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छत्तीसगढ़ में पर्यटन बनेगा रोजगार का बड़ा जरिया: उद्योग का दर्जा, होम-स्टे और टूरिज्म सर्किट से युवाओं-स्थानीय कारोबारियों को मिलेंगे नए अवसर

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Chhattisgarh Tourism: छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक खूबसूरती, जंगल, झरने, गुफाएं, जनजातीय परंपराएं और ऐतिहासिक धरोहर अब सिर्फ पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र नहीं रहेंगे, बल्कि रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का माध्यम भी बन रहे हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार पर्यटन क्षेत्र को आर्थिक विकास के महत्वपूर्ण इंजन के तौर पर विकसित करने पर जोर दे रही है।

पर्यटन को उद्योग का दर्जा देने के साथ होम-स्टे, पर्यटन सर्किट, कौशल विकास और ग्रामीण व जनजातीय पर्यटन जैसी योजनाओं के जरिए स्थानीय युवाओं, महिलाओं, कलाकारों और छोटे उद्यमियों को आय के नए साधनों से जोड़ने की कोशिश की जा रही है।

पर्यटन को मिला उद्योग का दर्जा

राज्य सरकार ने पर्यटन क्षेत्र को औद्योगिक विकास नीति 2024-30 में शामिल किया है। यह नीति 1 नवंबर 2024 से प्रभावी है। पर्यटन को उद्योग का दर्जा मिलने के बाद होटल, होम-स्टे, रेस्टोरेंट, स्थानीय परिवहन, टूर गाइड, टूर ऑपरेटर और हस्तशिल्प जैसे क्षेत्रों में निवेश और रोजगार की संभावनाएं बढ़ने की उम्मीद है।

इसका उद्देश्य यह है कि प्रदेश में आने वाले पर्यटकों से पैदा होने वाली आर्थिक गतिविधियों का फायदा स्थानीय स्तर तक पहुंचे और युवाओं तथा छोटे कारोबारियों के लिए नए अवसर बनें।

पर्यटकों की बढ़ती संख्या से बढ़ा कारोबार का दायरा

छत्तीसगढ़ में पर्यटन गतिविधियों के बढ़ने का अंदाजा पर्यटकों की संख्या से भी लगाया जा सकता है। भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, राज्य में घरेलू पर्यटक यात्राओं की संख्या 2021 में 47,47,417 थी।

यह संख्या बढ़कर 2023 में 2,60,22,069, 2024 में 3,14,87,900 और 2025 में 3,33,96,138 तक पहुंच गई।

पर्यटकों की संख्या बढ़ने का सीधा असर होटल, भोजन, परिवहन, गाइड सेवाओं और स्थानीय उत्पादों की मांग पर पड़ सकता है। इससे रोजगार के साथ स्वरोजगार के अवसर भी बढ़ सकते हैं।

बस्तर में पर्यटन से स्थानीय रोजगार का मॉडल

बस्तर छत्तीसगढ़ के प्रमुख पर्यटन क्षेत्रों में तेजी से उभर रहा है। चित्रकोट, तीरथगढ़, कांगेर घाटी और कुटुमसर जैसे प्राकृतिक स्थल देश-दुनिया के पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।

सरकार यहां इको-टूरिज्म, जनजातीय पर्यटन और एडवेंचर टूरिज्म को बढ़ावा देने के साथ पर्यटन सर्किट विकसित करने पर जोर दे रही है।

इससे स्थानीय युवाओं के अलावा गाइड, वाहन चालक, कलाकार, कारीगर और छोटे दुकानदारों को भी आय के नए अवसर मिल सकते हैं।

होम-स्टे से घर बैठे कमाई का मौका

ग्रामीण और जनजातीय इलाकों में होम-स्टे पर्यटन को स्थानीय परिवारों की आय से जोड़ने का प्रभावी माध्यम बन सकता है। राज्य सरकार ने छत्तीसगढ़ होम-स्टे नीति के जरिए इस क्षेत्र को बढ़ावा देने की पहल की है।

वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में इसके लिए 10 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

होम-स्टे से सिर्फ कमरे किराए पर देने तक सीमित कमाई नहीं होगी, बल्कि स्थानीय भोजन, परिवहन, गाइड सेवा और हस्तशिल्प जैसे क्षेत्रों को भी फायदा मिल सकता है। यानी एक पर्यटक का आगमन कई स्थानीय परिवारों के लिए कमाई का जरिया बन सकता है।

