रायपुर। छत्तीसगढ़ में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के दौरान कथित अनियमितताओं और धान में सूखत के मामलों को लेकर प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। प्रदेश के अलग-अलग जिलों में जांच, नोटिस और भौतिक सत्यापन के बाद धान खरीदी से जुड़े समिति प्रबंधकों और कर्मचारियों पर कार्रवाई की गई है।
खाद्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, अब तक 12 जिलों में कुल 38 कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। इनमें 31 कर्मचारियों को निलंबित किया गया है, जबकि एक कर्मचारी को सेवा से बर्खास्त किया गया। इसके अलावा तीन कर्मचारियों के खिलाफ पुलिस में प्रकरण दर्ज कराया गया है।
जिन जिलों में कार्रवाई की जानकारी सामने आई है, उनमें दुर्ग, बेमेतरा, कबीरधाम, बिलासपुर, जांजगीर-चांपा, रायगढ़, सक्ती, जगदलपुर, रायपुर, गरियाबंद, महासमुंद और बलौदाबाजार-भाटापारा शामिल हैं।
किन मामलों में हुई कार्रवाई?
विभागीय जांच के दौरान धान खरीदी केंद्रों पर कई तरह की अनियमितताएं सामने आने के बाद कार्रवाई की गई। इनमें स्टॉक में कमी, रिकॉर्ड से अधिक स्टॉक दर्शाना, धान का अव्यवस्थित भंडारण और निर्धारित नियमों के विपरीत काम करना शामिल है।
इसके अलावा अमानक धान की खरीदी, खरीदी प्रक्रिया में गड़बड़ी, अवकाश के दिन खरीदी, फर्जी खरीदी, टोकन में अनियमितता, बिना आवक पर्ची के धान की एंट्री, अवैध वसूली और बारदाने के वितरण में अनियमितता जैसे मामले भी जांच के दायरे में आए हैं।
वर्षों से उठता रहा है ‘सूखत’ का मुद्दा
धान खरीदी के दौरान सूखत का मुद्दा छत्तीसगढ़ में नया नहीं है। सहकारी समितियों से जुड़े कर्मचारी संगठन लंबे समय से इस विषय को उठाते रहे हैं। उनका कहना है कि कई बार धान का समय पर उठाव नहीं होने के कारण वजन में कमी आती है, जिसका आर्थिक भार समिति प्रबंधकों पर डाल दिया जाता है।
यही मामला छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के संज्ञान में भी पहुंच चुका है। कोर्ट की टिप्पणी में यह बात सामने आई थी कि यदि धान के परिवहन और उठाव में देरी सरकारी एजेंसियों, मार्कफेड या मिलर्स की वजह से हुई है, तो ऐसी स्थिति में समितियों अथवा समिति प्रबंधकों से कमी की वसूली करना उचित नहीं होगा। कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार को इस संबंध में स्पष्ट नीति बनाने की आवश्यकता बताई थी।
‘शून्य सूखत’ पर प्रोत्साहन का प्रावधान
राज्य की धान खरीदी नीति में समितियों के लिए शून्य सूखत की स्थिति में प्रोत्साहन राशि का भी प्रावधान किया गया है। वहीं, यदि धान का समय पर उठाव नहीं होता और उसके वजन में कमी आती है, तो मिलर्स या मार्कफेड को धान सौंपते समय सामने आने वाली कमी को लेकर समिति प्रबंधकों पर जवाबदेही तय होने का दबाव रहता है।
2025-26 की नीति में सूखत को लेकर सख्ती
खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 की धान खरीदी व्यवस्था में संग्रहित धान की सूखत को लेकर नियम काफी सख्त रखे गए हैं। नीति के अनुसार खरीदी केंद्रों पर रखे धान में कमी या सूखत की स्थिति में समितियों और संबंधित प्रबंधकों की जिम्मेदारी तय की जा सकती है।
हालांकि, अब तक सूखत के नाम पर कितने समिति प्रबंधकों से कितनी राशि की वसूली की गई, इसका जिलेवार या प्रदेश स्तर पर विस्तृत आंकड़ा सार्वजनिक नहीं हुआ है।
धान खरीदी में हुई इन कार्रवाइयों ने एक बार फिर खरीदी केंद्रों की निगरानी, धान के समय पर उठाव और सूखत की जिम्मेदारी तय करने की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आने वाले समय में जांच के बाद कार्रवाई का दायरा और बढ़ता है या नहीं, इस पर भी नजर रहेगी।