Gold-Silver Price Crash: सोना-चांदी खरीदने की तैयारी कर रहे लोगों के लिए बाजार से बड़ी खबर सामने आई है। कुछ समय पहले तक रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने वाली चांदी की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई है। चांदी का भाव अपने ऊपरी स्तर से करीब ₹2.30 लाख प्रति किलो तक नीचे आ गया है। सोने की कीमतों में भी कमजोरी देखने को मिली है। अब निवेशकों और खरीदारों की नजर इस बात पर है कि क्या कीमती धातुओं के भाव में आगे और गिरावट आएगी या फिर बाजार में दोबारा तेजी लौटेगी।
दी गई जानकारी के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी की कीमत 120 डॉलर प्रति औंस के ऊंचे स्तर से गिरकर करीब 53 डॉलर पर आ गई। इसका असर भारतीय बाजार पर भी देखने को मिला। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर चांदी का भाव करीब ₹4.20 लाख प्रति किलो से गिरकर ₹1.90 लाख के आसपास पहुंच गया। हालांकि, ये भाव अलग-अलग समय और बाजार परिस्थितियों के अनुसार बदल सकते हैं।
सोने की कीमतों में भी गिरावट, लेकिन चांदी को ज्यादा झटका
चांदी के साथ सोने की कीमतों पर भी दबाव बना हुआ है। पिछले सप्ताह अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने का भाव गिरकर करीब 3,989 से 3,994 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर पहुंच गया था। बाद में इसमें कुछ सुधार हुआ और कीमत करीब 4,026 डॉलर प्रति औंस तक लौट आई।
इसके बावजूद सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी है। दूसरी ओर, चांदी में सोने जैसी मजबूत रिकवरी दिखाई नहीं दी है। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और अमेरिका की ब्याज दरों को लेकर बनी चिंता को इसकी प्रमुख वजहों में गिना जा रहा है।
चांदी की कीमतों में इतनी बड़ी गिरावट क्यों आई?
कोटक नियो के कमोडिटी रिसर्च विभाग की एवीपी कायनात चैनवाला के मुताबिक, बाजार में अनिश्चितता बढ़ने पर निवेशक सोना और चांदी जैसी कीमती धातुओं में भी बिकवाली कर सकते हैं। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में होने वाले बदलाव भी इनकी कीमतों को प्रभावित करते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, लंबी अवधि के नजरिए से सोने की स्थिति चांदी के मुकाबले बेहतर रह सकती है। इसकी एक वजह चांदी की औद्योगिक मांग है। चांदी का इस्तेमाल केवल निवेश के लिए ही नहीं, बल्कि कई उद्योगों में भी होता है। यदि वैश्विक आर्थिक गतिविधियां धीमी पड़ती हैं, तो औद्योगिक मांग प्रभावित हो सकती है, जिससे चांदी की कीमतों पर अतिरिक्त दबाव बन सकता है।
क्या ₹1.90 लाख से भी नीचे आ जाएगी चांदी?
चांदी खरीदने वालों के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या कीमतों में गिरावट का सिलसिला अभी जारी रहेगा?
विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी की कीमत 50 डॉलर प्रति औंस से नीचे चली जाती है, तो भारतीय बाजार में भी इसका भाव ₹1.90 लाख प्रति किलो के स्तर से नीचे फिसल सकता है। हालांकि, यह केवल एक संभावित स्थिति है, कोई निश्चित अनुमान नहीं। अंतरराष्ट्रीय कीमतों, डॉलर की चाल और घरेलू बाजार की परिस्थितियों के आधार पर भाव बदल सकते हैं।
ऐसे में केवल गिरावट देखकर खरीदारी का फैसला करना जोखिम भरा हो सकता है। खरीदारों को कीमतों के साथ-साथ बाजार में जारी उतार-चढ़ाव पर भी नजर रखनी चाहिए।
27-28 अक्टूबर की अमेरिकी फेड बैठक पर बाजार की नजर
सोना-चांदी की अगली चाल तय करने में अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक महत्वपूर्ण हो सकती है। दी गई जानकारी के अनुसार, बाजार की नजर 27 और 28 अक्टूबर को होने वाली बैठक पर है।
यदि अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर फैसला बाजार की उम्मीदों के अनुकूल रहता है, तो सोने और चांदी की कीमतों को राहत मिल सकती है। इसके विपरीत, ब्याज दरों के लंबे समय तक ऊंचे बने रहने की आशंका बढ़ती है, तो कीमती धातुओं पर दबाव जारी रह सकता है।
अमेरिका में ब्याज दरों का रुख इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसका असर डॉलर की मजबूती, बॉन्ड यील्ड और निवेशकों की खरीद-बिक्री पर पड़ता है।
मिडिल ईस्ट का तनाव भी बदल सकता है बाजार की दिशा
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव ने भी वैश्विक बाजारों की चिंता बढ़ाई है। सऊदी अरब के ऊर्जा ठिकानों पर हमलों और हूती विद्रोहियों के साथ बढ़ते टकराव से तेल की आपूर्ति को लेकर आशंकाएं बनी हुई हैं।
अगर कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो महंगाई का दबाव बढ़ सकता है। इससे अमेरिका में ब्याज दरों के लंबे समय तक ऊंचे बने रहने की आशंका मजबूत हो सकती है। मजबूत डॉलर और बढ़ती बॉन्ड यील्ड का असर सोने-चांदी की कीमतों पर पड़ सकता है।
खरीदारों के लिए अगले कुछ दिन अहम
फिलहाल सोना और चांदी दोनों ही बाजार में उतार-चढ़ाव के दौर से गुजर रहे हैं। चांदी में आई बड़ी गिरावट ने खरीदारों का ध्यान जरूर खींचा है, लेकिन आगे की दिशा अमेरिकी फेड के फैसले, डॉलर की चाल, कच्चे तेल की कीमतों और मिडिल ईस्ट के हालात पर निर्भर करेगी।
निष्कर्ष: चांदी का भाव ₹1.90 लाख प्रति किलो से नीचे जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता, लेकिन कीमतों में और गिरावट की कोई गारंटी नहीं है। खरीदारी करने से पहले अपने शहर का ताजा भाव, मेकिंग चार्ज, जीएसटी और खरीद-बिक्री के अंतर की जानकारी जरूर लें। निवेश का फैसला केवल कीमतों में आई गिरावट के आधार पर न करें।