राजिम – शिक्षक का काम सिर्फ किताबों का ज्ञान देना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को बेहतर भविष्य की राह दिखाना भी है। राजिम क्षेत्र के शिक्षक सुरेश शर्मा इसी जिम्मेदारी को पूरी लगन के साथ निभा रहे हैं। शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए करीब एक दशक पहले उन्हें राजभवन में आयोजित समारोह में राज्यपाल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। यह सम्मान न सिर्फ उनके लिए, बल्कि पूरे राजिम क्षेत्र के लिए गौरव का विषय बना।
रोचक तरीके से पढ़ाई, बच्चों में बढ़ी सीखने की ललक
घटकर्रा मिडिल स्कूल में पदस्थ सुरेश शर्मा पढ़ाई को बच्चों के लिए बोझ नहीं, बल्कि रुचि का विषय बनाने पर जोर देते हैं। वे पारंपरिक तरीके से आगे बढ़कर अलग-अलग रोचक तरीकों का इस्तेमाल करते हैं, जिससे विद्यार्थियों की पढ़ाई के प्रति दिलचस्पी बनी रहती है। उनके मार्गदर्शन में बच्चों का शैक्षणिक प्रदर्शन भी बेहतर रहा है।
मृदुभाषी स्वभाव और मंच संचालन में भी पहचान
सुरेश शर्मा अपने सहज और मिलनसार व्यवहार के साथ-साथ कुशल मंच संचालन के लिए भी जाने जाते हैं। विद्यालयीन गतिविधियों से लेकर विभिन्न सार्वजनिक आयोजनों में उनकी प्रभावी प्रस्तुति देखने को मिलती है। उनकी संवाद शैली और आत्मविश्वास ने उन्हें क्षेत्र में एक अलग पहचान दिलाई है।
शिक्षा के साथ सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों में सक्रिय
उनका योगदान विद्यालय की चारदीवारी तक सीमित नहीं है। सामाजिक, धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों में भी वे सक्रिय भूमिका निभाते हैं। संगीत में उनकी रुचि और विभिन्न विधाओं की समझ उन्हें बहुआयामी व्यक्तित्व प्रदान करती है। धार्मिक आयोजनों में वे भक्ति गीतों की प्रस्तुति भी देते हैं।
रामायण के गहरे जानकार, भक्ति संगीत में भी रुचि
सुरेश शर्मा को रामायण का अच्छा ज्ञान है। देवी मां और भगवान शिव की भक्ति से जुड़े भजनों को वे अपनी मधुर आवाज में प्रस्तुत करते हैं। धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों में उनकी सक्रियता के चलते क्षेत्र में उनके बड़ी संख्या में प्रशंसक भी हैं।
‘बच्चों का भविष्य संवारना शिक्षक की सबसे बड़ी जिम्मेदारी’
सुरेश शर्मा का मानना है कि आज के विद्यार्थी ही देश का भविष्य हैं। इसलिए शिक्षक की जिम्मेदारी केवल पाठ्यक्रम पूरा कराने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। बच्चों को सही दिशा देना, उनकी प्रतिभा पहचानना और उनमें आत्मविश्वास पैदा करना भी शिक्षक के दायित्व का हिस्सा है। इसी सोच के साथ वे विद्यार्थियों के साथ लगातार जुड़कर काम करते हैं।
सम्मान से बढ़ी जिम्मेदारी, आज भी जारी है शिक्षा की साधना
राज्यपाल पुरस्कार उनके लंबे शैक्षणिक योगदान और समर्पण की महत्वपूर्ण पहचान है। सम्मान मिलने के वर्षों बाद भी सुरेश शर्मा उसी उत्साह के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं। शिक्षा, सामाजिक सरोकार, धर्म और संस्कृति—हर क्षेत्र में उनकी सक्रियता ने उन्हें राजिम में एक शिक्षक से आगे मार्गदर्शक और बहुआयामी व्यक्तित्व के रूप में स्थापित किया है।