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गरबा-डांडिया के शौकीन सावधान! कमर दर्द से लेकर स्लिप डिस्क तक का खतरा, रीढ़ की इन 7 चेतावनियों को न करें नजरअंदाज

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हेल्थ डेस्क। नवरात्रि में गरबा और डांडिया का उत्साह हर तरफ देखने को मिलता है। रंग-बिरंगे पारंपरिक कपड़े, तेज संगीत और घंटों तक डांस करना त्योहार की खास पहचान है। गरबा एक अच्छी शारीरिक गतिविधि भी है, लेकिन लगातार घूमना, अचानक मुड़ना और बिना वार्मअप के तेज डांस करना कमर व गर्दन पर दबाव बढ़ा सकता है।

डांस के बाद मांसपेशियों में हल्का दर्द या थकान होना सामान्य हो सकता है। लेकिन अगर दर्द लगातार बना रहे, हाथ-पैरों में झनझनाहट हो या मांसपेशियों में कमजोरी महसूस हो, तो इसे सामान्य थकान समझकर नजरअंदाज करना ठीक नहीं है। ये लक्षण नसों पर दबाव या रीढ़ से जुड़ी किसी समस्या का संकेत हो सकते हैं।

हालांकि, हर कमर दर्द का मतलब स्लिप डिस्क नहीं होता। मांसपेशियों में खिंचाव और दूसरी समस्याएं भी दर्द की वजह बन सकती हैं। इसलिए लक्षणों को समझना और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।

गरबा के दौरान रीढ़ पर कैसे पड़ता है दबाव?

रीढ़ की हड्डी शरीर को सहारा देती है और हमें झुकने, घूमने तथा मुड़ने में मदद करती है। रीढ़ की हड्डियों के बीच मौजूद इंटरवर्टिब्रल डिस्क कुशन की तरह काम करती हैं और गतिविधियों के दौरान लगने वाले दबाव को सहने में मदद करती हैं।

लंबे समय तक तेज गति से डांस करने, बार-बार शरीर घुमाने या अचानक झटके से मुड़ने पर कमर और गर्दन की मांसपेशियों तथा लिगामेंट पर दबाव पड़ सकता है। थकान के कारण शरीर का संतुलन बिगड़ने पर चोट का जोखिम भी बढ़ सकता है।

स्लिप डिस्क में रीढ़ की हड्डियों के बीच मौजूद डिस्क का अंदरूनी हिस्सा उसकी बाहरी परत के कमजोर या क्षतिग्रस्त हिस्से से बाहर की ओर निकलने लगता है। इससे आसपास की नस पर दबाव पड़ सकता है। कमर की डिस्क प्रभावित होने पर दर्द पैर तक फैल सकता है, जबकि गर्दन की डिस्क की समस्या में दर्द कंधे या हाथ तक पहुंच सकता है।

डांस करते समय रीढ़ की ये 7 चेतावनियां न करें नजरअंदाज

1. कमर या गर्दन में लगातार दर्द

डांस के बाद हल्का मांसपेशियों का दर्द आराम करने पर धीरे-धीरे कम हो सकता है। लेकिन दर्द लगातार बना रहे, बढ़ता जाए या बार-बार लौटे, तो डॉक्टर से सलाह लें।

अगर झुकने, खड़े होने, चलने या रोजमर्रा के काम करने में परेशानी हो रही है, तो इसे केवल डांस की थकान मानकर न टालें।

2. कमर से पैर या गर्दन से हाथ तक दर्द पहुंचना

अगर कमर से शुरू होकर दर्द कूल्हे, जांघ या पैर तक फैलता है, तो इसकी वजह नस में जलन या दबाव हो सकता है। इसी तरह गर्दन की समस्या में दर्द कंधे और हाथ तक जा सकता है।

ऐसा दर्द स्लिप डिस्क समेत कई स्थितियों में हो सकता है। सही कारण जानने के लिए मेडिकल जांच जरूरी है।

3. हाथ-पैरों में झनझनाहट या सुन्नपन

हाथों, उंगलियों, पैरों या तलवों में सुई चुभने जैसा एहसास, झनझनाहट या संवेदना कम होना नसों से जुड़ी समस्या का संकेत हो सकता है।

अगर डांस के बाद ये लक्षण बने रहते हैं या बार-बार होते हैं, तो डांस रोककर डॉक्टर से सलाह लें।

