Health Insurance Tips: हेल्थ इंश्योरेंस खरीदना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी उसकी शर्तों को समझना भी है। कई बार पॉलिसी होने के बावजूद लोगों का हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम रिजेक्ट हो जाता है। इसकी वजह हमेशा बीमा कंपनी नहीं होती, बल्कि कई बार पॉलिसीधारक की छोटी-छोटी गलतियां भी क्लेम खारिज होने का कारण बन जाती हैं। आइए जानते हैं किन बातों का ध्यान रखकर इस परेशानी से बचा जा सकता है।
1. मेडिकल हिस्ट्री छिपाना पड़ सकता है भारी
हेल्थ इंश्योरेंस लेते समय अपनी पुरानी बीमारी, सर्जरी या इलाज की जानकारी छिपाना सबसे बड़ी गलती मानी जाती है। यदि बाद में बीमा कंपनी को पता चलता है कि आपने Pre-existing Disease की जानकारी नहीं दी थी, तो क्लेम अस्वीकार किया जा सकता है। इसलिए आवेदन करते समय सभी मेडिकल डिटेल्स सही और पूरी दें।
2. वेटिंग पीरियड पूरा होने से पहले क्लेम करना
अधिकांश हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसियों में कुछ बीमारियों और पहले से मौजूद रोगों के लिए Waiting Period निर्धारित होता है। यदि इस अवधि के पूरा होने से पहले उसी बीमारी के इलाज का क्लेम किया जाता है, तो बीमा कंपनी उसे मंजूर नहीं कर सकती।
3. पॉलिसी में शामिल न होने वाले इलाज का खर्च
हर हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी में कुछ Exclusions यानी ऐसे इलाज होते हैं जो कवर नहीं किए जाते। इनमें कॉस्मेटिक सर्जरी, कुछ फर्टिलिटी ट्रीटमेंट, एक्सपेरिमेंटल इलाज और कुछ गैर-चिकित्सीय खर्च शामिल हो सकते हैं। इसलिए पॉलिसी खरीदने से पहले एक्सक्लूजन लिस्ट जरूर पढ़ें।
4. अधूरे या गलत दस्तावेज जमा करना
गलत जानकारी, अधूरा क्लेम फॉर्म या जरूरी दस्तावेज समय पर जमा न करने से भी क्लेम अटक सकता है। अस्पताल के बिल, डिस्चार्ज समरी, डॉक्टर की सलाह और जांच रिपोर्ट जैसे सभी दस्तावेज सुरक्षित रखें और समय पर जमा करें।
5. नेटवर्क अस्पताल और प्री-ऑथराइजेशन की अनदेखी
यदि आप कैशलेस इलाज का लाभ लेना चाहते हैं, तो पहले यह सुनिश्चित करें कि अस्पताल बीमा कंपनी के नेटवर्क हॉस्पिटल में शामिल है। कई मामलों में इलाज शुरू होने से पहले Pre-Authorization लेना भी जरूरी होता है। इन नियमों का पालन न करने पर क्लेम में परेशानी आ सकती है।
अगर क्लेम रिजेक्ट हो जाए तो क्या करें?
यदि आपको लगता है कि आपका क्लेम गलत तरीके से अस्वीकार किया गया है, तो सबसे पहले बीमा कंपनी के ग्रिवांस रिड्रेसल सेल में लिखित शिकायत दर्ज करें। साथ ही पॉलिसी की शर्तों की दोबारा जांच करें। जरूरत पड़ने पर नियमानुसार आगे की शिकायत प्रक्रिया भी अपनाई जा सकती है।
सही जानकारी और तैयारी से मिलेगा पूरा लाभ
हेल्थ इंश्योरेंस का असली फायदा तभी मिलता है, जब पॉलिसी की शर्तों को अच्छी तरह समझा जाए, सभी मेडिकल जानकारियां ईमानदारी से दी जाएं और क्लेम से जुड़े दस्तावेज व्यवस्थित रखे जाएं।