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गडकरी के ‘नई पीढ़ी को जिम्मेदारी’ बयान पर सफाई, बोले- राजनीति से कोई संबंध नहीं

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केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के ‘नई पीढ़ी को जिम्मेदारी सौंपने’ वाले बयान के बाद उनके कार्यालय की ओर से मंगलवार को स्पष्टीकरण जारी किया गया। गडकरी के ऑफिस ने कहा कि उन्होंने अपने ट्रस्ट से जुड़े सामाजिक कार्यों की जिम्मेदारी नई पीढ़ी को देने की बात कही थी। उनके बयान का राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है।

दरअसल, गडकरी के बयान के बाद इसे उनके राजनीतिक रिटायरमेंट से जोड़कर देखा जाने लगा था। उनका यह बयान 23 अगस्त को पुणे में आयोजित एक कार्यक्रम का है।

गडकरी ने कार्यक्रम में कहा था, “अब ज्यादा काम नहीं कर सकता। जब कर सकता था, तब किया। नई पीढ़ी को जिम्मेदारी सौंपनी चाहिए।”

नितिन गडकरी चार दशक के करीब समय से राजनीति में सक्रिय हैं और पिछले 12 वर्षों से केंद्र की मोदी सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं। वर्तमान में उनके पास सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय है।

गडकरी ने कार्यक्रम में क्या कहा था?

अब काम में मेरा दखल कम हो गया

23 अगस्त को नागपुर में आयोजित ‘एकलव्य एकल विद्यालय शिक्षक-पर्यवेक्षक प्रशिक्षण वर्ग’ कार्यक्रम में गडकरी ने कहा था कि वह अब पहले की तरह ज्यादा काम नहीं कर पाते। उन्होंने कहा कि जब काम करने की क्षमता थी, तब उन्होंने किया और अब उनके काम में दखल कम हो गया है।

युवाओं को रोज व्यायाम की सलाह

गडकरी ने युवाओं को फिटनेस पर ध्यान देने की सलाह भी दी। उन्होंने बताया कि वह रोज सुबह करीब ढाई घंटे एक्सरसाइज और प्राणायाम करते हैं। उन्होंने युवाओं से कम से कम आधा घंटा रोज व्यायाम और प्राणायाम करने की अपील की।

साइकिल से करते थे पार्टी का काम

अपने राजनीतिक जीवन के शुरुआती दिनों को याद करते हुए गडकरी ने बताया कि उनका जीवन पहले काफी अनियमित था। वह भावनाओं में आकर साइकिल और स्कूटर से पार्टी के काम के लिए निकल पड़ते थे।

उन्होंने एक किस्सा सुनाते हुए बताया कि उनकी पहचान के एक व्यक्ति के पास एम्बेसडर कार थी। जब पार्टी के बड़े नेता एयरपोर्ट आते थे, तो उनके आने-जाने की व्यवस्था के लिए उस कार मालिक को ही पार्टी अध्यक्ष बना दिया गया था।

पहले भी गडकरी के रिटायरमेंट की चर्चाएं उठ चुकी हैं

नई पीढ़ी को जिम्मेदारी सौंपने वाले बयान के बाद एक बार फिर गडकरी के राजनीतिक भविष्य को लेकर चर्चा शुरू हो गई। हालांकि, उनके कार्यालय ने साफ कर दिया कि इस बयान को राजनीति से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।

दो मौकों पर सार्वजनिक कार्यक्रम में बेहोश हुए गडकरी

7 दिसंबर 2018: अहमदनगर

महात्मा फुले कृषि विद्यापीठ के दीक्षांत समारोह में राष्ट्रगान के दौरान गडकरी अचानक लड़खड़ाकर बेहोश हो गए थे। महाराष्ट्र के तत्कालीन राज्यपाल सी. विद्यासागर राव ने उन्हें संभाला। डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें कुछ समय में सामान्य बताया।

उस समय गडकरी ने खुद बताया था कि उन्हें लो ब्लड शुगर की वजह से परेशानी हुई थी।

24 अप्रैल 2024: पुसद, यवतमाल

लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान पुसद में एक रैली में भाषण देते समय गडकरी अचानक मंच पर गिर पड़े थे। सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें संभाला। कुछ देर बाद वह ठीक हुए और उन्होंने अपना भाषण भी पूरा किया।

बाद में गडकरी ने बताया था कि तेज गर्मी के कारण उन्हें असहज महसूस हुआ था। इसके बाद वह अपने अगले कार्यक्रम के लिए रवाना हो गए थे।

गडकरी की सेहत को लेकर पहले भी जानकारी सामने आती रही है। 2011 में उन्होंने टाइप-2 डायबिटीज के इलाज के लिए गैस्ट्रिक/बेरियाट्रिक सर्जरी कराई थी। उस समय भाजपा की ओर से बताया गया था कि उनका ब्लड शुगर नियंत्रित करना मुश्किल था और शुरुआती डायबिटिक नेफ्रोपैथी की समस्या भी सामने आई थी।

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