इंडिया AI मिशन के तहत इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की बड़ी पहल; गणित, कोडिंग, वैज्ञानिक शोध और साइबर सुरक्षा जैसे कामों में होंगे उपयोगी, 100 से ज्यादा भाषाओं को सपोर्ट करने वाला Eka-1 भी शामिल
भारत ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने इंडिया AI मिशन के तहत तीन स्वदेशी AI मॉडल लॉन्च किए हैं। इन मॉडल्स के नाम Eka-1, Dheer 2B और Dheer 5B हैं।
इनकी सबसे खास बात यह है कि इन्हें इंटरनेट कनेक्शन के बिना भी इस्तेमाल किया जा सकता है। खास तौर पर Dheer सीरीज के मॉडल सीधे स्मार्टफोन पर चलने के लिए तैयार किए गए हैं। यानी इनके इस्तेमाल के लिए हर बार मोबाइल डेटा, वाई-फाई या क्लाउड सर्वर पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं होगी।
ये AI मॉडल गणित के जटिल सवालों को हल करने, कोडिंग, वैज्ञानिक शोध और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में उपयोगी साबित हो सकते हैं। सरकार की इस पहल को भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता और AI के क्षेत्र में स्वदेशी क्षमता विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
AI में भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता को मिलेगी मजबूती
इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव एस. कृष्णन ने इन मॉडल्स को विकसित करने वाली टीमों की सराहना की है। उन्होंने कहा कि यह पहल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में भारत की रणनीतिक और तकनीकी स्वायत्तता को मजबूत करेगी।
इन तीनों मॉडल्स को शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों, स्टार्टअप्स और आम लोगों के उपयोग के लिए ‘एआईकोश’ प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराया गया है।
Eka-1: 100 से ज्यादा भाषाओं में काम करने वाला 26 अरब पैरामीटर का मॉडल
तीनों स्वदेशी AI मॉडल्स में Eka-1 अपनी बहुभाषी क्षमता के कारण खास है।
किसने विकसित किया: बेंगलुरु स्थित साकेट AI (Saket AI) ने इसे तैयार किया है।
तकनीकी क्षमता: Eka-1 एक 26 अरब पैरामीटर वाला AI मॉडल है, जिसे 7.5 ट्रिलियन टोकन पर प्रशिक्षित किया गया है।
भाषाओं का सपोर्ट: यह 100 से अधिक भारतीय और विदेशी भाषाओं के साथ-साथ कई प्रोग्रामिंग भाषाओं में काम करने में सक्षम है।
कहां होगा उपयोग: साकेट AI के CEO अभिषेक उप्परवाल के मुताबिक, इस मॉडल को खास तौर पर भारत के बैंकिंग, वित्तीय सेवा और साइबर सुरक्षा क्षेत्र की जरूरतों को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है। इसका उद्देश्य ऐसे डिजिटल कामों में मदद करना है, जिन्हें इंटरनेट कनेक्टिविटी के बिना भी पूरा किया जा सके।
Dheer 2B और Dheer 5B: स्मार्टफोन में ही चलेगा AI
इस लॉन्च की सबसे बड़ी खासियत Dheer 2B और Dheer 5B मॉडल हैं। इन्हें इस तरह तैयार किया गया है कि स्मार्टफोन पर सीधे इस्तेमाल किया जा सके।
किसने विकसित किया: इन दोनों मॉडल्स को जेंटेआईक्यू (JenteIQ) ने विकसित किया है।
तकनीकी आधार: इन्हें विकसित करने में गूगल क्लाउड के टेंसर प्रोसेसिंग यूनिट (TPU) की मदद ली गई है। ये अंग्रेजी के साथ 10 प्रमुख भारतीय भाषाओं में काम कर सकते हैं।
ऑन-डिवाइस तकनीक: जेंटेआईक्यू के CEO प्रो. शशिकुमार के मुताबिक, इन मॉडल्स का आर्किटेक्चर हल्का रखा गया है, जिससे इन्हें क्लाउड कनेक्टिविटी पर निर्भर हुए बिना सीधे मोबाइल फोन पर चलाया जा सकता है।
इस तकनीक से मोबाइल यूजर्स को AI की सुविधाएं इस्तेमाल करने के लिए हर बार इंटरनेट से जुड़ने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों के लिए बन सकते हैं बड़ी मदद
भारत जैसे देश में जहां कई ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी अभी भी कमजोर है, वहां ऑन-डिवाइस AI तकनीक काफी उपयोगी साबित हो सकती है।
इन स्वदेशी मॉडल्स की मदद से दस्तावेजों में मौजूद जानकारी के आधार पर सवालों के जवाब खोजने, डेटा का विश्लेषण करने और जरूरी सूचनाएं प्राप्त करने जैसे काम किए जा सकते हैं।
इसके अलावा छात्रों, शोधकर्ताओं, छोटे कारोबारियों और स्टार्टअप्स को भी AI तकनीक का लाभ मिल सकता है। इंटरनेट की अनुपलब्धता के बावजूद स्मार्टफोन पर AI सुविधाएं उपलब्ध होना डिजिटल सेवाओं की पहुंच बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
क्या बदल सकता है भारत का AI भविष्य?
Eka-1, Dheer 2B और Dheer 5B की लॉन्चिंग भारत में स्वदेशी AI इकोसिस्टम विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। खास बात यह है कि इन मॉडल्स के जरिए AI को केवल बड़े डेटा सेंटर या हाई-स्पीड इंटरनेट तक सीमित रखने के बजाय सीधे मोबाइल डिवाइस तक पहुंचाने की कोशिश की गई है।
हालांकि, इनकी वास्तविक उपयोगिता का आकलन प्रदर्शन, सुरक्षा, भाषा की सटीकता और अलग-अलग स्मार्टफोन पर उपलब्धता के आधार पर होगा। फिर भी बिना इंटरनेट AI इस्तेमाल करने की क्षमता भारत के डिजिटल भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण संभावना खोलती है।