Adulterated Khoya: रक्षाबंधन का त्योहार नजदीक आते ही बाजारों में मिठाइयों की मांग तेजी से बढ़ जाती है। इसी के साथ मिलावटी खोया और नकली मावे का खतरा भी बढ़ जाता है। हाल ही में उत्तर प्रदेश के कई जिलों में खाद्य सुरक्षा विभाग ने कार्रवाई करते हुए करीब 4,000 किलो मिलावटी खोया जब्त कर नष्ट किया है।
जांच में कुछ नमूनों में डिटर्जेंट, टैल्कम पाउडर, स्किम्ड मिल्क पाउडर, पाम ऑयल और हाइड्रोजन पेरॉक्साइड जैसी चीजों के इस्तेमाल की बात सामने आई है। ऐसे उत्पादों का सेवन पेट की परेशानी और फूड पॉइजनिंग जैसी समस्याओं का कारण बन सकता है। इसलिए त्योहार पर मिठाई खरीदते समय अतिरिक्त सावधानी जरूरी है।
असली खोया कैसे तैयार होता है?
असली खोया या मावा मुख्य रूप से दूध को धीमी आंच पर लगातार पकाकर तैयार किया जाता है। दूध का पानी धीरे-धीरे वाष्पित हो जाता है और आखिर में दूध के गाढ़े ठोस पदार्थ बचते हैं, जिन्हें खोया कहा जाता है।
अच्छी गुणवत्ता वाले खोये का रंग हल्का पीला या क्रीम जैसा हो सकता है। इसकी बनावट मुलायम होती है और सामान्यतः इसमें दूध जैसी प्राकृतिक खुशबू आती है।
खोया जल्दी खराब क्यों हो जाता है?
खोये में प्रोटीन, फैट और नमी मौजूद होती है। ये परिस्थितियां बैक्टीरिया और फफूंद के बढ़ने के लिए अनुकूल हो सकती हैं। इसी वजह से खोया अन्य कई खाद्य पदार्थों की तुलना में जल्दी खराब हो सकता है।
त्योहारों में मिलावट का खतरा क्यों बढ़ता है?
त्योहारों के समय खोया और उससे बनने वाली मिठाइयों की मांग अचानक बढ़ जाती है। ज्यादा मांग पूरी करने के लिए कम समय में बड़ी मात्रा में मावा तैयार करना पड़ता है।
मुनाफा बढ़ाने के लिए कुछ मिलावटखोर दूध की जगह सस्ती सामग्री या दूसरे पदार्थों का इस्तेमाल कर सकते हैं। बड़ी मात्रा में उत्पादन और सप्लाई के दौरान हर स्तर पर निगरानी भी चुनौतीपूर्ण हो जाती है।
खोये में किन चीजों की मिलावट हो सकती है?
मिलावटी खोया तैयार करने के लिए अलग-अलग जगहों पर अलग तरह के पदार्थों के इस्तेमाल की आशंका हो सकती है। उदाहरण के तौर पर:
- स्टार्च या मैदा: मात्रा बढ़ाने के लिए।
- पाम ऑयल: लागत कम करने के लिए।
- डिटर्जेंट: गाढ़ापन या बनावट बदलने के लिए।
- टैल्कम पाउडर: रंग और टेक्सचर में बदलाव के लिए।
- हाइड्रोजन पेरॉक्साइड: कुछ मामलों में खराब होने की प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए।
- सिंथेटिक रंग: उत्पाद को ज्यादा आकर्षक दिखाने के लिए।
- स्किम्ड मिल्क पाउडर या अन्य सस्ती सामग्री: डेयरी ठोस पदार्थ बढ़ाने के लिए।
मिलावटी खोया से क्या नुकसान हो सकता है?
मिलावटी या दूषित खोया खाने से कुछ लोगों में पेट दर्द, अपच, उल्टी, दस्त और फूड पॉइजनिंग जैसी समस्याएं हो सकती हैं। दूषण का स्तर और उसमें इस्तेमाल पदार्थ के अनुसार जोखिम अलग-अलग हो सकता है।
बुजुर्गों, छोटे बच्चों और पहले से स्वास्थ्य संबंधी समस्या वाले लोगों में खाद्य जनित बीमारी का असर अधिक गंभीर हो सकता है।
क्या घर पर खोये की शुद्धता जांच सकते हैं?
घर पर किए जाने वाले कुछ तरीकों से केवल शुरुआती अंदाजा लगाया जा सकता है। सटीक पुष्टि के लिए लैब टेस्ट सबसे भरोसेमंद तरीका है।
सोशल मीडिया के ये घरेलू टेस्ट पूरी तरह भरोसेमंद नहीं
हथेली पर रगड़कर सूंघना: केवल खुशबू के आधार पर शुद्धता तय नहीं की जा सकती।
गोली बनाना या उसमें दरार देखना: खोये की नमी और तैयारी की प्रक्रिया से भी बनावट बदल सकती है।
चीनी के साथ गर्म करना: गर्म करने पर पानी निकलना हमेशा मिलावट का संकेत नहीं होता। तापमान और नमी का भी असर पड़ सकता है।
वैज्ञानिक तरीके से कैसे जांच होती है?
