वाराणसी: रुद्राक्ष अंतरराष्ट्रीय सहयोग एवं सम्मेलन केंद्र में बुधवार को 9वें राष्ट्रीय पोषण माह का शुभारंभ किया गया। यह अभियान 9 सितंबर से 8 अक्टूबर 2026 तक चलेगा। कार्यक्रम में केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, केंद्रीय राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर और प्रदेश की महिला कल्याण, बाल विकास एवं पुष्टाहार मंत्री बेबी रानी मौर्य मौजूद रहीं।
इस मौके पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश की पोषण व्यवस्था में तकनीक के इस्तेमाल को लेकर कई जानकारियां साझा कीं। उन्होंने बताया कि पोषण आहार के परिवहन और वितरण को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए GPS ट्रैकिंग और QR कोड आधारित व्यवस्था लागू की गई है।
GPS से डिपो से आंगनबाड़ी तक ट्रैक होगा पोषण आहार
मुख्यमंत्री के मुताबिक, पोषण सामग्री लेकर चलने वाले वाहनों में GPS ट्रैकिंग सिस्टम लगाया गया है। इससे डिपो से लेकर आंगनबाड़ी केंद्र तक वाहन की आवाजाही को रियल टाइम में देखा जा सकेगा।
इसके साथ ही पोषण आहार के प्रत्येक पैकेट पर एक यूनिक QR कोड लगाया जा रहा है। इसके जरिए यह पता लगाया जा सकेगा कि संबंधित सामग्री किस उत्पादन इकाई से भेजी गई और आखिर में किस लाभार्थी तक पहुंची।
सरकार का कहना है कि इस डिजिटल ट्रेसिंग व्यवस्था से पोषण सामग्री के वितरण में होने वाली गड़बड़ी और लीकेज को कम करने में मदद मिलेगी। स्थानीय स्तर पर उपलब्ध पोषक तत्वों को शामिल कर टेक-होम राशन को भी ज्यादा पौष्टिक बनाने पर जोर दिया जा रहा है।
योगी का पिछली सरकारों पर निशाना
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 2017 से पहले की व्यवस्था का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय प्रदेश के बड़ी संख्या में आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थिति खराब थी।
उन्होंने दावा किया कि कई केंद्रों पर पेयजल, शौचालय और साफ-सफाई जैसी मूलभूत सुविधाएं तक पर्याप्त नहीं थीं। बच्चों को घर से टाट-पट्टी लेकर आने की स्थिति का भी उन्होंने उल्लेख किया।
योगी ने आरोप लगाया कि उस दौर में पोषण आहार की व्यवस्था भी ठीक नहीं थी और एक शराब माफिया के पास रेसिपी सप्लाई का ठेका होने की बात कही।
70 हजार आंगनबाड़ी केंद्रों को बनाया गया मॉडल सेंटर
मुख्यमंत्री ने कहा कि मौजूदा सरकार ने आंगनबाड़ी व्यवस्था में व्यापक बदलाव किए हैं। उनके मुताबिक, प्रदेश के करीब 70 हजार आंगनबाड़ी केंद्रों का कायाकल्प कर उन्हें ‘मॉडल आंगनबाड़ी केंद्र’ के रूप में विकसित किया गया है।
उन्होंने बताया कि इन केंद्रों में बच्चों के लिए सुरक्षित और आधुनिक वातावरण तैयार करने पर प्रति केंद्र करीब 20 लाख रुपये तक खर्च किए गए हैं।
स्मार्टफोन से ऑनलाइन दर्ज हो रही बच्चों की जानकारी
योगी आदित्यनाथ ने बताया कि प्रदेश के करीब 1.90 लाख आंगनबाड़ी केंद्रों और 895 बाल विकास परियोजनाओं में काम करने वाली आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को स्मार्टफोन उपलब्ध कराए गए हैं।
इन उपकरणों की मदद से बच्चों की वृद्धि, वजन और लाभार्थियों से जुड़ी जानकारी ऑनलाइन रियल टाइम में दर्ज की जा रही है। इससे पोषण कार्यक्रमों की निगरानी और लाभार्थियों से संबंधित डेटा को अपडेट रखने में मदद मिल रही है।
‘मेरा आंगनबाड़ी, मेरी जिम्मेदारी’ पर जोर
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत 2047’ के विजन का उल्लेख करते हुए कहा कि मजबूत और सुपोषित भारत का लक्ष्य केवल बड़े शहरों के विकास से हासिल नहीं किया जा सकता।
उन्होंने कहा कि इसकी बुनियाद गांवों, बेसिक स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों से मजबूत होगी। योगी ने ‘मेरा आंगनबाड़ी, मेरी जिम्मेदारी’ के मंत्र को जमीन पर लागू करने का आह्वान किया।
उनके मुताबिक, बच्चों को स्वस्थ, सुपोषित और शिक्षित बनाने पर ध्यान देकर ही उन्हें भविष्य में देश के विकास में प्रभावी योगदान देने के लिए तैयार किया जा सकता है।