दुर्ग। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में 6 साल की बच्ची से यौन हिंसा और हत्या के मामले में कोर्ट ने उसके सगे चाचा को मौत की सजा सुनाई है। विशेष पॉक्सो कोर्ट ने करीब 17 महीने चली सुनवाई के बाद 10 सितंबर 2026 को आरोपी को दोषी करार दिया। वारदात अप्रैल 2025 में कन्या पूजन के दिन हुई थी।
पुलिस के मुताबिक, 24 वर्षीय आरोपी ने बच्ची को बहाने से घर की छत पर बने अधूरे कमरे में ले जाकर उसके साथ यौन हिंसा की। इसके बाद गला दबाकर उसे मारने की कोशिश की और अचेत अवस्था में बच्ची को पड़ोसी की पुरानी कार में छिपा दिया। आरोपी को लगा था कि बच्ची की मौत हो चुकी है।
हालांकि, बच्ची जब कार से बरामद हुई, तब उसकी सांसें चल रही थीं। गंभीर हालत में उसे अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
बच्ची की तलाश में परिवार के साथ शामिल रहा आरोपी
वारदात के बाद आरोपी करीब तीन घंटे तक परिवार और पुलिस के साथ बच्ची को खोजने का नाटक करता रहा। पुलिस के मुताबिक, इस दौरान वह बार-बार उसी कार के पास जा रहा था, जिसमें बच्ची को छिपाया गया था।
सिविल ड्रेस में निगरानी कर रहे क्राइम ब्रांच के जवानों को उसका यह व्यवहार संदिग्ध लगा। इसके बाद पुलिस ने कार की जांच की और बच्ची को बरामद किया।
शुरुआत में आरोपी पुलिस को लगातार गुमराह करता रहा। पूछताछ के दौरान उसने अपना जुर्म कबूल किया। हालांकि, शुरुआती दौर में परिवार के कुछ सदस्यों ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए आरोपी को फंसाए जाने की आशंका जताई थी।
कन्या पूजा के दिन हुई थी वारदात
पुलिस के अनुसार, 6 अप्रैल 2025 की सुबह करीब 8 बजे बच्ची अपनी बुआ-दादी के घर पहुंची थी। वहां कन्या पूजा की तैयारियां चल रही थीं। घर की महिलाएं पूजा और रसोई के काम में व्यस्त थीं।
इसी दौरान आरोपी चाचा बच्ची को बहला-फुसलाकर छत पर बने अधूरे कमरे में ले गया। आरोप है कि वहां उसने बच्ची के साथ यौन हिंसा की और उसकी चीख दबाने के लिए गला दबाया। जांच में उसके शरीर पर सिगरेट से जलाने के निशान भी मिले।
करीब 10 बजे बच्ची कन्या भोज में शामिल हुई। इसके बाद दूसरे बच्चे वहां से चले गए, लेकिन बच्ची घर नहीं लौटी। दोपहर बाद परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की और शाम करीब 4 से 5 बजे के बीच पुलिस को सूचना दी।
CCTV से लेकर DNA तक, ऐसे आगे बढ़ी जांच
बच्ची के लापता होने की सूचना मिलते ही पुलिस ने आसपास के CCTV फुटेज खंगाले। कन्या भोज में मौजूद बच्चों से भी पूछताछ की गई। जांच में सामने आया कि बच्ची दादी के घर से अन्य बच्चों के साथ बाहर निकली ही नहीं थी।
इसके बाद पुलिस का शक घर के आसपास मौजूद लोगों पर गहराने लगा। मामले की गंभीरता को देखते हुए 10 सदस्यीय SIT गठित की गई।
पुलिस के मुताबिक, वैज्ञानिक जांच, DNA सैंपल और अन्य साक्ष्यों ने जांच को मजबूती दी। घटनास्थल और आरोपी के कपड़ों से मिले जैविक नमूनों का DNA बच्ची के नमूनों से मेल खाया।
पड़ोसी की कार में छिपाया था बच्ची को
