रायपुर। कुछ साल पहले तक छत्तीसगढ़ का नाम सुनते ही लोगों के मन में घने जंगल, नक्सलवाद और हिंसा की तस्वीर उभरती थी। राज्य के कई प्राकृतिक रूप से बेहद खूबसूरत इलाकों में जाने से पर्यटक भी बचते थे। लेकिन अब हालात बदलते नजर आ रहे हैं।
जिन जंगलों और पहाड़ी क्षेत्रों को कभी सुरक्षा कारणों से संवेदनशील माना जाता था, वही इलाके अब प्राकृतिक पर्यटन और एडवेंचर डेस्टिनेशन के रूप में पहचान बना रहे हैं। खासकर बस्तर के झरने, जंगल, पहाड़ और आदिवासी संस्कृति देशभर के पर्यटकों को आकर्षित कर रहे हैं।
कुछ वर्षों में कई गुना बढ़ी पर्यटकों की संख्या
छत्तीसगढ़ में पर्यटन को लेकर लोगों की बढ़ती दिलचस्पी आंकड़ों में भी दिखाई देती है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, 2020 में करीब 30.13 लाख पर्यटक राज्य पहुंचे थे।
इसके बाद संख्या में लगातार वृद्धि दर्ज की गई।
- 2021: करीब 1.15 करोड़ पर्यटक
- 2022: करीब 2.36 करोड़ पर्यटक
- 2023: करीब 2.60 करोड़ पर्यटक
- 2024: करीब 3.14 करोड़ पर्यटक
यानी कुछ ही वर्षों में छत्तीसगढ़ में पर्यटकों की आवाजाही में बड़ा इजाफा हुआ है। इससे राज्य के पर्यटन क्षेत्र में तेजी से हो रहे बदलाव का अंदाजा लगाया जा सकता है।
दूसरे राज्यों से तुलना में भी दिखी तेजी
छत्तीसगढ़ में पर्यटन के बढ़ते आंकड़ों की तुलना देश के प्रमुख पर्यटन राज्यों से करने पर भी तस्वीर सामने आती है।
हिमाचल प्रदेश में 2020 में करीब 22 लाख और 2021 में लगभग 56 लाख पर्यटक पहुंचे थे। 2022 में यह संख्या बढ़कर करीब 1.51 करोड़ और 2023 में लगभग 1.60 करोड़ रही।
जम्मू-कश्मीर में भी पर्यटन गतिविधियों में तेजी देखी गई। वहीं गोवा में 2023 के दौरान करीब 86 लाख पर्यटकों के पहुंचने का आंकड़ा सामने आया था।
इन आंकड़ों के बीच छत्तीसगढ़ में भी पर्यटन का लगातार विस्तार हो रहा है। राज्य में पर्यटकों की बढ़ती संख्या बताती है कि अब यहां के प्राकृतिक और सांस्कृतिक स्थलों को लेकर लोगों की दिलचस्पी बढ़ रही है।
मानसून में पर्यटन का नया रिकॉर्ड बनने की उम्मीद
बारिश का मौसम छत्तीसगढ़ के पर्यटन के लिए खास माना जाता है। मानसून के दौरान राज्य के झरने, पहाड़ और जंगल और ज्यादा खूबसूरत नजर आते हैं।
इसी वजह से इस साल मानसून सीजन में पर्यटकों की संख्या बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, राज्य में हर महीने करीब 20 लाख तक पर्यटक अलग-अलग पर्यटन स्थलों का रुख कर रहे हैं।
अगर पर्यटकों की यह रफ्तार बरकरार रहती है तो मानसून के दौरान पर्यटन का नया रिकॉर्ड बनने की संभावना है। देश के दूसरे राज्यों से भी छत्तीसगढ़ आने वाले पर्यटकों की संख्या बढ़ रही है।
नक्सल प्रभावित क्षेत्रों की बदल रही तस्वीर
पर्यटन विभाग के एमडी सौमिल रंजन चौबे के मुताबिक, राज्य के जिन क्षेत्रों की पहचान लंबे समय तक नक्सलवाद के कारण पर्यटन के लिहाज से कमजोर रही, अब उन्हीं इलाकों की प्राकृतिक खूबसूरती लोगों को आकर्षित कर रही है।
खास तौर पर बस्तर की वादियां, झरने, घने जंगल, आदिवासी संस्कृति और प्राकृतिक पर्यटन स्थल सोशल मीडिया के जरिए भी लोगों तक पहुंच रहे हैं।
सोशल मीडिया पर सामने आने वाली तस्वीरों और वीडियो ने इन जगहों के प्रति लोगों की उत्सुकता बढ़ाई है। अब पर्यटक बस्तर को सिर्फ एक संवेदनशील क्षेत्र के तौर पर नहीं, बल्कि प्राकृतिक और सांस्कृतिक पर्यटन स्थल के रूप में भी देखने लगे हैं।
पर्यटन बढ़ने से स्थानीय लोगों को फायदा
पर्यटकों की बढ़ती आवाजाही का असर स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई दे रहा है। होटल, होम-स्टे, रेस्टोरेंट, टैक्सी सेवाओं और स्थानीय गाइड से जुड़े लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर बन रहे हैं।
इसके अलावा हस्तशिल्प और स्थानीय उत्पादों की बिक्री से जुड़े लोगों को भी पर्यटकों की बढ़ती संख्या का लाभ मिल रहा है।
इस तरह छत्तीसगढ़ में पर्यटन का विस्तार केवल पर्यटकों की संख्या बढ़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह स्थानीय स्तर पर रोजगार और आय के नए अवसर भी पैदा कर रहा है। बस्तर समेत राज्य के कई इलाकों की बदलती पहचान इस बदलाव की बड़ी तस्वीर पेश कर रही है।