जहां एक ओर भगवान जिनेंद्र की भक्ति, अभिषेक और शांतिधारा से आध्यात्मिक वातावरण बना रहा। वहीं दूसरी ओर तिरंगे की शान में गूंजे भारत माता की जय के नारों ने वातावरण को राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत कर दिया।
अभिषेक-शांतिधारा के साथ हुआ स्वतंत्रता दिवस का शुभारंभ
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रातः 7:30 बजे मूलनायक भगवान के समक्ष श्रीजी का अभिषेक एवं शांतिधारा संपन्न हुई। शांतिधारा करने का सौभाग्य श्री इंदर चंद प्रियांक जैन (टैगोर नगर) तथा श्री अजय, अंश एवं हर्ष जैन को प्राप्त हुआ। इसके पश्चात प्रातःकालीन धार्मिक कक्षा में मुनि 108 श्री पुनीत सागर जी महाराज ने श्रद्धालुओं को तत्त्वार्थसूत्र का अध्ययन कराया।
तिरंगे की शान में गूंजा जिनालय प्रांगण
इसी क्रम में जिनालय प्रांगण में स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष्य में झंडा वंदन कार्यक्रम आयोजित किया गया। श्री दिगम्बर जैन बड़ा मंदिर ट्रस्ट, कार्यकारिणी, वर्षायोग 2026 समिति, विभिन्न मंदिरों के पदाधिकारियों सहित बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे। ध्वजारोहण के पश्चात सभी ने राष्ट्रगीत गाया और भारत माता की जय के गगनभेदी जयकारों से मंदिर परिसर गुंजायमान कर दिया।
नवधाभक्ति से हुआ मुनि संघ का आहार
धर्माराधना के क्रम में नवधाभक्ति पूर्वक मुनि संघ को आहार कराने का पुण्यलाभ भी श्रद्धालुओं को प्राप्त हुआ। मुनि 108 श्री पुनीत सागर जी महाराज को आहार देने का सौभाग्य श्रीमती संगीता संजीव जैन पूरी (मैत्री परिवार, डीडी नगर) को मिला। वहीं एलक 105 श्री धैर्यसागर जी महाराज को आहार कराने का सौभाग्य श्रीमती शिखा श्री प्रशांत जैन (एक्सल प्रिंटर, कंकाली पारा) को प्राप्त हुआ।
सैनिकों के त्याग को किया नमन
धार्मिक कक्षाओं के अगले चरण में मुनि 108 श्री आगम सागर जी महाराज ने छह ढाला का अध्ययन कराया और अपनी मंगल देशना प्रदान की। स्वतंत्रता दिवस के संदर्भ में अपने उद्बोधन में उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को नमन करते हुए कहा कि देश को आजादी दिलाने के लिए सेनानियों ने जेलों में अमानवीय यातनाएं सही हैं। उनके संघर्ष और त्याग के कारण ही आज हम स्वतंत्र भारत में निर्भय होकर जीवन जी पा रहे हैं।
सीमा पर डटे सैनिक राष्ट्र के सच्चे रक्षक
मुनि श्री ने देश की सीमाओं पर तैनात सैनिकों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा कि कड़ाके की ठंड, मूसलाधार बारिश और चिलचिलाती गर्मी की परवाह किए बिना सैनिक निरंतर देश की सुरक्षा में डटे रहते हैं। उनके अनुसार, सैनिक भले ही सांसारिक दृष्टि से कम धन अर्जित करते हों, लेकिन देश की रक्षा करते हुए वे पुण्य की सबसे बड़ी कमाई करते हैं।
स्वार्थ त्यागकर देशहित में समर्पित सैनिक ही सच्चे परमार्थी
उन्होंने कहा कि, सैनिक अपने व्यक्तिगत स्वार्थ को त्यागकर माता-पिता, पत्नी, बच्चों और रिश्तेदारों से दूर रहकर करोड़ों देशवासियों की सुरक्षा का दायित्व निभाते हैं। जो सिर्फ अपने बारे में सोचे वो स्वार्थी और जो सबके बारे में सोचे वो परमार्थी बताते हुए मुनि श्री ने कहा कि, सबके कल्याण की भावना रखने वाला जीव तीर्थंकर प्रकृति का बंध करता है।
मुनि श्री ने दिया देशप्रेम व कर्तव्यनिष्ठा का संदेश
मुनि श्री ने देशवासियों से भारत के प्रति निष्ठावान और ईमानदार नागरिक बनने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारत देश का नाम युग के प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ के पुत्र भरत के नाम पर पड़ा है। इसलिए प्रत्येक नागरिक को अपने देश को गर्व से भारत कहना चाहिए। उन्होंने कहा कि हम सभी स्वतंत्र भारत के गौरवान्वित नागरिक हैं और हमें पूरे स्वाभिमान के साथ कहना चाहिए- हम भारतीय हैं। स्वतंत्रता दिवस पर आयोजित धार्मिक एवं राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत इस आयोजन ने समाजजनों को देश के प्रति कर्तव्य, सैनिकों के त्याग और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। मंदिर परिसर में दिनभर भक्ति, धर्माराधना और राष्ट्रप्रेम का वातावरण बना रहा।