धुड़मारास ने गांव को दिलाई वैश्विक पहचान

बस्तर का धुड़मारास गांव ग्रामीण पर्यटन की संभावनाओं का उदाहरण बनकर सामने आया है। 2024 में संयुक्त राष्ट्र पर्यटन संगठन के Best Tourism Villages Upgrade Programme के लिए चयनित 20 गांवों में धुड़मारास को जगह मिली थी।

कांगेर घाटी क्षेत्र में प्रकृति और एडवेंचर टूरिज्म के विकास से स्थानीय लोगों को होम-स्टे, गाइड, भोजन, परिवहन और हस्तशिल्प जैसी गतिविधियों से जोड़ने की संभावनाएं बढ़ी हैं।

धुड़मारास की अंतरराष्ट्रीय पहचान बस्तर के ग्रामीण पर्यटन को नई दिशा देने में मदद कर रही है।

कौशल विकास से युवा बन सकते हैं रोजगारदाता

पर्यटन बढ़ने के साथ प्रशिक्षित युवाओं की मांग भी बढ़ेगी। होटल मैनेजमेंट, फूड सर्विस, टूर गाइडिंग, ड्राइविंग, डिजिटल मार्केटिंग, फोटोग्राफी और होम-स्टे संचालन जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षण लेकर युवा रोजगार या अपना कारोबार शुरू कर सकते हैं।

सरकारी जानकारी के अनुसार बस्तर संभाग में मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना के तहत 85 कोर्स पंजीकृत थे।

इस तरह कौशल विकास युवाओं को सिर्फ नौकरी तलाशने वालों के बजाय अपना रोजगार शुरू करने की दिशा में भी आगे बढ़ा सकता है।

भोरमदेव कॉरिडोर से धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा

कबीरधाम का भोरमदेव मंदिर धार्मिक और ऐतिहासिक पर्यटन का महत्वपूर्ण केंद्र है। 2 जनवरी 2026 को भोरमदेव मंदिर कॉरिडोर का भूमिपूजन किया गया था। राज्य सरकार के प्रकाशन में इस परियोजना के लिए 146 करोड़ रुपये के निवेश पैकेज का उल्लेख है।

कॉरिडोर के विकास से श्रद्धालुओं और पर्यटकों की सुविधाएं बेहतर होने के साथ होटल, भोजनालय, परिवहन, पूजा सामग्री और स्थानीय हस्तशिल्प से जुड़े कारोबारों को भी फायदा मिलने की संभावना है।

बेहतर कनेक्टिविटी से बढ़ेगा पर्यटन कारोबार

पर्यटन को मजबूत बनाने में सड़क, रेल, हवाई और डिजिटल कनेक्टिविटी की अहम भूमिका है। बस्तर में रेल और सड़क अधोसंरचना के विकास के साथ एयर कनेक्टिविटी पर भी जोर दिया जा रहा है।

पर्यटकों के लिए किसी स्थान तक पहुंच आसान होने पर वहां होटल, रेस्टोरेंट, परिवहन और स्थानीय बाजार जैसी सेवाओं की मांग बढ़ती है। इससे निवेश और रोजगार दोनों के अवसर मजबूत हो सकते हैं।

मैनपाट से जशपुर तक पर्यटन का विस्तार

पर्यटन विकास को बस्तर तक सीमित न रखते हुए प्रदेश के दूसरे क्षेत्रों पर भी ध्यान दिया जा रहा है। सरगुजा का मैनपाट, जशपुर का कोटेबिरा और कई अन्य प्राकृतिक व धार्मिक स्थल पर्यटन की नई संभावनाएं पैदा कर रहे हैं।

वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में मैनपाट के लिए 5 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। वहीं कोटेबिरा में धार्मिक पर्यटन से संबंधित विकास कार्यों को भी शामिल किया गया है।

पर्यटन से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ता छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ में पर्यटन को स्थानीय अर्थव्यवस्था से जोड़ने की कोशिश अब कई स्तरों पर दिखाई दे रही है। पर्यटन को उद्योग का दर्जा, होम-स्टे नीति, ग्रामीण पर्यटन, पर्यटन सर्किट, कौशल विकास और प्रमुख पर्यटन स्थलों का विकास इसी दिशा की पहल हैं।

इन प्रयासों का लक्ष्य स्थानीय युवाओं, महिलाओं, कलाकारों, कारीगरों और छोटे उद्यमियों को पर्यटन की बढ़ती अर्थव्यवस्था से जोड़ना है। पर्यटन से रोजगार, रोजगार से स्वरोजगार और स्वरोजगार से आत्मनिर्भरता की यह श्रृंखला आने वाले समय में छत्तीसगढ़ की ग्रामीण और स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

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