Supreme Court on BCCI: भारतीय क्रिकेट के प्रशासन को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक बार फिर अहम सुनवाई हुई है। शीर्ष अदालत ने BCCI और राज्य क्रिकेट संघों से सवाल किया है कि उन्हें National Sports Governance Act, 2025 के दायरे से अलग रखने की वजह क्या है।
अदालत का यह सवाल ऐसे समय आया है, जब नया खेल कानून लागू हो चुका है और देश में खेल संस्थाओं के प्रशासन को लेकर न्यायिक निगरानी का दायरा लगातार चर्चा में है।
CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने की सुनवाई
इस मामले की सुनवाई मंगलवार को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने की। बेंच में जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल हैं।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने BCCI और विभिन्न राज्य क्रिकेट संघों की ओर से पेश वकीलों से कहा कि वे इस मुद्दे पर अपने पक्ष को लेकर संबंधित पक्षों से निर्देश प्राप्त करें।
अदालत ने खास तौर पर यह जानना चाहा कि BCCI और राज्य क्रिकेट संघों के पदाधिकारियों की सेवा की शर्तों और नियमों को 2025 के नए कानून के दायरे में क्यों नहीं लाया जाना चाहिए।
BCCI के प्रशासन पर फिर उठे सवाल
सुप्रीम कोर्ट का ताजा रुख भारतीय क्रिकेट के प्रशासनिक ढांचे की एक बार फिर न्यायिक समीक्षा की संभावना की ओर इशारा करता है।
हालांकि, BCCI से संबंधित यह पहली बार नहीं है जब शीर्ष अदालत ने बोर्ड के कामकाज में हस्तक्षेप या सुधार की जरूरत पर सवाल उठाए हों। सुप्रीम कोर्ट 2014 से BCCI के प्रशासन और उससे जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई करता आ रहा है।
इसी लंबी न्यायिक प्रक्रिया के दौरान भारतीय क्रिकेट प्रशासन में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए थे।
लोढ़ा समिति के सुझावों से बदला था BCCI का ढांचा
BCCI में सुधार के लिए सुप्रीम कोर्ट ने तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश आरएम लोढ़ा की अध्यक्षता में एक समिति गठित की थी। समिति को बोर्ड के कामकाज में सुधार के सुझाव देने के साथ-साथ BCCI के लिए नया संविधान तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई थी।
बाद में सुप्रीम कोर्ट ने समिति की कई सिफारिशों को स्वीकार किया। इसके बाद BCCI की संगठनात्मक व्यवस्था, प्रशासनिक कामकाज और पदाधिकारियों से जुड़े नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव हुए।
पदाधिकारियों के कार्यकाल पर भी बदले थे नियम
BCCI पदाधिकारियों के कार्यकाल को लेकर भी सुप्रीम कोर्ट पहले महत्वपूर्ण फैसला दे चुका है। सितंबर 2022 में अदालत ने BCCI के संविधान में संशोधन को मंजूरी दी थी।
इसके तहत किसी पदाधिकारी को पहले राज्य क्रिकेट संघ में छह साल और फिर BCCI में छह साल, यानी लगातार कुल 12 साल तक पद पर बने रहने की अनुमति दी गई। इसके बाद तीन साल का कूलिंग-ऑफ पीरियड निर्धारित किया गया।
अदालत ने राज्य संघ और BCCI, दोनों स्तरों पर एक ही पद पर लगातार दो कार्यकाल की व्यवस्था को भी मंजूरी दी थी। इसके बाद तीन साल का ब्रेक यानी कूलिंग-ऑफ पीरियड रखा गया।
इससे पहले BCCI के नियमों में राज्य संघ या बोर्ड में लगातार दो तीन-वर्षीय कार्यकाल पूरे करने के बाद तीन साल का अनिवार्य ब्रेक शामिल था।
नए कानून से BCCI पर क्या असर पड़ेगा?
अब National Sports Governance Act, 2025 के दायरे को लेकर सुप्रीम कोर्ट के सवाल ने भारतीय क्रिकेट प्रशासन पर बहस को फिर चर्चा में ला दिया है।
आने वाली सुनवाई में यह तस्वीर और साफ हो सकती है कि BCCI और राज्य क्रिकेट संघों के मौजूदा प्रशासनिक नियम नए कानून के प्रावधानों के साथ किस तरह मेल खाते हैं और क्या बोर्ड को इसके दायरे से अलग रखने का कोई कानूनी आधार है।
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के सवालों के बाद BCCI के प्रशासन और खेल संस्थाओं की स्वायत्तता को लेकर एक बार फिर महत्वपूर्ण कानूनी बहस शुरू हो गई है।