रायपुर। छत्तीसगढ़ में प्राचार्यों को रोजाना दो कक्षाएं लेने के स्कूल शिक्षा विभाग के आदेश को लेकर विवाद शुरू हो गया है। छत्तीसगढ़ शालेय शिक्षक संघ ने इस निर्देश पर सवाल उठाते हुए इसे जमीनी परिस्थितियों के अनुरूप नहीं बताया है। संघ के अध्यक्ष वीरेंद्र दुबे ने कहा कि प्रदेश के कई स्कूलों में आज भी पर्याप्त कक्ष और शिक्षकों की कमी है। ऐसे में प्राचार्यों पर अतिरिक्त अध्यापन का दायित्व डालना अव्यावहारिक है।
प्राचार्यों को रोजाना दो कक्षाएं लेने के निर्देश
स्कूल शिक्षा विभाग के आदेश के अनुसार, प्राचार्यों को प्रतिदिन दो कक्षाएं लेना अनिवार्य किया गया है। इसके अलावा प्राचार्य और स्टाफ के बैठने के लिए निर्धारित कक्ष का उपयोग करने तथा क्लासरूम को केवल अध्यापन कार्य के लिए इस्तेमाल करने के निर्देश दिए गए हैं।
शिक्षक संघ ने उठाए संसाधनों की कमी पर सवाल
छत्तीसगढ़ शालेय शिक्षक संघ के अध्यक्ष वीरेंद्र दुबे ने कहा कि प्रदेश के कई स्कूलों में पर्याप्त संख्या में कक्ष उपलब्ध नहीं हैं। कमरों की कमी के चलते स्कूलों में पहले से ही व्यवस्थागत परेशानियां बनी हुई हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार को केवल आदेश जारी करने के बजाय स्कूलों की वास्तविक स्थिति पर ध्यान देना चाहिए। स्कूलों में आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ाने के साथ-साथ शिक्षकों की भर्ती पर भी जोर दिया जाना चाहिए।
वीरेंद्र दुबे के मुताबिक, जब स्कूलों में कक्ष और शिक्षक ही पर्याप्त नहीं हैं, तो प्राचार्यों पर अतिरिक्त अध्यापन का दायित्व डालने से समस्याएं और बढ़ सकती हैं।
प्राचार्यों की प्रशासनिक जिम्मेदारियों का भी हवाला
शिक्षक संघ अध्यक्ष ने कहा कि प्राचार्यों के पास स्कूल के प्रशासनिक संचालन और अन्य महत्वपूर्ण कार्यों की जिम्मेदारी पहले से ही होती है। ऐसे में रोजाना दो कक्षाएं लेना अनिवार्य करने के बजाय इसे स्वैच्छिक रखा जाना चाहिए।
संघ ने मांग की है कि किसी भी नए आदेश को लागू करने से पहले स्कूलों में उपलब्ध कक्षों, शिक्षकों की संख्या और प्राचार्यों की प्रशासनिक जिम्मेदारियों का आकलन किया जाए। बेहतर शिक्षा व्यवस्था के लिए पर्याप्त संसाधन और शिक्षक उपलब्ध कराना जरूरी है।
शिक्षा मंत्री ने बताया गुणवत्ता सुधारने का कदम
इस मामले में शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने आदेश का बचाव किया है। उन्होंने कहा कि स्कूलों में सुचारू रूप से अध्यापन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से यह निर्देश जारी किया गया है।
मंत्री के मुताबिक, प्राचार्यों के साथ-साथ व्याख्याताओं को भी अपने विषय से संबंधित कक्षाएं लेने के लिए कहा गया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस व्यवस्था से स्कूलों में अध्यापन कार्य बेहतर होगा और शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार आएगा।
अब देखना होगा कि शिक्षक संघ की आपत्तियों के बीच स्कूल शिक्षा विभाग इस आदेश को किस तरह लागू करता है।