आजकल तेजी से मस्कुलर बॉडी बनाने की चाह में कई युवा जिम के साथ-साथ स्टेरॉयड्स का सहारा लेने लगे हैं। कम समय में मसल्स और स्ट्रेंथ बढ़ाने का यह तरीका भले ही बाहर से आकर्षक नजर आए, लेकिन गलत तरीके से या बिना मेडिकल निगरानी के स्टेरॉयड्स का इस्तेमाल शरीर के हार्मोनल सिस्टम को प्रभावित कर सकता है।
डॉक्टर्स के अनुसार, लंबे समय तक एनाबॉलिक स्टेरॉयड लेने से पुरुषों में गाइनेकोमैस्टिया यानी ब्रेस्ट टिश्यू बढ़ने, टेस्टोस्टेरोन कम होने, बाल झड़ने और फर्टिलिटी से जुड़ी परेशानियों का खतरा हो सकता है। इंदौर में सामने आए कुछ मामलों में समस्या इतनी बढ़ गई कि मरीजों को सर्जरी तक करानी पड़ी।
रिपोर्ट के मुताबिक, इंदौर के डॉक्टरों के पास हर महीने करीब 10 ऐसे मामले पहुंच रहे हैं। इनमें बड़ी संख्या 18 से 22 साल के युवाओं की बताई जा रही है, जो बेहतर लुक और मस्कुलर फिजिक के लिए स्टेरॉयड्स का इस्तेमाल कर रहे हैं।
आखिर स्टेरॉयड क्या होते हैं?
एंडोक्राइनोलॉजिस्ट डॉ. अर्चना जुनेजा के मुताबिक, स्टेरॉयड ऐसे केमिकल कंपाउंड हैं जिन्हें शरीर प्राकृतिक रूप से भी बनाता है। ये हार्मोन की तरह काम करते हैं और शरीर की कई महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं को नियंत्रित करने में भूमिका निभाते हैं।
इनका संबंध तनाव से निपटने, सूजन को नियंत्रित करने, मेटाबॉलिज्म और रिप्रोडक्शन जैसी प्रक्रियाओं से होता है। मेडिकल साइंस में स्टेरॉयड के कृत्रिम रूप भी तैयार किए गए हैं, जिनका इस्तेमाल डॉक्टर कई बीमारियों और स्वास्थ्य संबंधी स्थितियों के इलाज में करते हैं।
स्टेरॉयड मुख्य रूप से कितने प्रकार के होते हैं?
व्यापक तौर पर स्टेरॉयड को दो प्रमुख श्रेणियों में समझा जा सकता है:
1. कॉर्टिकोस्टेरॉयड
इन दवाओं का इस्तेमाल मुख्य रूप से सूजन, एलर्जी और ऑटोइम्यून बीमारियों जैसी स्थितियों के उपचार में किया जाता है।
2. एनाबॉलिक-एंड्रोजेनिक स्टेरॉयड
इन्हें AAS भी कहा जाता है। ये शरीर में टेस्टोस्टेरोन के प्रभाव की नकल करते हैं और मसल मास व स्ट्रेंथ बढ़ाने से जुड़े प्रभाव पैदा कर सकते हैं। कुछ विशेष मेडिकल परिस्थितियों में इनका इस्तेमाल चिकित्सकीय निगरानी में किया जाता है।
लेकिन जिम में मसल्स बढ़ाने के लिए इनका खुद से इस्तेमाल करना जोखिम भरा हो सकता है।
किन परिस्थितियों में डॉक्टर स्टेरॉयड दे सकते हैं?
स्टेरॉयड हर व्यक्ति के लिए एक जैसी दवा नहीं है। डॉक्टर मरीज की बीमारी, लक्षण, मेडिकल हिस्ट्री और जरूरत के आधार पर तय करते हैं कि स्टेरॉयड की आवश्यकता है या नहीं।
इसलिए किसी दूसरे व्यक्ति को फायदा पहुंचाने वाली स्टेरॉयड दवा को अपनी मर्जी से लेना सुरक्षित नहीं माना जा सकता।
युवाओं में स्टेरॉयड का चलन क्यों बढ़ रहा है?
