FSSAI Front of Pack Labelling: पैकेज्ड फूड में अगर तय सीमा से अधिक नमक, चीनी या सैचुरेटेड फैट मौजूद है, तो आने वाले समय में इसकी जानकारी पैकेट के सामने ही लाल रंग के चेतावनी निशान के जरिए दी जा सकती है। फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) ने इस दिशा में प्रस्ताव तैयार किया है और सुप्रीम कोर्ट के सामने अपना हलफनामा पेश किया है।
इस प्रस्ताव का उद्देश्य ग्राहकों को पैकेट वाला खाना खरीदते समय उसमें मौजूद अधिक नमक, शुगर या फैट के बारे में आसानी से जानकारी देना है।
सुप्रीम कोर्ट ने FSSAI से मांगा था जवाब
पैकेज्ड और डिब्बाबंद खाद्य पदार्थों पर अनिवार्य चेतावनी लेबल लगाने की मांग को लेकर ‘3S एंड अवर हेल्थ सोसाइटी’ नामक पब्लिक चैरिटेबल ट्रस्ट ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी।
13 अगस्त को हुई सुनवाई के दौरान जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के विनोद चंद्रन की पीठ ने नियम बनाने में देरी को लेकर FSSAI से सवाल किए थे। इसके बाद खाद्य नियामक की ओर से अदालत में यह प्रस्ताव रखा गया।
सवाल-जवाब में समझें FSSAI के प्रस्ताव की पूरी जानकारी
सवाल 1: FSSAI ने कोर्ट के सामने क्या प्रस्ताव रखा है?
जवाब: FSSAI ने बताया है कि अधिक फैट, शुगर और नमक वाले खाद्य एवं पेय पदार्थों के पैकेट के सामने लाल रंग का चेतावनी लेबल लगाने का प्रस्ताव है। इसका उद्देश्य ग्राहक को बिना ज्यादा जानकारी पढ़े यह समझने में मदद करना है कि संबंधित उत्पाद में इन पोषक तत्वों की मात्रा अधिक है।
सवाल 2: पैकेट पर चेतावनी कैसी दिखाई देगी?
जवाब: प्रस्ताव के अनुसार, पैकेट के फ्रंट पर लाल रंग का षटकोण यानी छह कोनों वाला निशान लगाया जाएगा। इसमें उपभोक्ता के लिए स्पष्ट चेतावनी दी जाएगी।
सवाल 3: हाई फैट, हाई शुगर या हाई साल्ट तय करने का आधार क्या होगा?
जवाब: किसी खाद्य पदार्थ को HFSS यानी हाई फैट, हाई शुगर और हाई साल्ट श्रेणी में रखने के लिए ICMR-नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूट्रिशन की ‘डायट्री गाइडलाइंस फॉर इंडियंस, 2024’ में दिए मानकों को आधार बनाया जाएगा।
सवाल 4: क्या यह व्यवस्था सभी पैकेज्ड फूड पर तुरंत लागू होगी?
जवाब: नहीं। FSSAI ने इसे चरणबद्ध तरीके से लागू करने का सुझाव दिया है। इसका उद्देश्य खाद्य उद्योग को अपने उत्पादों की संरचना में जरूरी बदलाव करने का समय देना है।
- पहला चरण: जिन उत्पादों में नमक, शुगर या फैट में से कम से कम दो चीजें तय सीमा से अधिक होंगी, उन पर लाल चेतावनी लेबल लगाने का प्रस्ताव है। अधिक मीठे कोल्ड ड्रिंक भी इसके दायरे में आ सकते हैं।
- दूसरा चरण: आगे चलकर किसी एक पोषक तत्व की मात्रा निर्धारित सीमा से अधिक होने पर भी फ्रंट पर चेतावनी देने का प्रावधान लागू किया जा सकता है।
सवाल 5: क्या कुछ खाद्य पदार्थों को छूट मिलेगी?
जवाब: प्रस्ताव में कुछ उत्पादों को इस व्यवस्था से बाहर रखने की बात कही गई है। सिंगल-इंग्रीडिएंट यानी एक ही सामग्री से बने उत्पाद और प्राकृतिक रूप से अधिक फैट, शुगर या नमक वाले कुछ खाद्य पदार्थों को छूट दी जा सकती है।
इसमें शुद्ध घी, खाद्य तेल, सामान्य नमक, चीनी, गुड़ और शहद जैसे उत्पाद शामिल बताए गए हैं।
सवाल 6: नए लेबल का सबसे ज्यादा फायदा किसे होगा?
