केंद्र सरकार ने देश के रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में 10,783 करोड़ रुपये की लागत वाली तीन बड़ी रेल मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी दी गई। इन प्रोजेक्ट्स को वर्ष 2029-30 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देते हुए बताया कि इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद पांच राज्यों में करीब 656 किलोमीटर रेल नेटवर्क का विस्तार और क्षमता में बढ़ोतरी होगी। इसका उद्देश्य व्यस्त रेल मार्गों पर ट्रेनों की आवाजाही को सुगम बनाना और माल व यात्री परिवहन की क्षमता बढ़ाना है।
7 हाई-डेंसिटी रेल कॉरिडोर को बनाया जाएगा फोर-लेन
रेल मंत्री के अनुसार देश में करीब 11,000 किलोमीटर लंबे हाई-डेंसिटी रेल कॉरिडोर हैं। इनमें से सिर्फ सात प्रमुख कॉरिडोर पर रेलवे का लगभग 40 फीसदी ट्रैफिक संचालित होता है। इन महत्वपूर्ण रूटों की क्षमता बढ़ाने के लिए इन्हें चार-लेन यानी चार ट्रैक वाले कॉरिडोर में विकसित किया जा रहा है।
इन सात मार्गों में दिल्ली-मुंबई, मुंबई-चेन्नई, चेन्नई-कोलकाता और कोलकाता-दिल्ली के चार रूट शामिल हैं, जिन्हें मिलाकर स्वर्णिम चतुर्भुज बनता है। इसके अलावा दिल्ली-चेन्नई और मुंबई-कोलकाता के दो डायगोनल रूट तथा दिल्ली-गुवाहाटी कॉरिडोर भी इस योजना का हिस्सा हैं।
सरकार के मुताबिक करीब 2,000 किलोमीटर का काम पूरा हो चुका है, जबकि लगभग 5,000 किलोमीटर हिस्से पर निर्माण कार्य जारी है। शेष करीब 4,000 किलोमीटर के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार की जा रही है।
तीन अहम रेल परियोजनाओं पर बढ़ेगा काम
रेल यातायात के बढ़ते दबाव और ट्रेनों की देरी को कम करने के लिए कई व्यस्त रेल सेक्शनों पर अतिरिक्त लाइनें बिछाई जाएंगी।
पहली परियोजना में खड़गपुर से झारसुगुड़ा (बागडीही) के बीच करीब 367 किलोमीटर लंबी चौथी रेल लाइन विकसित की जाएगी। इस प्रोजेक्ट पर लगभग 6,528 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
दूसरी परियोजना के तहत कटनी-पेंड्रा रोड सेक्शन में चौथी रेल लाइन का निर्माण किया जाएगा। वहीं तीसरे प्रोजेक्ट में बिलासपुर (उसलापुर)-पेंड्रा रोड के बीच तीसरी रेल लाइन तैयार की जाएगी।
इसके अलावा अरकुनम-रेनिगुन्टा सेक्शन में 77 किलोमीटर लंबी तीसरी और चौथी रेल लाइन के लिए भी 1,936 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है।
5 राज्यों के 14 जिलों को मिलेगा सीधा फायदा
इन परियोजनाओं को पीएम गति शक्ति नेशनल मास्टर प्लान के तहत तैयार किया गया है। इसका लाभ पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के कुल 14 जिलों को मिलने की उम्मीद है।
रेल नेटवर्क के विस्तार से करीब 4,790 गांवों की लगभग 56 लाख ग्रामीण आबादी को मुख्य रेल नेटवर्क तक बेहतर और सीधी पहुंच मिल सकेगी। इससे परिवहन सुविधाओं में सुधार के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर भी बढ़ने की संभावना है।
सरकार का मानना है कि बेहतर रेल कनेक्टिविटी से ग्रामीण क्षेत्रों की आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
धार्मिक और पर्यटन स्थलों तक पहुंच होगी आसान
नई रेल लाइनों के निर्माण से धार्मिक और पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण कई इलाकों की कनेक्टिविटी भी बेहतर होगी।
ओडिशा में तारातारिणी मंदिर और झारसुगुड़ा के आसपास स्थित प्राचीन श्री क्षेत्र जगन्नाथ मंदिर तक यात्रियों के लिए पहुंच आसान होने की उम्मीद है।
इसी तरह मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के कई प्रमुख पर्यटन एवं धार्मिक स्थलों को भी इसका लाभ मिलेगा। इनमें बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व, अमरकंटक मंदिर, विराटेश्वर मंदिर, ज्वालेश्वर धाम, अचानकमार टाइगर रिजर्व, खूंटाघाट बांध और रतनपुर महामाया मंदिर जैसे प्रमुख स्थल शामिल हैं।
माल ढुलाई की क्षमता बढ़ेगी, पर्यावरण को भी फायदा
यह रेल नेटवर्क कोयला, सीमेंट, लौह अयस्क और स्टील जैसे भारी माल के परिवहन के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण है। अतिरिक्त रेल लाइनों से नेटवर्क की क्षमता बढ़ने पर रेलवे को सालाना करीब 27 मिलियन टन अतिरिक्त माल ढोने में मदद मिलेगी।
सड़क परिवहन की तुलना में रेल के जरिए माल ढुलाई बढ़ने से लॉजिस्टिक्स लागत कम करने में मदद मिलेगी। साथ ही सरकार के अनुमान के अनुसार इससे हर साल करीब 12 करोड़ लीटर कच्चे तेल के आयात की बचत हो सकती है।
पर्यावरण के मोर्चे पर भी इस परियोजना का असर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। रेल परिवहन बढ़ने से लगभग 62 करोड़ किलोग्राम कार्बन उत्सर्जन में कमी आने का अनुमान है। इसे पर्यावरणीय प्रभाव के लिहाज से करीब 2.48 करोड़ पेड़ लगाने के बराबर माना गया है।
कुल मिलाकर, इन परियोजनाओं का उद्देश्य रेलवे की क्षमता बढ़ाने के साथ यात्री और माल परिवहन को तेज करना, ग्रामीण क्षेत्रों की कनेक्टिविटी सुधारना तथा लॉजिस्टिक्स और पर्यावरण के मोर्चे पर लाभ हासिल करना है।