कम समय में मस्कुलर बॉडी हासिल करने की चाह इस ट्रेंड की एक बड़ी वजह है। सोशल मीडिया पर लगातार दिखाई जाने वाली फिटनेस और बॉडी-बिल्डिंग कंटेंट भी युवाओं पर प्रभाव डाल सकती है।
कई युवा तेजी से परिणाम पाने के दबाव में स्टेरॉयड्स को शॉर्टकट के तौर पर देखने लगते हैं। समस्या यह है कि इसके संभावित साइड इफेक्ट्स और लंबे समय के जोखिमों की पूरी जानकारी उन्हें नहीं होती।
इंदौर के मामलों से समझिए खतरा
18 साल के युवक को बढ़े ब्रेस्ट टिश्यू की समस्या
खंडवा जिले का 18 वर्षीय युवक NEET की तैयारी के लिए इंदौर में रह रहा था। करीब छह महीने जिम करने के बावजूद जब उसे अपेक्षित परिणाम नहीं मिले तो उसने ट्रेनर की सलाह पर मसल्स बढ़ाने के लिए स्टेरॉयड लेना शुरू कर दिया।
कुछ समय बाद उसके ब्रेस्ट टिश्यू बढ़ने लगे। दवाओं से समस्या में सुधार नहीं हुआ और आखिरकार उसे सर्जरी करानी पड़ी।
21 साल के युवक ने खुद शुरू किया टेस्टोस्टेरोन
इंदौर के 21 वर्षीय युवक ने इंटरनेट पर जल्दी मसल्स बनाने के तरीके खोजे और इसके बाद टेस्टोस्टेरोन सप्लीमेंट लेना शुरू कर दिया।
कुछ समय बाद उसके ब्रेस्ट टिश्यू बढ़ने लगे। शर्मिंदगी के कारण उसने लंबे समय तक यह बात किसी को नहीं बताई। बाद में मेडिकल जांच में हार्मोनल असंतुलन सामने आया।
22 साल के युवक की बॉडी तो बनी, लेकिन समस्या भी बढ़ी
एक 22 वर्षीय युवक ने जिम में दोस्तों की सलाह पर स्टेरॉयड लेना शुरू किया। इससे उसकी मस्कुलर बॉडी में बदलाव आया, लेकिन इसके साथ ब्रेस्ट टिश्यू बढ़ने लगे और बाइसेप्स का आकार भी असामान्य रूप से बढ़ गया।
समस्या बढ़ने पर आखिरकार उसे भी सर्जरी का सहारा लेना पड़ा।
रिसर्च में भी सामने आए स्टेरॉयड के संभावित नुकसान
एनाबॉलिक स्टेरॉयड के प्रभाव को लेकर 2017 और 2021 में नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन में दो अलग-अलग सिस्टमैटिक रिव्यू प्रकाशित हुए थे। इनमें एनाबॉलिक स्टेरॉयड के गलत इस्तेमाल से पुरुषों के टेस्टोस्टेरोन और अन्य रिप्रोडक्टिव हार्मोन्स पर पड़ने वाले प्रभावों का उल्लेख किया गया।
लंबे समय तक गलत इस्तेमाल की स्थिति में हार्मोनल बदलावों के साथ गाइनेकोमैस्टिया और फर्टिलिटी से जुड़ी समस्याएं भी हो सकती हैं।
बिना डॉक्टर की सलाह स्टेरॉयड लेने से क्या खतरे हैं?
एनाबॉलिक स्टेरॉयड का अनियंत्रित इस्तेमाल शरीर के प्राकृतिक हार्मोन सिस्टम को प्रभावित कर सकता है। इसका असर अलग-अलग लोगों में अलग हो सकता है और इसमें कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं शामिल हो सकती हैं।
संभावित जोखिमों में हार्मोनल असंतुलन, फर्टिलिटी पर असर, हृदय संबंधी समस्याएं, लिवर पर प्रभाव और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियां शामिल हो सकती हैं।
इसलिए जिम या बॉडी-बिल्डिंग के लिए स्टेरॉयड शुरू करने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
किन लोगों में जोखिम ज्यादा हो सकता है?