जवाब: FSSAI के अनुसार, आसान चेतावनी लेबलिंग से ग्राहक खाद्य उत्पाद खरीदते समय अधिक जागरूक निर्णय ले सकेंगे। इसका फायदा विशेष रूप से बच्चों और संवेदनशील वर्गों को हो सकता है, जो कई बार उत्पाद में मौजूद पोषण संबंधी जानकारी को विस्तार से नहीं पढ़ पाते।
सवाल 7: फ्रंट ऑफ पैक लेबलिंग यानी FOPL क्या है?
जवाब: FOPL का मतलब Front of Pack Labelling है। इसमें खाद्य पैकेट के सामने ही प्रमुख पोषण संबंधी जानकारी सरल तरीके से दिखाई जाती है।
इसका उद्देश्य यह है कि ग्राहक पैकेट पलटकर लंबी न्यूट्रिशन टेबल पढ़े बिना ही यह समझ सके कि किसी उत्पाद में शुगर, नमक या फैट की मात्रा अधिक है या नहीं।
सवाल 8: अभी पैकेज्ड फूड की न्यूट्रिशन जानकारी कहां मिलती है?
जवाब: वर्तमान में खाद्य उत्पादों की पोषण संबंधी जानकारी आमतौर पर पैकेट के पीछे या साइड में दी जाती है। इसमें प्रति 100 ग्राम, 100 मिलीलीटर या एक सर्विंग के आधार पर कैलोरी, फैट, प्रोटीन, शुगर और सोडियम जैसी जानकारी दी जाती है।
सवाल 9: फ्रंट लेबल से ग्राहक को क्या जानकारी मिलेगी?
जवाब: इसका उद्देश्य ग्राहक को यह समझने में मदद करना है कि किसी पैकेज्ड फूड में कैलोरी, शुगर, नमक या फैट की मात्रा कितनी है और वह उत्पाद स्वास्थ्य के लिहाज से कितना उपयुक्त है।
यानी ग्राहक को खरीदारी के समय ही संभावित जोखिम के बारे में एक आसान संकेत मिल सकेगा।
सवाल 10: फ्रंट ऑफ पैक लेबलिंग की जरूरत क्यों महसूस हुई?
जवाब: पैकेज्ड और अल्ट्राप्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों में अधिक मात्रा में नमक, शुगर और फैट का सेवन स्वास्थ्य के लिए चिंता का विषय माना जाता है। फ्रंट लेबलिंग का उद्देश्य इन चीजों की जानकारी को आसान बनाना है, ताकि ग्राहक कम समय में बेहतर विकल्प चुन सके।
सवाल 11: इससे आम लोगों को क्या फायदा हो सकता है?
जवाब: इस व्यवस्था से न्यूट्रिशन से जुड़ी जटिल जानकारी को सरल तरीके से सामने लाने में मदद मिल सकती है। ग्राहक उत्पाद खरीदने से पहले ही उसकी प्रमुख पोषण संबंधी विशेषताओं को देखकर अधिक सोच-समझकर फैसला ले सकेंगे।
इससे अधिक नमक, शुगर और फैट वाले खाद्य पदार्थों के सेवन को कम करने के लिए जागरूकता बढ़ाने में भी मदद मिल सकती है।
सवाल 12: सुप्रीम कोर्ट के मामले में यह मुद्दा इतना महत्वपूर्ण क्यों है?
जवाब: पैकेज्ड फूड में मौजूद अधिक नमक, चीनी और फैट को लेकर स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं बढ़ रही हैं। इसी पृष्ठभूमि में फ्रंट ऑफ पैक चेतावनी लेबल को लेकर चर्चा तेज हुई है।
सुप्रीम कोर्ट में चल रही कार्यवाही के बीच FSSAI का प्रस्ताव सामने आया है। हालांकि, प्रस्ताव और अंतिम लागू नियम में अंतर हो सकता है, इसलिए उपभोक्ताओं को अंतिम अधिसूचना और आधिकारिक नियमों का इंतजार करना होगा।