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Sonu Sood: सत्य निकेतन हादसे के बाद छात्रों की सुरक्षा को लेकर सोनू सूद की अपील, बोले- कैंपस के पास बनें सस्ते और सुरक्षित हॉस्टल

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Sonu Sood: दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में पीजी बिल्डिंग गिरने की घटना के बाद छात्रों के सुरक्षित आवास का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। हादसे ने राजधानी में छात्रों के लिए उपलब्ध पीजी और हॉस्टल की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। इसी बीच अभिनेता सोनू सूद ने सरकार से छात्रों के लिए सुरक्षित और किफायती हॉस्टल तैयार करने की अपील की है।

सोनू सूद का कहना है कि पढ़ाई के लिए दूसरे शहरों का रुख करने वाले छात्रों को सिर्फ बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके लिए सुरक्षित रहने की व्यवस्था करना भी जरूरी है। सत्य निकेतन में हुई घटना के समय पीजी बिल्डिंग में बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे।

दिल्ली में 7 लाख छात्र, हॉस्टल सीटें सिर्फ 30 हजार

सोनू सूद ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए दिल्ली में हॉस्टल की कमी की ओर ध्यान आकर्षित किया। उनके मुताबिक, राजधानी में करीब 7 लाख छात्र पढ़ाई कर रहे हैं, जबकि हॉस्टल की क्षमता महज 30 हजार सीटों के आसपास है।

इस हिसाब से करीब 31 छात्रों में से सिर्फ एक छात्र को हॉस्टल की सुविधा मिल पाती है। बाकी छात्रों को मजबूरी में निजी पीजी, किराए के कमरों या अन्य आवासीय विकल्पों में रहना पड़ता है।

सरकारी जमीन पर बनाए जाएं हॉस्टल

सोनू सूद ने सरकार के सामने एक प्रस्ताव भी रखा है। उन्होंने सुझाव दिया कि यूनिवर्सिटी और कॉलेजों के आसपास मौजूद खाली सरकारी जमीन की पहचान करके वहां छात्रों के लिए सुरक्षित और कम लागत वाले हॉस्टल बनाए जाएं।

उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि विश्वविद्यालयों को अपने कैंपस में अतिरिक्त हॉस्टल तैयार करने के लिए निर्माण की अनुमति दी जा सकती है। इससे छात्रों को सुरक्षित आवास मिल सकेगा और बाहर से पढ़ने आए विद्यार्थियों के परिवारों की चिंता भी कम होगी।

‘नीति में छोटा बदलाव बचा सकता है जिंदगी’

सोनू सूद के मुताबिक, छात्रों के आवास से जुड़ी व्यवस्था में मामूली नीतिगत बदलाव भी बड़ा असर डाल सकता है। सुरक्षित हॉस्टल मिलने से विद्यार्थियों के साथ उनके माता-पिता को भी राहत मिलेगी।

उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह की हॉस्टल व्यवस्था सरकार और विश्वविद्यालयों के लिए आर्थिक रूप से उपयोगी मॉडल बन सकती है। उनके मुताबिक, सही नीति और बेहतर व्यवस्था किसी छात्र की जिंदगी और उसके भविष्य के सपने को बचाने में मदद कर सकती है।

हॉस्टल की कमी के चलते PG में रहते हैं छात्र

दिल्ली यूनिवर्सिटी के कई कॉलेजों में सीमित हॉस्टल सीटों के कारण दूसरे शहरों से आने वाले विद्यार्थियों के सामने निजी पीजी का विकल्प ही बचता है। छात्रों की बड़ी संख्या और सीमित हॉस्टल क्षमता के कारण दिल्ली में पीजी की मांग भी काफी बढ़ी है।

सत्य निकेतन की घटना के बाद अब निजी पीजी में रहने वाले छात्रों की इमारतों की सुरक्षा, फायर सेफ्टी और अन्य जरूरी मानकों को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। ऐसे में छात्रों के लिए सुरक्षित और किफायती आवास उपलब्ध कराना एक अहम मुद्दा बनकर सामने आया है।

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