मिलावट की पुष्टि के लिए लैब में अलग-अलग परीक्षण किए जा सकते हैं। इनमें स्टार्च की पहचान के लिए आयोडीन टेस्ट जैसे परीक्षण शामिल हैं। अन्य संदिग्ध पदार्थों की मौजूदगी की पुष्टि के लिए उपयुक्त रासायनिक या इंस्ट्रुमेंटल टेस्ट किए जाते हैं।
इसलिए सोशल मीडिया पर वायरल किसी एक घरेलू प्रयोग को अंतिम प्रमाण नहीं मानना चाहिए।
खोया खरीदते समय क्या करें?
सबसे सुरक्षित विकल्प है कि खोया घर पर तैयार किया जाए। बाजार से खरीदते समय भरोसेमंद दुकान या विश्वसनीय ब्रांड को प्राथमिकता दें। बहुत असामान्य रंग, गंध या बनावट वाला खोया खरीदने से बचें।
खोये के विकल्प भी हैं
अगर आपको खोया की गुणवत्ता पर भरोसा नहीं है, तो कुछ मिठाइयों में दूसरे डेयरी विकल्प इस्तेमाल किए जा सकते हैं।
दूध और मिल्क पाउडर: गर्म दूध की मदद से मिल्क पाउडर को गाढ़ी बनावट देकर पेड़ा, बर्फी या लड्डू जैसी मिठाइयों में इस्तेमाल किया जा सकता है।
इवैपोरेटेड मिल्क: इसमें सामान्य दूध की तुलना में पानी कम होता है, इसलिए इसे मिठाइयों में गाढ़ा करके इस्तेमाल किया जा सकता है।
फुल क्रीम दूध: इसे धीमी आंच पर लंबे समय तक पकाकर गाढ़ा किया जा सकता है। इसमें समय ज्यादा लगता है, लेकिन डेयरी फ्लेवर अच्छा मिलता है।
रक्षाबंधन पर मिठाई खरीदते समय रखें ये 8 सावधानियां
1. भरोसेमंद दुकान से खरीदें: ऐसी दुकान चुनें जहां साफ-सफाई और खाद्य सुरक्षा के नियमों का ध्यान रखा जाता हो।
2. मिठाई की ताजगी देखें: बासी, सूखी, अत्यधिक चिपचिपी या बदली हुई बनावट वाली मिठाई न लें।
3. असामान्य रंग से सावधान रहें: जरूरत से ज्यादा चमकीला या कृत्रिम दिखने वाला रंग संदेह पैदा कर सकता है।
4. गंध जांचें: तेज केमिकल जैसी गंध, बासीपन या असामान्य खुशबू हो तो मिठाई न खरीदें।
5. पैक्ड प्रोडक्ट पर लेबल देखें: पैकिंग की तारीख, एक्सपायरी, निर्माता और अन्य जरूरी जानकारी जरूर जांचें।
6. बिल जरूर लें: खरीदारी का बिल संभालकर रखें, खासकर बड़ी मात्रा में मिठाई लेते समय।
7. बहुत सस्ती मिठाई से सावधान रहें: बाजार भाव से असामान्य रूप से कम कीमत गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर सकती है।
8. जरूरत से ज्यादा न खरीदें: दूध से बनी मिठाइयों को लंबे समय तक रखने के बजाय जितनी जरूरत हो उतनी ही खरीदें और उचित तापमान पर रखें।
मिलावटी खोया खाने के बाद कब डॉक्टर से संपर्क करें?
अगर मिठाई खाने के बाद लगातार उल्टी, बार-बार दस्त, तेज पेट दर्द, चक्कर, अत्यधिक कमजोरी या डिहाइड्रेशन के लक्षण दिखाई दें, तो चिकित्सा सलाह लें। सांस लेने में दिक्कत या गंभीर एलर्जी जैसे लक्षण हों तो तुरंत मेडिकल मदद लें।
लक्षण 24 से 48 घंटे में ठीक न हों या लगातार बढ़ते जाएं, तो डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
रक्षाबंधन की मिठास रिश्तों से जुड़ी है, इसलिए मिठाई खरीदते समय सिर्फ स्वाद नहीं बल्कि उसकी गुणवत्ता और सुरक्षा पर भी ध्यान दें। थोड़ी सी सावधानी त्योहार को सुरक्षित और खुशहाल बनाने में मदद कर सकती है।