रायपुर। छत्तीसगढ़ में सौर ऊर्जा अब केवल बिजली पैदा करने का साधन नहीं रह गई है, बल्कि यह घरेलू आत्मनिर्भरता और आर्थिक बचत का मजबूत जरिया बन रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में ‘प्रधानमंत्री सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना’ के तहत प्रदेश में करीब 95 हजार घरों की छतों पर रूफटॉप सोलर पैनल लगाए जा चुके हैं। इससे परिवारों को बिजली बिल में राहत मिल रही है और अतिरिक्त बिजली ग्रिड में भेजकर वे उपभोक्ता से ‘ऊर्जादाता’ बनने की ओर बढ़ रहे हैं।
डबल सब्सिडी से सोलर लगाना हुआ आसान
छत्तीसगढ़ में केंद्र और राज्य सरकार की संयुक्त आर्थिक सहायता योजना को खास बनाती है। 1 किलोवाट के सोलर प्लांट पर केंद्र से ₹30 हजार और राज्य से ₹15 हजार, यानी कुल ₹45 हजार तक की सब्सिडी मिल सकती है।
वहीं, 3 किलोवाट या उससे अधिक क्षमता के प्लांट पर केंद्र की अधिकतम ₹78 हजार की सब्सिडी के साथ राज्य सरकार की ओर से ₹30 हजार की अतिरिक्त सहायता दी जाती है। इस तरह पात्र उपभोक्ताओं को कुल ₹1.08 लाख तक की आर्थिक मदद मिल सकती है।
2026-27 में 70 हजार सोलर प्लांट का लक्ष्य
छत्तीसगढ़ सरकार ने योजना को आगे बढ़ाने के लिए बड़े लक्ष्य तय किए हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 में 60 हजार सोलर प्लांट लगाने का लक्ष्य रखा गया था, जिसके लिए ₹180 करोड़ का प्रावधान किया गया था। वहीं, वित्तीय वर्ष 2026-27 में 70 हजार सोलर प्लांट लगाने का लक्ष्य है और इसके लिए ₹210 करोड़ का प्रावधान किया गया है।
योजना के क्रियान्वयन की अहम जिम्मेदारी छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (CSPDCL) को सौंपी गई है।
राजनांदगांव में पूरे हुए 5 हजार सौर कनेक्शन
प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के तहत राजनांदगांव जिले में 5 हजार सौर कनेक्शन पूरे हो चुके हैं। रूफटॉप सोलर लगने से घरेलू उपभोक्ताओं को बिजली बिल में राहत मिल रही है और अक्षय ऊर्जा को बढ़ावा मिल रहा है।
जरूरत से ज्यादा बिजली पैदा होने पर उसे ग्रिड में भेजने की सुविधा भी उपभोक्ताओं के लिए अतिरिक्त आर्थिक लाभ का जरिया बन रही है।
3 किलोवाट प्लांट ने खत्म किया ₹1,200 का बिजली बिल
खैरागढ़ जिले के ग्राम खैरनावापारा निवासी दिवाकर लोधी ने घर की छत पर 3 किलोवाट का सोलर प्लांट लगवाया। इससे उनका करीब ₹1,200 का मासिक बिजली बिल शून्य हो गया। उनके सिस्टम से 203 यूनिट बिजली उत्पादन हुआ और उन्हें ₹510 का सोलर रिबेट भी मिला।
बिलासपुर में ₹3,500 प्रतिमाह की बचत
बिलासपुर के चांटीडीह निवासी अशोक कुमार साहू ने 3 किलोवाट और 4 किलोवाट क्षमता के सोलर पैनल लगवाए। इससे गर्मियों में आने वाले भारी बिजली बिल में कमी आई और उन्हें करीब ₹3,500 प्रतिमाह की बचत होने लगी।
सब्सिडी से प्लांट की शुरुआती लागत का बोझ भी कम हुआ। अब बचत की रकम परिवार की शिक्षा और दूसरी घरेलू जरूरतों में इस्तेमाल हो रही है।
शुभम राठौर का बिजली खर्च हुआ खत्म
गौरेला विकासखंड के ग्राम पंचायत भदौरा निवासी शुभम राठौर ने घर की छत पर 3 किलोवाट का सोलर प्लांट लगाया। इससे उनका ₹400 से ₹500 तक का मासिक बिजली खर्च खत्म हो गया।
उन्हें केंद्र सरकार से ₹78 हजार और राज्य सरकार से ₹30 हजार की अतिरिक्त सब्सिडी मिली। प्लांट से जरूरत से ज्यादा बिजली ग्रिड में जाने पर उन्हें अतिरिक्त आर्थिक लाभ भी मिल रहा है।
Consumer से Prosumer बनने की राह
प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना छत्तीसगढ़ में लोगों के बिजली इस्तेमाल करने के तरीके को बदल रही है। पहले परिवार सिर्फ बिजली के उपभोक्ता थे, लेकिन रूफटॉप सोलर के जरिए अब वे बिजली का उत्पादन करने वाले ‘Prosumer’ यानी ऊर्जादाता भी बन रहे हैं।
बिजली बिल में बचत, अतिरिक्त बिजली को ग्रिड में भेजने की सुविधा और सरकारी सब्सिडी—इन तीनों का फायदा मिलकर सौर ऊर्जा को घरेलू परिवारों के लिए आर्थिक रूप से आकर्षक बना रहा है।
स्वच्छ ऊर्जा के साथ पर्यावरण संरक्षण
रूफटॉप सोलर का फायदा सिर्फ बिजली बिल घटाने तक सीमित नहीं है। इससे स्वच्छ और अक्षय ऊर्जा को बढ़ावा मिलता है तथा पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता कम होती है। बड़ी संख्या में घरों की छतों पर सोलर पैनल लगने से छत्तीसगढ़ के हरित और टिकाऊ ऊर्जा मॉडल को भी मजबूती मिल रही है।
आत्मनिर्भर ऊर्जा मॉडल की ओर प्रदेश
प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के जरिए सरकार, बिजली वितरण व्यवस्था और आम नागरिकों की भागीदारी से छत्तीसगढ़ में नया ऊर्जा मॉडल तैयार हो रहा है। सब्सिडी, ऑनलाइन प्रक्रिया और वित्तीय सहायता ने रूफटॉप सोलर को आम परिवारों तक पहुंचाने में मदद की है।
अब प्रदेश में कई परिवार अपनी छत को सिर्फ खाली जगह नहीं, बल्कि ऊर्जा उत्पादन के केंद्र के रूप में देख रहे हैं। आने वाले समय में यह बदलाव छत्तीसगढ़ को स्वच्छ, सशक्त और आत्मनिर्भर ऊर्जा व्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकता है।