जांच के अनुसार, आरोपी को पता था कि पड़ोसी की पुरानी कार का एक दरवाजा ठीक से लॉक नहीं होता। इसी का फायदा उठाकर उसने बच्ची के अचेत शरीर को कार में छिपा दिया।
पुलिस के अनुसार, मेडिकल और पोस्टमॉर्टम जांच में सामने आया कि बच्ची को कार में रखने के समय उसकी सांसें चल रही थीं। अप्रैल की गर्मी में बंद कार के भीतर तापमान बढ़ने और ऑक्सीजन की कमी के कारण उसकी हालत और बिगड़ गई।
शाम करीब 7 बजे बच्ची कार से मिली। उसके शरीर पर गंभीर चोटों के निशान थे। मेडिकल जांच में यौन हिंसा और जलाए जाने के निशान भी सामने आए।
पुरानी रंजिश के चलते पड़ोसी को फंसाने का आरोप
शुरुआत में पुलिस का ध्यान कार मालिक की ओर भी गया था। उससे पूछताछ और मेडिकल जांच की गई। बाद में जांच में आरोपी चाचा और कार मालिक के बीच पुरानी रंजिश की बात सामने आई।
पुलिस के मुताबिक, इसी विवाद के चलते आरोपी ने बच्ची को पड़ोसी की कार में छिपाया, ताकि शक कार मालिक पर जाए।
वारदात सामने आने के बाद स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश फैल गया। भीड़ ने थाने का घेराव किया और कार तथा कार मालिक के घर में तोड़फोड़ की। घर में आग लगाने की घटना भी सामने आई थी। स्थिति को देखते हुए इलाके में पुलिस बल तैनात करना पड़ा।
थाने में हंगामा, आरोपी की सुरक्षा बढ़ाई गई
घटना के विरोध में बड़ी संख्या में लोग मोहन नगर थाने पहुंचे थे। इस दौरान पुलिस से झड़प और थाने में तोड़फोड़ की स्थिति बनी।
दुर्ग अधिवक्ता संघ ने भी फैसला लिया था कि जिले का कोई वकील आरोपी की ओर से पैरवी नहीं करेगा। हालांकि, न्यायिक प्रक्रिया के तहत आरोपी को कानूनी सहायता उपलब्ध कराई गई।
सुरक्षा को देखते हुए आरोपी को मेडिकल जांच के लिए दुर्ग अस्पताल के बजाय सुपेला अस्पताल ले जाया गया था। वहां भी लोगों और मेडिकल स्टाफ में आक्रोश देखने को मिला और आरोपी के साथ हाथापाई की स्थिति बनी। पुलिस ने उसे सुरक्षा के बीच अस्पताल से बाहर निकाला।
कई गवाह मुकर गए, DNA सबूत बना अहम आधार
पुलिस ने 9 मई 2025 को कोर्ट में चालान पेश किया। 26 मई 2025 को आरोपी के खिलाफ आरोप तय किए गए और 11 जून 2025 से गवाहों के बयान दर्ज होने लगे।
सुनवाई के दौरान कुछ स्थानीय गवाह अपने बयानों से मुकर गए। इसके बावजूद वैज्ञानिक साक्ष्यों ने अभियोजन के मामले को मजबूत बनाए रखा।
पुलिस के मुताबिक, DNA जांच के अलावा बच्ची के शरीर पर मिले दांतों के निशान और सिगरेट से जलाए जाने के निशानों की भी वैज्ञानिक जांच कराई गई थी।
2 सितंबर को सुनवाई पूरी, 10 सितंबर को आया फैसला
विशेष पॉक्सो कोर्ट की न्यायाधीश ने 2 सितंबर 2026 को सुनवाई पूरी करने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था। इसके बाद 10 सितंबर 2026 को अदालत ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए फांसी की सजा सुनाई।
फिलहाल मौत की सजा को लागू करने से पहले हाईकोर्ट की पुष्टि की न्यायिक प्रक्रिया पूरी होना बाकी है।
नोट: यह रिपोर्ट उपलब्ध पुलिस जांच, अभियोजन पक्ष के साक्ष्यों और अदालत के फैसले से संबंधित दी गई जानकारी पर आधारित है। फांसी की सजा पर हाईकोर्ट की पुष्टि की प्रक्रिया अभी शेष है।