बिना चिकित्सकीय सलाह एनाबॉलिक स्टेरॉयड का इस्तेमाल किसी के लिए भी सुरक्षित विकल्प नहीं माना जाता। हालांकि, पहले से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं वाले लोगों या कुछ विशेष दवाएं लेने वालों में जोखिम और बढ़ सकता है।
इसलिए स्टेरॉयड लेने से पहले अपनी मेडिकल हिस्ट्री और मौजूदा दवाओं के बारे में डॉक्टर को जानकारी देना जरूरी है।
महिलाओं के लिए भी जोखिम कम नहीं
एनाबॉलिक स्टेरॉयड के गलत इस्तेमाल से महिलाओं में भी हार्मोनल बदलाव हो सकते हैं। संभावित समस्याओं में शामिल हैं:
- हार्मोनल असंतुलन
- पीरियड्स का अनियमित होना
- शरीर पर अनचाहे बाल बढ़ना
- मुंहासे और बाल झड़ना
- आवाज का भारी होना
- आवाज में स्थायी बदलाव
- फर्टिलिटी प्रभावित होना
इनमें से कुछ बदलाव लंबे समय तक बने रह सकते हैं, इसलिए बिना चिकित्सकीय निगरानी इनके इस्तेमाल से बचना जरूरी है।
क्या स्टेरॉयड की निर्भरता हो सकती है?
लगातार और गलत तरीके से स्टेरॉयड लेने पर कुछ लोगों में डिपेंडेंसी विकसित हो सकती है। मसल्स कम होने या अपनी परफॉर्मेंस घटने के डर से वे इसे छोड़ने में परेशानी महसूस कर सकते हैं।
लगातार बाहरी स्टेरॉयड लेने से शरीर की प्राकृतिक हार्मोन उत्पादन प्रणाली भी प्रभावित हो सकती है। इसलिए इन्हें अपनी मर्जी से शुरू करना ही नहीं, बल्कि लंबे समय से इस्तेमाल के बाद अचानक बंद करना भी चिकित्सकीय सलाह के बिना उचित नहीं है।
बिना स्टेरॉयड के कैसे बनाएं मसल्स?
मसल्स बनाने के लिए जरूरी नहीं कि शॉर्टकट अपनाया जाए। सही डाइट, नियमित स्ट्रेंथ ट्रेनिंग, पर्याप्त नींद और लगातार मेहनत से धीरे-धीरे मसल्स डेवलप की जा सकती हैं।
पर्याप्त कैलोरी लें
मसल्स बनाने के लिए शरीर को पर्याप्त ऊर्जा चाहिए। जरूरत से कम कैलोरी लेने पर ग्रोथ प्रभावित हो सकती है।
प्रोटीन को डाइट का हिस्सा बनाएं
दाल, पनीर, दूध, अंडे, सोया, चिकन और मछली जैसे प्रोटीन स्रोत डाइट में शामिल किए जा सकते हैं।
स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करें
वेट ट्रेनिंग या बॉडीवेट एक्सरसाइज को अपनी क्षमता और लक्ष्य के अनुसार नियमित रूप से करें।
धीरे-धीरे बढ़ाएं वजन और रेप्स
प्रोग्रेसिव ओवरलोड के जरिए समय के साथ एक्सरसाइज का वजन या रेप्स बढ़ाना मसल्स ग्रोथ में मदद कर सकता है।
नींद को नजरअंदाज न करें
हर दिन करीब 7 से 8 घंटे की पर्याप्त नींद शरीर की रिकवरी के लिए महत्वपूर्ण है।
मसल्स को आराम दें
एक ही मसल ग्रुप को लगातार ट्रेन करने के बजाय पर्याप्त रिकवरी टाइम देना जरूरी है।
हाइड्रेशन बनाए रखें
वर्कआउट और रोजमर्रा की गतिविधियों के दौरान पर्याप्त पानी पीते रहें।
जरूरी सावधानी: स्टेरॉयड या किसी भी हार्मोनल दवा का इस्तेमाल डॉक्टर की सलाह के बिना न करें। अगर स्टेरॉयड लेने के बाद शरीर में असामान्य बदलाव, हार्मोन संबंधी लक्षण या अन्य परेशानी महसूस हो रही है, तो योग्य डॉक्टर से जांच कराएं।