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नेस्ले के बेबी फूड पर FSSAI की कार्रवाई: विटामिन B7 कम मिला, भ्रामक विज्ञापनों को लेकर भी केस

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नेस्ले इंडिया के बच्चों के खाद्य उत्पादों को लेकर फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया यानी FSSAI ने कार्रवाई शुरू की है। कंपनी के बेबी फूड प्रोडक्ट्स में पोषक तत्वों की कमी और विज्ञापनों में कथित भ्रामक दावों को लेकर तीन अलग-अलग मामले दर्ज किए गए हैं।

FSSAI ने सोशल मीडिया पर जारी जानकारी में बताया कि ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर बिकने वाले नेस्ले के कुछ बेबी फूड प्रोडक्ट्स और उनके प्रचार की जांच की गई थी। जांच के दौरान नियमों के उल्लंघन की बात सामने आई।

किन प्रोडक्ट्स पर उठे सवाल?

FSSAI की कार्रवाई मुख्य रूप से नेस्ले के तीन उत्पादों से जुड़ी है—

  • नान एक्सीला प्रो स्टेज-1: इसके पैक और विज्ञापनों में किए गए पोषण संबंधी दावों पर आपत्ति जताई गई।
  • लैक्टोजेन प्रो-1: इसमें मौजूद प्रोटीन को आसानी से पचने योग्य बताने वाले दावे पर सवाल उठे।
  • फॉलो-अप फॉर्मूला: लैब टेस्ट में इसमें जरूरी पोषक तत्व बायोटिन की मात्रा तय मानकों से कम पाई गई।

विज्ञापनों में क्या दावा किया गया था?

FSSAI के अनुसार, नान एक्सीला प्रो स्टेज-1 के पैक और प्रचार सामग्री में 5 HMOs और वे प्रोटीन जैसे दावे किए गए थे। वहीं, लैक्टोजेन प्रो-1 के बारे में यह बताया गया था कि उसमें मौजूद प्रोटीन आसानी से पच जाता है।

खाद्य सुरक्षा नियामक का कहना है कि इस तरह के दावों का इस्तेमाल उत्पादों को बढ़ावा देने और बिक्री बढ़ाने के लिए किया जा रहा था।

किन नियमों के उल्लंघन का आरोप?

FSSAI की समीक्षा में दो प्रमुख नियमों के उल्लंघन की बात सामने आई है—

1. भ्रामक और बिक्री बढ़ाने वाले दावे

बेबी फूड उत्पादों के प्रचार में ऐसे दावे करने पर रोक है, जो माता-पिता को उत्पाद की गुणवत्ता या पोषण को लेकर भ्रमित कर सकते हैं। FSSAI के मुताबिक, आसानी से पचने या अतिरिक्त पोषण जैसे दावों का इस्तेमाल नियमों के अनुरूप नहीं किया गया।

2. IMS एक्ट, 1992

भारत में शिशु दूध विकल्पों और बेबी फूड के प्रचार को नियंत्रित करने के लिए 1992 का IMS एक्ट लागू है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विज्ञापनों के जरिए माता-पिता को मां के दूध के विकल्प की ओर प्रभावित न किया जाए।

FSSAI ने आरोप लगाया है कि संबंधित विज्ञापनों में इस कानून की धारा 3 के प्रावधानों का उल्लंघन हुआ।

लैब टेस्ट में क्या कमी मिली?

FSSAI ने नेस्ले के फॉलो-अप फॉर्मूला के सैंपल की जांच कराई। इसमें बच्चों के लिए जरूरी विटामिन B7 यानी बायोटिन की मात्रा निर्धारित मानकों से कम पाई गई।

नतीजे की पुष्टि के लिए सैंपल को रेफरल लैब में दोबारा जांच के लिए भेजा गया। दूसरी जांच में भी बायोटिन की मात्रा तय सीमा से कम मिलने की बात सामने आई।

क्या नेस्ले पर जुर्माना लगाया गया है?

फिलहाल FSSAI की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, कंपनी पर कोई अंतिम जुर्माना या पेनल्टी नहीं लगाई गई है। नियामक ने तीन मामले दर्ज कर कानूनी प्रक्रिया शुरू की है।

आगे की कार्रवाई और संभावित जुर्माने का फैसला संबंधित कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद होगा।

नेस्ले इंडिया का क्या कहना है?

इस मामले में नेस्ले इंडिया की ओर से अभी तक कोई स्पष्ट सार्वजनिक या शेयर बाजार संबंधी आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

अभिभावकों के लिए इसका क्या मतलब है?

बेबी फूड से जुड़ा मामला सीधे तौर पर छोटे बच्चों के स्वास्थ्य से संबंधित है। FSSAI की कार्रवाई का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शिशु आहार में जरूरी पोषक तत्व निर्धारित मात्रा में मौजूद हों और कंपनियां विज्ञापनों के जरिए माता-पिता को गुमराह न करें।

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