Meta Pixel

छत्तीसगढ़ DMF घोटाले में ED का बड़ा एक्शन: ₹31.70 करोड़ की संपत्ति कुर्क, 17 आरोपियों के खिलाफ पूरक शिकायत

Spread the love

रायपुर। छत्तीसगढ़ में जिला खनिज न्यास निधि (DMF) से जुड़े कथित घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने सरकारी धन के कथित दुरुपयोग और मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के तहत लगभग 31.70 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्तियां अस्थायी रूप से कुर्क की हैं। इसके अलावा, सतपाल सिंह चाबड़ा, मंदीप चावला समेत 17 आरोपितों के खिलाफ रायपुर स्थित विशेष पीएमएलए न्यायालय में पूरक अभियोजन शिकायत दाखिल की गई है।

ईडी के अनुसार, संपत्तियों की कुर्की का आदेश 29 अक्टूबर 2026 को जारी किया गया था, जबकि पूरक शिकायत 30 अक्टूबर को दाखिल की गई। एजेंसी की जांच का मुख्य केंद्र खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए निर्धारित डीएमएफ की राशि का कथित दुरुपयोग है।

क्या है पूरा DMF घोटाला?

डीएमएफ का गठन खनन प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के कल्याण और विकास के लिए किया गया है। इस निधि से स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल, बुनियादी सुविधाओं और अन्य जनहितकारी कार्यों पर खर्च किया जाता है।

ईडी का आरोप है कि छत्तीसगढ़ में इस राशि के इस्तेमाल में कथित अनियमितताएं हुईं। जांच के मुताबिक, सरकारी अधिकारियों, एजेंटों और बिचौलियों के एक नेटवर्क ने खरीद संबंधी कामों में चुनिंदा कंपनियों और फर्मों को फायदा पहुंचाया।

एजेंसी का दावा है कि कई मामलों में सामान की आपूर्ति से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता दी गई और खरीद की कीमतें बढ़ाकर दिखाई गईं। इसके जरिए सरकारी राशि से अवैध कमीशन वसूले जाने का आरोप है।

खरीद आदेशों पर 25 से 50 प्रतिशत कमीशन का आरोप

ईडी की जांच में कथित तौर पर सामने आया है कि रेट कॉन्ट्रैक्ट के तहत कंपनियों और संस्थाओं को जारी खरीद आदेशों की मूल राशि पर 25 से 50 प्रतिशत तक कमीशन लिया जाता था।

एजेंसी के अनुसार, इस रकम का इस्तेमाल डीएमएफ की राशि आवंटित कराने, खरीद आदेश जारी करवाने और भुगतान प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के बदले कथित तौर पर अधिकारियों तथा प्रभावशाली लोगों तक पैसा पहुंचाने में किया जाता था।

जांच में नकद और बैंकिंग माध्यमों से लेनदेन किए जाने तथा अलग-अलग कंपनियों और खातों के जरिए रकम को घुमाकर उसके वास्तविक स्रोत को छिपाने की आशंका भी जताई गई है।

ईडी का यह भी दावा है कि कमीशन वसूली का कथित तरीका केवल डीएमएफ से होने वाली खरीद तक सीमित नहीं था, बल्कि बीज निगम के माध्यम से अन्य मदों में की जाने वाली खरीद में भी ऐसी अनियमितताएं हुईं।

हालांकि, इन आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही निकलेगा।

सतपाल सिंह चाबड़ा की भूमिका पर ED का दावा

ईडी के मुताबिक, सतपाल सिंह चाबड़ा इस कथित नेटवर्क में बिचौलिये और वित्तीय समन्वयक की भूमिका निभा रहा था। एजेंसी का आरोप है कि वह चुनिंदा आपूर्तिकर्ताओं को काम दिलाने, उनके पक्ष में खरीद आदेश जारी करवाने, भुगतान कराने और कथित कमीशन की वसूली तथा वितरण में शामिल था।

जांच एजेंसी ने बताया कि चाबड़ा को 1 सितंबर 2026 को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) की धारा 19 के तहत गिरफ्तार किया गया था।

अब सतपाल सिंह चाबड़ा, मंदीप चावला समेत 17 आरोपितों के खिलाफ विशेष अदालत में पूरक अभियोजन शिकायत दाखिल की गई है। ईडी का आरोप है कि कथित अवैध कमाई को अलग-अलग कंपनियों के माध्यम से खपाने और उसे वैध दिखाने का प्रयास किया गया।

₹35 करोड़ की कथित अवैध कमाई, ₹31.70 करोड़ की संपत्ति कुर्क

ईडी के अनुसार, जांच में आरोपितों से जुड़ी अपराध से अर्जित संपत्ति यानी प्रोसीड्स ऑफ क्राइम की राशि लगभग 35 करोड़ रुपये आंकी गई है। इसके मुकाबले ताजा कार्रवाई में 31.70 करोड़ रुपये की संपत्तियां अस्थायी रूप से कुर्क की गई हैं।

एजेंसी ने बताया कि इस प्रकरण में अब तक चार आरोपितों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इनमें आईएएस अधिकारी रानू साहू का नाम भी शामिल है।

ईडी के मुताबिक, इस मामले में अब तक कुर्क की गई कुल संपत्तियों का मूल्य लगभग 50 करोड़ रुपये हो चुका है। इनमें जमीन, मकान, बैंक खातों में जमा रकम और अन्य निवेश शामिल बताए गए हैं।

ध्यान देने वाली बात यह है कि संपत्ति की कुर्की अस्थायी कार्रवाई है। इसका उद्देश्य कथित अपराध से अर्जित संपत्ति को जांच और कानूनी प्रक्रिया के दौरान सुरक्षित रखना है। अंतिम निर्णय संबंधित कानूनी प्रक्रिया के तहत होगा।

सरकारी अधिकारियों और बिचौलियों की भूमिका की जांच जारी

ईडी अब डीएमएफ की राशि के आवंटन, खरीद आदेश जारी करने, भुगतान कराने और कथित कमीशन के लेनदेन में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है।

एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि कथित अवैध रकम किन लोगों तक पहुंची, किन कंपनियों या बैंक खातों के जरिए उसका लेनदेन हुआ और क्या इस नेटवर्क में अन्य सरकारी कर्मचारी या कारोबारी भी शामिल थे।

इस मामले का महत्व इसलिए भी अधिक है, क्योंकि डीएमएफ की राशि का उद्देश्य खनन प्रभावित इलाकों में रहने वाले लोगों को विकास और बुनियादी सुविधाओं का लाभ पहुंचाना है। यदि इस निधि का दुरुपयोग साबित होता है, तो इसका सीधा असर उन समुदायों पर पड़ता है, जिनके कल्याण के लिए यह पैसा निर्धारित किया गया है।

अब न्यायालय में आगे बढ़ेगी कानूनी कार्रवाई

31.70 करोड़ रुपये की संपत्तियों की ताजा कुर्की और 17 आरोपितों के खिलाफ पूरक अभियोजन शिकायत दाखिल होने के बाद मामले में कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

ईडी की जांच में सामने आए आरोप गंभीर हैं, लेकिन आरोपितों की जिम्मेदारी और दोष का अंतिम निर्धारण अदालत में साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही होगा। फिलहाल एजेंसी कथित मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क और सरकारी खरीद में हुई अनियमितताओं की जांच आगे बढ़ा रही है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *