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Gut Health: पेट की सेहत बिगड़ने से शरीर पर पड़ सकता है असर, जानिए कौन-से फूड अच्छे और कौन-से नुकसानदायक

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अक्सर लोग कहते हैं कि उनका पेट ठीक नहीं रहता, गैस या कब्ज की समस्या बनी रहती है या खाना ठीक से पचता नहीं है। कई बार इन परेशानियों के पीछे गट हेल्थ यानी आंतों की सेहत भी एक वजह हो सकती है।

हमारी आंतों में खरबों बैक्टीरिया, वायरस और दूसरे सूक्ष्मजीव मौजूद रहते हैं। इन्हें सामूहिक रूप से गट माइक्रोबायोम कहा जाता है। ये भोजन पचाने, पोषक तत्वों के अवशोषण और इम्यून सिस्टम समेत शरीर की कई प्रक्रियाओं में भूमिका निभाते हैं।

हम रोज क्या खाते हैं, इसका सीधा असर गट माइक्रोबायोम पर पड़ता है। फाइबर से भरपूर फल-सब्जियां, दालें, साबुत अनाज और कुछ फर्मेंटेड फूड्स आंतों के लिए फायदेमंद हो सकते हैं। वहीं ज्यादा चीनी, रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स गट के माइक्रोबायोम के संतुलन को प्रभावित कर सकते हैं।

गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. हर्ष कपूर के मुताबिक, गट हेल्थ सिर्फ पेट से जुड़ी समस्या नहीं है, बल्कि इसका संबंध पाचन, पोषक तत्वों के अवशोषण और शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली से भी है।

गट हेल्थ खराब होने पर कैसे पहचानें?

जब आंतों में मौजूद सूक्ष्मजीवों का संतुलन प्रभावित होता है, तो पाचन तंत्र पर इसका असर दिखाई दे सकता है। इसके संकेतों में बार-बार गैस, कब्ज, दस्त, ब्लोटिंग, पेट दर्द या खाना पचाने में परेशानी शामिल हो सकती है।

हालांकि, इन लक्षणों का कारण हमेशा गट माइक्रोबायोम ही हो, यह जरूरी नहीं है। लगातार या गंभीर लक्षण होने पर डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।

लंबे समय तक पेट खराब रहने से क्या हो सकता है?

अगर पाचन संबंधी समस्या लंबे समय तक बनी रहती है, तो शरीर में पोषक तत्वों का अवशोषण प्रभावित हो सकता है। इससे कमजोरी, पोषण की कमी और स्वास्थ्य पर दूसरे नकारात्मक प्रभाव पड़ सकते हैं।

इसलिए बार-बार होने वाली पाचन संबंधी परेशानी को सिर्फ सामान्य गैस या अपच मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

गट हेल्थ के लिए कैसी डाइट रखें?

आंतों में मौजूद अच्छे बैक्टीरिया को अलग-अलग तरह के फाइबर और पोषक तत्व पसंद होते हैं। इसलिए डाइट में वैरायटी रखना जरूरी है।

रोजाना अपनी थाली में अलग-अलग तरह के फल, सब्जियां, दालें, साबुत अनाज, बीन्स और अन्य फाइबर रिच फूड शामिल करें। दही और छाछ जैसे फर्मेंटेड फूड भी कुछ लोगों के लिए फायदेमंद हो सकते हैं।

कौन-से फूड गुड बैक्टीरिया के लिए फायदेमंद?

फल-सब्जियां, दालें, बीन्स और साबुत अनाज में मौजूद फाइबर आंतों के माइक्रोबायोम को पोषण देने में मदद करता है।

वहीं दही जैसे कुछ फर्मेंटेड फूड्स में जीवित माइक्रोऑर्गेनिज्म हो सकते हैं। हालांकि हर फर्मेंटेड फूड का प्रभाव एक जैसा नहीं होता।

कौन-से फूड गट हेल्थ को नुकसान पहुंचा सकते हैं?

