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बलरामपुर में 4.51 करोड़ की कथित वित्तीय अनियमितता: प्रभारी DEO को नोटिस, जांच रिपोर्ट के बाद बढ़ी हलचल

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बलरामपुर। छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी एमआर यादव पर लगाए गए करीब 4 करोड़ 51 लाख रुपये की कथित वित्तीय अनियमितता के आरोपों की जांच अब अगले चरण में पहुंच गई है। जांच टीम ने मामले से जुड़ी अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट कलेक्टर को सौंप दी है। रिपोर्ट मिलने के बाद कलेक्टर ने प्रभारी DEO को नोटिस जारी कर उनका पक्ष और जवाब मांगा है।

वहीं, प्रदेश के कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने मामले पर कहा है कि जांच पूरी होने के बाद जो भी दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

4.51 करोड़ रुपये के आहरण को लेकर उठे सवाल

मामला प्रभारी DEO एमआर यादव द्वारा जिला कोषालय से विभिन्न कार्यों के लिए 4 करोड़ रुपये से अधिक की राशि आहरित किए जाने से जुड़ा बताया जा रहा है। आरोपों के मुताबिक, इस राशि से स्वच्छता सामग्री, खेल सामग्री, फर्नीचर और अन्य सामानों की खरीद से संबंधित भुगतान किए गए।

राशि के आहरण और भुगतान की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठने के बाद प्रशासन ने मामले की जांच के लिए एक टीम गठित की थी। इसके बाद संबंधित दस्तावेजों और भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड की पड़ताल शुरू की गई।

अधिकारियों और कर्मचारियों के बयान दर्ज

जांच के दौरान टीम ने शिक्षा विभाग से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों से पूछताछ कर उनके बयान दर्ज किए। इसके साथ ही मामले से संबंधित जरूरी दस्तावेज उपलब्ध कराने के लिए प्रभारी DEO को भी तलब किया गया था।

जांच टीम ने उपलब्ध दस्तावेजों के साथ अधिकारियों और कर्मचारियों के बयानों का परीक्षण करने के बाद अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट कलेक्टर को सौंप दी है।

प्रारंभिक रिपोर्ट के बाद DEO को नोटिस

जांच रिपोर्ट मिलने के बाद कलेक्टर ने प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी एमआर यादव को नोटिस जारी किया है। उनसे कथित वित्तीय अनियमितता से जुड़े मामले में अपना पक्ष स्पष्ट करते हुए जवाब प्रस्तुत करने को कहा गया है।

अब DEO की ओर से दिए जाने वाले जवाब और जांच के दौरान सामने आए दस्तावेजों एवं तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

मंत्री रामविचार नेताम बोले- दोषियों पर होगी कार्रवाई

मामले को लेकर प्रदेश के कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने भी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद यदि कोई व्यक्ति दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

मंत्री ने यह भी कहा कि भ्रष्टाचार या अनियमितता के मामलों में दोषी अधिकारियों को जिले में रहने नहीं दिया जाएगा। उनके बयान के बाद मामले में आगे की कार्रवाई को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

जांच पूरी होने के बाद साफ होगी जिम्मेदारी

फिलहाल यह मामला प्रारंभिक जांच और DEO से जवाब मांगे जाने के चरण में है। जांच रिपोर्ट में सामने आए तथ्यों, संबंधित अधिकारियों के जवाब और उपलब्ध दस्तावेजों की विस्तृत समीक्षा के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि वित्तीय अनियमितता के आरोपों में किसकी जिम्मेदारी तय होती है।

प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर अब सभी की नजरें टिकी हैं।

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