रायपुर। बलौदाबाजार हिंसा मामले में जेल भेजे गए लोगों की जमानत और कार्रवाई को लेकर सतनामी समाज के धर्मगुरु गुरु बालदास का एक वीडियो सामने आया है। इसमें उन्होंने दावा किया कि केवल चक्काजाम या थाने के घेराव से अपेक्षित परिणाम नहीं मिलते, जबकि प्रभावी स्तर पर बातचीत और दबाव बनाने से कार्रवाई आगे बढ़ती है। उन्होंने यह भी दावा किया कि उनके हस्तक्षेप के बाद मामले में गिरफ्तार कुछ लोगों को जमानत मिलने में मदद मिली।
गुरु बालदास ने अपने बयान में कहा कि यदि उस समय उन्होंने वीडियो जारी कर मामले पर अपनी बात नहीं रखी होती, तो समाज के कई लोग लंबे समय तक जेल में रह सकते थे। हालांकि, ये उनके व्यक्तिगत दावे हैं और जमानत अदालतों के न्यायिक आदेशों के तहत दी जाती है। बलौदाबाजार मामले में कई आरोपियों को अलग-अलग चरणों में अदालतों से जमानत मिल चुकी है।
चक्काजाम और थाना घेराव को लेकर कही ये बात
गुरु बालदास ने कहा कि युवाओं की ओर से विभिन्न मामलों में थाना घेराव और चक्काजाम जैसे विरोध प्रदर्शन किए जाते हैं, लेकिन उनके अनुसार इनसे हमेशा अपेक्षित परिणाम नहीं मिलते। उन्होंने दावा किया कि संबंधित अधिकारियों तक बातचीत पहुंचने के बाद ही कई मामलों में कार्रवाई आगे बढ़ती है।
उन्होंने यह भी कहा कि समाज के प्रतिनिधियों और जनप्रतिनिधियों को ऐसे मामलों में अपनी भूमिका निभानी चाहिए और प्रभावित परिवारों की समस्याओं को सामने रखना चाहिए।
बलौदाबाजार मामले का दिया उदाहरण
गुरु बालदास ने जून 2024 की बलौदाबाजार हिंसा का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय बड़ी संख्या में लोगों की गिरफ्तारी के बाद समाज में भय का माहौल बना था। उन्होंने दावा किया कि कई लोग शादी, अंतिम संस्कार और अन्य सामाजिक कार्यक्रमों में जाने से भी डर रहे थे।
उनका कहना था कि यदि किसी व्यक्ति ने कानून तोड़ा है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन किसी के साथ मारपीट करने का अधिकार किसी को नहीं है। उन्होंने कथित तौर पर हिरासत में मारपीट के निशान देखने की बात भी कही।
मुख्यमंत्री से मुलाकात का भी किया जिक्र
गुरु बालदास ने बताया कि घटना के बाद समाज के लोगों के साथ मुख्यमंत्री से मुलाकात की गई थी। उनका कहना था कि हिंसा में शामिल लोगों की पहचान उपलब्ध वीडियो और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर की जानी चाहिए और निर्दोष लोगों को केवल किसी समुदाय से जुड़े होने के आधार पर कार्रवाई का सामना नहीं करना चाहिए।
बलौदाबाजार हिंसा के बाद पुलिस ने कई एफआईआर दर्ज की थीं और बड़ी संख्या में लोगों की गिरफ्तारी हुई थी। बाद की न्यायिक प्रक्रिया में कुछ आरोपियों को अदालतों से जमानत भी मिली।
जेल में बंद लोगों की जमानत को लेकर दावा
गुरु बालदास ने कहा कि उन्होंने जेल में बंद लोगों के परिवारों से मुलाकात की और उनकी जमानत के लिए प्रयास किया। उनके अनुसार, बातचीत और दबाव के बाद कई लोगों को जमानत मिली।
हालांकि, जमानत किसी आरोपी के दोषमुक्त होने का प्रमाण नहीं होती। मामले में आरोपों का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के दौरान होना है।
दोषियों पर कार्रवाई की भी मांग
गुरु बालदास ने अपने बयान में यह भी कहा कि घटना के वास्तविक जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कथित मुख्य आरोपियों और फरार लोगों की गिरफ्तारी की मांग करते हुए कहा कि कार्रवाई सबूतों के आधार पर होनी चाहिए।
क्या था बलौदाबाजार हिंसा का मामला?
10 जून 2024 को सतनामी समाज के धार्मिक प्रतीक जैतखाम को नुकसान पहुंचाए जाने के विरोध में बलौदाबाजार में प्रदर्शन आयोजित किया गया था। प्रदर्शन के दौरान स्थिति बिगड़ गई और कलेक्ट्रेट परिसर तथा पुलिस अधीक्षक कार्यालय में तोड़फोड़ और आगजनी हुई। कई सरकारी और निजी वाहनों को भी नुकसान पहुंचाया गया।
मामले में पुलिस ने अलग-अलग धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कर जांच की। कांग्रेस विधायक देवेंद्र यादव समेत कई आरोपियों के खिलाफ भी मामला चला और बाद में उन्हें अदालतों से जमानत मिली। आरोपियों ने अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज किया है, जबकि अभियोजन पक्ष ने मामले में अलग आरोप लगाए हैं।
इस पूरे प्रकरण में गिरफ्तारियां, जमानत और आरोपों को लेकर न्यायिक प्रक्रिया अभी भी महत्वपूर्ण भूमिका में है। इसलिए अलग-अलग पक्षों के दावों को संबंधित अदालतों के आदेशों और जांच के निष्कर्षों के संदर्भ में देखना जरूरी है।