डाइट में बहुत ज्यादा अतिरिक्त चीनी, रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट, अनहेल्दी फैट और अत्यधिक अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स शामिल होने से गट माइक्रोबायोम पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।

इसलिए कभी-कभार ऐसे खाद्य पदार्थ खाने की बजाय रोज की डाइट का आधार पौष्टिक और कम प्रोसेस्ड फूड्स को बनाना बेहतर है।

ज्यादा चीनी से क्या नुकसान?

डाइट में लगातार ज्यादा मात्रा में चीनी लेने से गट माइक्रोबायोम का संतुलन प्रभावित हो सकता है। इससे कुछ बैक्टीरिया के अनुपात में बदलाव और शरीर में सूजन से जुड़े प्रभाव हो सकते हैं।

इसलिए मीठे पेय, मिठाइयों और ज्यादा चीनी वाले पैकेज्ड फूड्स का सेवन सीमित रखना बेहतर है।

बार-बार एंटीबायोटिक लेने से भी प्रभावित हो सकता है गट

एंटीबायोटिक्स संक्रमण पैदा करने वाले बैक्टीरिया को खत्म करने के लिए इस्तेमाल की जाती हैं, लेकिन इनके इस्तेमाल से गट के सामान्य बैक्टीरिया भी प्रभावित हो सकते हैं।

बार-बार या बिना जरूरत एंटीबायोटिक लेने से गट माइक्रोबायोम की विविधता प्रभावित हो सकती है। इसलिए एंटीबायोटिक्स केवल डॉक्टर की सलाह पर ही लें।

क्या गट बैक्टीरिया भूख और क्रेविंग को प्रभावित करते हैं?

गट और ब्रेन के बीच लगातार संवाद होता है, जिसे गट-ब्रेन एक्सिस कहा जाता है। आंतों के माइक्रोबायोम से बनने वाले कुछ रसायन और सिग्नल भूख और पेट भरने के एहसास को प्रभावित कर सकते हैं।

लेकिन किसी खास चीज को खाने की इच्छा सिर्फ गट बैक्टीरिया से तय नहीं होती। नींद, तनाव, हार्मोन, आदतें और आसपास का माहौल भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

तनाव का सीधा असर पेट पर भी पड़ सकता है

स्ट्रेस और गट हेल्थ के बीच दोतरफा संबंध माना जाता है। लंबे समय तक तनाव रहने पर शरीर में स्ट्रेस हार्मोन बढ़ सकते हैं, जो पाचन तंत्र के सामान्य कामकाज को प्रभावित कर सकते हैं।

इसीलिए कई लोगों को तनाव के दौरान गैस, पेट दर्द, दस्त या कब्ज जैसी समस्याएं महसूस हो सकती हैं।

सिर्फ खाना नहीं, लाइफस्टाइल भी है जरूरी

गट हेल्थ बेहतर रखने के लिए सिर्फ डाइट पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं है। अच्छी नींद, नियमित शारीरिक गतिविधि और तनाव को नियंत्रित करना भी जरूरी है।

कोशिश करें कि खाने और सोने का समय नियमित हो और रोज कुछ न कुछ शारीरिक गतिविधि जरूर करें।

इन लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें

कभी-कभार गैस या कब्ज होना आम बात हो सकती है, लेकिन अगर समस्या लगातार बनी रहे या बार-बार लौटे तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

खास तौर पर इन लक्षणों में तुरंत चिकित्सकीय सलाह लें—

  • स्टूल में खून आना
  • बिना वजह तेजी से वजन कम होना
  • लगातार या तेज पेट दर्द
  • बार-बार उल्टी होना
  • निगलने में परेशानी
  • लगातार ब्लोटिंग या पेट फूलना
  • ऐसी पाचन समस्या जो रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित करने लगे

निष्कर्ष: गट हेल्थ को बेहतर रखने का सबसे आसान तरीका है—वैरायटी वाली पौष्टिक डाइट, पर्याप्त फाइबर, कम अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड, नियमित व्यायाम, अच्छी नींद और तनाव पर नियंत्रण। और अगर पेट से जुड़ी समस्या लगातार बनी हुई है, तो खुद से इलाज करने के बजाय डॉक्टर की सलाह लेना सबसे सुरक्षित तरीका है।

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