4. मांसपेशियों में कमजोरी महसूस होना

अगर पैर उठाने में परेशानी हो, चलते समय पंजा जमीन पर घिसटने लगे या हाथ से चीजें पकड़ने की ताकत कम होने लगे, तो इसे गंभीरता से लेना चाहिए।

नई या बढ़ती हुई कमजोरी नसों पर दबाव का संकेत हो सकती है। ऐसी स्थिति में जल्द मेडिकल जांच कराना जरूरी है।

5. घूमने या झुकने पर तेज दर्द होना

गरबा में बार-बार घूमना और शरीर को मोड़ना पड़ता है। अगर किसी खास दिशा में घूमने, झुकने या उठने-बैठने पर तेज या झटके जैसा दर्द होता है, तो सावधान रहें।

इसका कारण मांसपेशियों में खिंचाव भी हो सकता है। लेकिन दर्द लगातार बना रहे या बढ़े, तो जांच कराएं। दर्द वाली गतिविधि को बार-बार करके खुद को परखने की कोशिश न करें।

6. दर्द से नींद और रोजमर्रा के काम प्रभावित होना

अगर कमर या गर्दन के दर्द के कारण रात में सोना मुश्किल हो रहा है, लंबे समय तक बैठ नहीं पा रहे हैं या सामान्य गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं, तो डॉक्टर से सलाह लें।

खासकर तब, जब आराम करने के बाद भी दर्द कम न हो या उसके साथ झनझनाहट और सुन्नपन जैसे लक्षण दिखाई दें।

7. पेशाब या मल पर नियंत्रण में बदलाव

यह सबसे गंभीर चेतावनी है। कमर दर्द के साथ अचानक पेशाब करने में परेशानी, पेशाब या मल पर नियंत्रण खोना, जांघों के बीच या गुप्तांगों के आसपास सुन्नपन अथवा पैरों की तेजी से बढ़ती कमजोरी रीढ़ के निचले हिस्से की नसों पर गंभीर दबाव का संकेत हो सकती है।

ऐसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत इमरजेंसी मेडिकल मदद लें। अगले दिन तक इंतजार न करें और इसे सामान्य मांसपेशियों का दर्द समझने की गलती न करें।

गरबा-डांडिया करते समय रीढ़ को सुरक्षित कैसे रखें?

नवरात्रि के उत्सव का आनंद लेने के लिए कुछ सावधानियां अपनाकर चोट और अनावश्यक दबाव का जोखिम कम किया जा सकता है।

  • वार्मअप जरूर करें: डांस से पहले 5 से 10 मिनट हल्की वॉक और आरामदायक मूवमेंट करें।
  • सही फुटवियर चुनें: ऐसे जूते पहनें जिनमें पैरों को सहारा मिले और फिसलने का खतरा कम हो।
  • नियंत्रित तरीके से घूमें: अचानक झटके देने और शरीर को जबरदस्ती असहज स्थिति में मोड़ने से बचें।
  • धीरे-धीरे समय बढ़ाएं: अगर नियमित डांस नहीं करते, तो शुरुआत कम समय से करें और धीरे-धीरे अवधि बढ़ाएं।
  • बीच-बीच में आराम करें: लगातार कई घंटे डांस करने से थकान बढ़ सकती है और संतुलन प्रभावित हो सकता है।
  • पर्याप्त पानी पिएं: लंबे समय तक डांस करते हुए शरीर में पानी की कमी न होने दें।
  • दर्द होने पर रुक जाएं: तेज दर्द, झनझनाहट, सुन्नपन या कमजोरी होने पर डांस जारी न रखें।

डॉक्टर को कब दिखाना चाहिए?

हल्का दर्द आराम से कम हो सकता है, लेकिन लगातार या बढ़ता हुआ दर्द, हाथ-पैरों तक फैलने वाला दर्द और बार-बार होने वाली झनझनाहट को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। वहीं, अचानक कमजोरी, गुप्तांगों के आसपास सुन्नपन या पेशाब-मल पर नियंत्रण में बदलाव होने पर तत्काल इमरजेंसी सहायता लें।

याद रखें: गरबा और डांडिया का आनंद लें, लेकिन शरीर के संकेतों को नजरअंदाज न करें। सही वार्मअप, नियंत्रित मूवमेंट और समय पर आराम रीढ़ को सुरक्षित रखने में मदद कर सकते हैं।

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