सूरजपुर। बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक विजयादशमी का पर्व सूरजपुर में आस्था, उल्लास और भव्यता के साथ मनाया गया। 60 फीट ऊंचे रावण के पुतले का दहन, भगवान श्रीराम के जयकारे और आकर्षक धार्मिक झांकियों ने पूरे शहर को उत्सव के रंग में रंग दिया। सूरजपुर सेवा समिति के तत्वावधान में आयोजित दशहरा महोत्सव में उस समय खास नजारा देखने को मिला, जब राधा-कृष्ण की मनमोहक प्रस्तुति पर मंच पर मौजूद कलेक्टर रेना जमील और समिति के अध्यक्ष भीमसेन अग्रवाल भी खुद को थिरकने से नहीं रोक सके। कलाकारों के साथ अतिथियों के नृत्य ने आयोजन में चार चांद लगा दिए।
दो दशक से कायम है दशहरा महोत्सव की परंपरा
सूरजपुर में दशहरा महोत्सव पिछले 20 वर्षों से लगातार आयोजित किया जा रहा है। यह आयोजन केवल रावण दहन तक सीमित नहीं है, बल्कि धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक एकजुटता का प्रतीक बन चुका है। इस वर्ष भी सूरजपुर सेवा समिति के नेतृत्व में आयोजित महोत्सव में शहर की विभिन्न दुर्गा पूजा समितियों और बड़ी संख्या में नगरवासियों ने सहभागिता निभाई।
भव्य शोभायात्रा और धार्मिक झांकियों ने मोहा मन
महोत्सव की शुरुआत अग्रसेन भवन से निकली भव्य शोभायात्रा के साथ हुई। शोभायात्रा शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए अग्रसेन स्टेडियम पहुंची। इस दौरान आकर्षक धार्मिक झांकियों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने लोगों का ध्यान खींचा। भगवान श्रीराम और रावण से जुड़े प्रसंगों के मंचन ने दर्शकों को रामायण की याद दिलाई।
बुराई पर अच्छाई की हुई जीत
अग्रसेन स्टेडियम में आयोजित मुख्य कार्यक्रम में 60 फीट ऊंचे रावण के साथ कुंभकर्ण और मेघनाथ के पुतलों का दहन किया गया। इस दौरान जय श्रीराम के जयकारों से पूरा परिसर गूंज उठा। लोगों ने बुराई पर अच्छाई और अधर्म पर धर्म की विजय का संदेश देते हुए विजयादशमी का उत्सव मनाया।
राधा-कृष्ण की प्रस्तुति पर झूम उठे कलेक्टर और अतिथि
दशहरा महोत्सव का सबसे आकर्षक पल राधा-कृष्ण की मनमोहक प्रस्तुति रही। कलाकारों ने अपने अभिनय और नृत्य से ऐसा समां बांधा कि मंच पर मौजूद अतिथि भी उत्सव में शामिल हो गए। कलेक्टर रेना जमील और सूरजपुर सेवा समिति के अध्यक्ष भीमसेन अग्रवाल को कलाकारों के साथ थिरकते देख दर्शकों में भी खासा उत्साह नजर आया। कलाकारों ने अतिथियों का हाथ थामकर उन्हें नृत्य में शामिल किया। इसके बाद आयोजन स्थल पर उत्साह और उल्लास का माहौल बन गया। यह दृश्य महोत्सव की भव्यता के साथ ही लोगों के बीच आपसी अपनत्व और सामूहिक सहभागिता का भी प्रतीक बना।
नई पीढ़ी को संस्कृति और मर्यादा का संदेश
सूरजपुर का दशहरा महोत्सव पिछले दो दशकों से भारतीय संस्कृति और परंपराओं को जीवंत बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। रावण दहन के माध्यम से जहां बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश दिया गया, वहीं धार्मिक झांकियों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, मर्यादा और सामाजिक एकता से जोड़ने का प्रयास किया।