दंतेवाड़ा। छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले के गमावाड़ा गांव में एनएमडीसी की स्लरी पाइपलाइन का काम पूरा होने के बाद खेतों की स्थिति को लेकर विवाद सामने आया है। किसानों का आरोप है कि वर्ष 2023 में पाइपलाइन बिछाने के लिए की गई खुदाई के बाद खेतों में बड़े-बड़े पत्थर छोड़ दिए गए। इससे उनकी जमीन पर खेती करना मुश्किल हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि शिकायतों के बावजूद अब तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया है।
पाइपलाइन की खुदाई के बाद खेतों में रह गए बड़े पत्थर
गमावाड़ा गांव में किसानों की परेशानी का कारण खेतों में बिखरे बड़े पत्थर बताए जा रहे हैं। ग्रामीणों के मुताबिक, एनएमडीसी की स्लरी पाइपलाइन बिछाने के लिए लगभग पांच किलोमीटर क्षेत्र में खुदाई की गई थी।
किसानों का आरोप है कि काम पूरा होने के बाद खुदाई से निकले पत्थरों और मिट्टी को पूरी तरह नहीं हटाया गया। खेतों को भी पहले की तरह खेती योग्य बनाने के लिए पर्याप्त समतलीकरण नहीं किया गया। इसके चलते कृषि भूमि पर बड़े पत्थर पड़े हुए हैं, जिससे खेती-किसानी प्रभावित हो रही है।
दो साल से कृषि कार्य में परेशानी का दावा
ग्रामीणों का कहना है कि खेतों में पत्थर पड़े होने से ट्रैक्टर चलाने, जमीन की जुताई करने और अन्य कृषि कार्यों में दिक्कत आती है। किसानों के अनुसार, इस समस्या के कारण पिछले करीब दो वर्षों से उनकी खेती प्रभावित हो रही है।
किसानों का दावा है कि उन्होंने संबंधित एलएंडटी कंपनी के अधिकारियों को कई बार अपनी समस्या बताई, लेकिन खेतों से पत्थर हटाने और जमीन को दोबारा खेती के अनुकूल बनाने के लिए अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।
ग्रामीणों की मांग है कि प्रभावित खेतों का उचित समतलीकरण कराया जाए, ताकि वे बिना परेशानी के खेती कर सकें।
NMDC का पक्ष: पथरीली जमीन का कराया गया समतलीकरण
दूसरी ओर, एनएमडीसी का कहना है कि गमावाड़ा क्षेत्र में लगभग पांच किलोमीटर लंबी स्लरी पाइपलाइन बिछाई गई है। इसमें करीब डेढ़ किलोमीटर हिस्सा शासकीय भूमि और साढ़े तीन किलोमीटर हिस्सा निजी भूमि में आता है।
कंपनी के मुताबिक, संबंधित क्षेत्र की जमीन पथरीली है और पाइपलाइन की खुदाई के दौरान निकले पत्थरों का समतलीकरण कराया गया है। एनएमडीसी ने यह भी कहा है कि यदि किसी किसान को अपनी जमीन पर दोबारा समतलीकरण की जरूरत है, तो वह एलएंडटी कंपनी को इसकी सूचना देकर काम करा सकता है।
किसानों की शिकायत और कंपनी के दावे में अंतर
मामले में किसानों की शिकायत और कंपनी के पक्ष के बीच अंतर दिखाई दे रहा है। किसान जहां खेतों में पत्थर पड़े होने से खेती प्रभावित होने की बात कह रहे हैं, वहीं एनएमडीसी का दावा है कि समतलीकरण कराया जा चुका है।
ऐसे में वास्तविक स्थिति जानने के लिए प्रभावित खेतों का मौके पर निरीक्षण जरूरी है। यदि कुछ खेतों में अब भी बड़े पत्थर पड़े हैं, तो उनकी पहचान कर आवश्यक सुधार कराया जाना चाहिए।
संयुक्त निरीक्षण से निकल सकता है समाधान
गमावाड़ा के किसानों की समस्या के समाधान के लिए संबंधित विभाग, एनएमडीसी, एलएंडटी कंपनी के प्रतिनिधियों और किसानों की मौजूदगी में संयुक्त निरीक्षण कराया जा सकता है। इससे यह स्पष्ट होगा कि किन खेतों में समतलीकरण का काम अधूरा है और कहां अतिरिक्त काम की जरूरत है।
सवाल यह है कि यदि खेतों में पत्थर पड़े होने से किसानों की खेती प्रभावित हो रही है, तो उनकी जमीन को पूरी तरह खेती योग्य बनाने की जिम्मेदारी कौन निभाएगा? किसानों को उम्मीद है कि उनकी शिकायत पर जल्द कार्रवाई होगी और प्रभावित खेतों की स्थिति सुधारने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।