छत्तीसगढ़ में चिकित्सकों की लंबित मांगों को लेकर एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। सरकार की ओर से सहमति और अनुमोदन मिलने के बावजूद अब तक विभागीय आदेश जारी नहीं होने पर छत्तीसगढ़ डॉक्टर्स फेडरेशन (CGDF) और जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन (JDA) ने नाराजगी जताई है। दोनों संगठनों ने स्वास्थ्य मंत्री और हेल्थ सेक्रेटरी को पत्र लिखकर लंबित मांगों पर जल्द निर्णय लेने और आदेश जारी करने की मांग की है।
फेडरेशन का कहना है कि कई महत्वपूर्ण मांगों पर पहले ही सहमति बन चुकी है, लेकिन विभागीय प्रक्रिया पूरी नहीं होने के कारण चिकित्सकों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। इनमें उच्च शिक्षा के लिए NOC की प्रक्रिया आसान करना, बॉन्डेड MBBS और PG डॉक्टरों का मानदेय बढ़ाना तथा PG के बाद विशेषज्ञता के अनुसार विभाग में पदस्थापना करना शामिल है।
NOC के लिए संपत्ति गिरवी रखने की शर्त खत्म करने की मांग
CGDF ने PG और अन्य उच्च शिक्षा के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) लेने की प्रक्रिया को सरल बनाने की मांग की है। फेडरेशन के अनुसार, वर्तमान व्यवस्था में चिकित्सकों को NOC प्राप्त करने के लिए संपत्ति गिरवी रखने की शर्त का सामना करना पड़ता है।
संगठन चाहता है कि दूसरे राज्यों की तर्ज पर छत्तीसगढ़ में भी केवल शपथ-पत्र (एफिडेविट) के आधार पर NOC जारी करने की व्यवस्था लागू की जाए। इससे उच्च शिक्षा हासिल करने के इच्छुक डॉक्टरों को आर्थिक और कानूनी परेशानियों से राहत मिल सकेगी।
बॉन्डेड MBBS डॉक्टरों का मानदेय 70 हजार करने पर सहमति
सामान्य क्षेत्रों में सेवाएं देने वाले बॉन्डेड MBBS चिकित्सकों का मासिक मानदेय बढ़ाकर 70 हजार रुपये करने पर पहले सहमति बन चुकी है। हालांकि, फेडरेशन का आरोप है कि इसके बावजूद अब तक विभागीय आदेश जारी नहीं किया गया है।
CGDF ने सरकार से जल्द आदेश जारी करने और चिकित्सकों को बढ़े हुए मानदेय का लाभ देने की मांग की है।
PG डॉक्टरों के मानदेय में 2 हजार रुपये की विसंगति दूर करने की मांग
अनुबंधित PG (MD/MS) चिकित्सकों के मानदेय में भी विसंगति दूर करने का मुद्दा उठाया गया है। फेडरेशन के मुताबिक, PG तृतीय वर्ष के चिकित्सकों को मिलने वाले मानदेय से 2 हजार रुपये अधिक यानी करीब 95 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय निर्धारित करने पर सहमति दी गई थी।
लेकिन इस संबंध में भी अब तक आदेश जारी नहीं हुआ है। संगठन ने इस विसंगति को दूर कर स्वीकृत मानदेय लागू करने की मांग की है।
PG के बाद डॉक्टरों को विशेषज्ञता के अनुसार मिले विभाग
CGDF ने सरकारी मेडिकल कॉलेजों के उन नियमित चिकित्सकों की पदस्थापना का मुद्दा भी उठाया है, जो अध्ययन अवकाश लेकर PG (MD/MS) की पढ़ाई पूरी करने के बाद वापस लौटे हैं।
फेडरेशन का कहना है कि कई डॉक्टरों को उनकी नई विशेषज्ञता के अनुसार विभाग नहीं दिया जा रहा है। उदाहरण के तौर पर, यदि कोई चिकित्सक PG से पहले रेडियोलॉजी विभाग में कार्यरत था और अध्ययन अवकाश के दौरान उसने सर्जरी में PG की डिग्री हासिल की है, तो उसे उसकी नई विशेषज्ञता के अनुरूप सर्जरी विभाग में पदस्थ किया जाना चाहिए।
संगठन के मुताबिक, ऐसा नहीं होने से डॉक्टरों की विशेषज्ञता का पूरा उपयोग नहीं हो पा रहा है। साथ ही, सरकार द्वारा उच्च शिक्षा के लिए दिए गए अध्ययन अवकाश का लाभ भी मेडिकल कॉलेजों और मरीजों को पूरी तरह नहीं मिल पा रहा है। इसलिए PG की पढ़ाई पूरी कर लौटे नियमित चिकित्सकों को उनके विशेषज्ञता वाले विभाग में पदस्थ करने के लिए स्पष्ट आदेश जारी करने की मांग की गई है।
केवल सहमति नहीं, विभागीय आदेश भी जरूरी: JDA
JDA रायपुर के अध्यक्ष डॉ. पीयूष ने कहा कि चिकित्सक प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ हैं। उनकी जायज मांगों पर केवल सहमति देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि समय पर विभागीय आदेश जारी करना भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि मांगें लंबे समय से लंबित रहने के कारण चिकित्सकों के शैक्षणिक अवसर, आर्थिक हित और भविष्य प्रभावित हो रहे हैं।
वहीं, JDA छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष डॉ. रेशम सिंह ने भी स्वास्थ्य मंत्री से सभी लंबित विषयों पर जल्द विभागीय कार्रवाई पूरी कर आदेश जारी करने का आग्रह किया है।
अब देखना होगा कि CGDF और JDA की इस दोबारा की गई मांग के बाद स्वास्थ्य विभाग लंबित प्रस्तावों पर कब तक आदेश जारी करता है।