रायपुर। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितता और प्रश्नपत्र लीक से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने पूर्व CGPSC अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी समेत सात लोगों के खिलाफ अभियोजन शिकायत विशेष PMLA अदालत में दाखिल की है। 99 पन्नों की मुख्य शिकायत के साथ करीब 3,700 पन्नों के दस्तावेज भी अदालत में पेश किए गए हैं।
ED की जांच के मुताबिक, मामले में प्रश्नपत्र लीक, चयन प्रक्रिया में कथित हेरफेर और उससे जुड़े वित्तीय लेन-देन की पड़ताल की जा रही है। एजेंसी का आरोप है कि कुछ उम्मीदवारों को कथित तौर पर लाभ पहुंचाने के लिए पैसे का इस्तेमाल किया गया और इस पूरी प्रक्रिया में अलग-अलग स्तरों पर वित्तीय लेन-देन हुआ। इन आरोपों की अंतिम पुष्टि अदालत में होने वाली न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है।
अभियोजन शिकायत में टामन सिंह सोनवानी के अलावा श्रवण गोयल, तत्कालीन CGPSC डिप्टी कंट्रोलर (परीक्षा) ललित गणवीर, उत्कर्ष चंद्राकर, विकास चंद्राकर, अनिल चंद्राकर और चेतन बोरघरिया के नाम शामिल हैं।
ED के अनुसार, श्रवण गोयल पर आरोप है कि उन्होंने सोनवानी से जुड़े NGO को कथित तौर पर रकम दी, जबकि जांच एजेंसी ने उत्कर्ष और विकास चंद्राकर पर अभ्यर्थियों से पैसे लेकर प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने के आरोप लगाए हैं। एजेंसी का दावा है कि चयन प्रक्रिया में कथित हेरफेर के जरिए डिप्टी कलेक्टर और DSP जैसे वरिष्ठ पदों पर पसंदीदा उम्मीदवारों को लाभ पहुंचाने की कोशिश की गई।
मनी ट्रेल की जांच भी जारी
इस मामले में ED वित्तीय लेन-देन की कड़ियों को भी खंगाल रही है। एजेंसी ने सितंबर में उत्कर्ष चंद्राकर और चेतन बोरघरिया के खिलाफ कार्रवाई की थी। आधिकारिक ED रिकॉर्ड के अनुसार, उत्कर्ष चंद्राकर की गिरफ्तारी 1 सितंबर 2026 को CGPSC भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितता, प्रश्नपत्र लीक और भ्रष्टाचार की जांच के सिलसिले में हुई थी।
चेतन बोरघरिया को भी ED ने 11 सितंबर 2026 को PMLA के तहत गिरफ्तार किया था। ED के अनुसार, मामला CGPSC की 2020 और 2021 की राज्य सेवा परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और चयन प्रक्रिया में हेरफेर से जुड़ा है।
अब करीब 3,700 पन्नों के दस्तावेजों के साथ दाखिल अभियोजन शिकायत के बाद मामले में आगे की न्यायिक प्रक्रिया पर नजर रहेगी। आरोपों पर अंतिम फैसला अदालत की प्रक्रिया के बाद ही होगा।