नई दिल्ली। भारत-चीन सीमा पर अरुणाचल प्रदेश के कुछ इलाकों में तनाव की स्थिति बने रहने की खबर है। भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के महानिदेशक शत्रुजीत सिंह कपूर के अनुसार, हाल के दिनों में राज्य के कई स्थानों पर भारतीय जवानों और चीनी सैनिकों का आमना-सामना हुआ है। इनमें से कुछ स्थानों पर स्थिति अब भी बनी हुई है।
ITBP प्रमुख ने बल के स्थापना दिवस से पहले आयोजित ‘हिमवीर सम्मान समारोह’ में जवानों के प्रदर्शन की सराहना की। उन्होंने विशेष रूप से दुर्गम पहाड़ी इलाकों में तैनात नई लड़ाकू टीम ‘शौर्य कमांडो’ की भूमिका का उल्लेख किया।
हर बटालियन में कमांडो कंपनी तैयार करने की योजना
ITBP प्रमुख के मुताबिक, बल की प्रत्येक बटालियन में कमांडो टीम तैयार की जा चुकी है, जबकि दो अतिरिक्त टीमें गठित करने की प्रक्रिया जारी है। आगे चलकर हर बटालियन में एक पूर्ण कमांडो कंपनी विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है।
इसके अलावा, विशेष अभियानों के लिए अलग कमांडो बटालियन बनाने की योजना पर भी काम किया जा रहा है। इन टीमों को ऊंचाई वाले दुर्गम क्षेत्रों और कठिन मौसम में काम करने के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है, ताकि सीमावर्ती इलाकों में किसी भी चुनौती का तेजी से सामना किया जा सके।
ड्रोन और एंटी-ड्रोन तकनीक पर बढ़ेगा फोकस
आधुनिक युद्ध में ड्रोन की बढ़ती भूमिका को देखते हुए ITBP अपनी तकनीकी क्षमताओं का विस्तार कर रही है। रूस-यूक्रेन युद्ध का उदाहरण देते हुए बल प्रमुख ने बताया कि ड्रोन और दूसरी आधुनिक तकनीकों ने सैन्य अभियानों के तौर-तरीकों को काफी बदल दिया है।
इसी दिशा में ITBP ड्रोन संचालन, पायलट प्रशिक्षण और ड्रोन निर्माण की क्षमता बढ़ाने पर काम कर रही है। साथ ही, संभावित हवाई निगरानी और ड्रोन से जुड़े खतरों का मुकाबला करने के लिए एंटी-ड्रोन तकनीक को भी मजबूत करने की योजना है।
आधुनिकीकरण के लिए ड्रोन पर ₹1,000 करोड़ खर्च करने की योजना
रिपोर्ट के मुताबिक, ITBP की आधुनिकीकरण योजना में ड्रोन और एंटी-ड्रोन प्रणालियों के लिए लगभग ₹1,000 करोड़ निर्धारित करने की बात कही गई है।
इस योजना में केवल ड्रोन तकनीक ही नहीं, बल्कि वाहनों, उपकरणों और गोला-बारूद को आधुनिक बनाने पर भी जोर है। दुर्गम इलाकों में आवाजाही के लिए विशेष वाहन, स्वचालित जमीनी वाहन और क्विक रिएक्शन व्हीकल जैसे संसाधनों को भी योजना का हिस्सा बताया गया है।
सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा ढांचे को मजबूत करना और जवानों की परिचालन क्षमता बढ़ाना भी इन प्रयासों के प्रमुख उद्देश्य हैं।
सितंबर में हुई थी भारत-चीन सैन्य अधिकारियों की बैठक
दी गई जानकारी के अनुसार, भारत और चीन के बीच 6 सितंबर 2026 को पूर्वी सेक्टर में कोर कमांडर स्तर की बैठक आयोजित हुई थी। यह बैठक वाचा-दमाई बॉर्डर पर्सनल मीटिंग पॉइंट पर होने की बात कही गई है।
वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के कुछ क्षेत्रों को लेकर भारत और चीन की अलग-अलग धारणाएं रही हैं। ऐसे में गश्त के दौरान दोनों देशों के सैनिकों का आमना-सामना होने की घटनाएं सामने आती रही हैं।
ITBP प्रमुख के बयान से संकेत मिलता है कि बातचीत के प्रयासों के बावजूद अरुणाचल प्रदेश के कुछ सीमावर्ती इलाकों में सतर्कता बनाए रखने की जरूरत है। हालांकि, आमने-सामने की स्थिति के स्थान, अवधि और प्रकृति से जुड़ी विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने आने पर ही मौजूदा हालात की पूरी तस्वीर स्पष्ट होगी।
सीमा सुरक्षा के लिए तकनीक और प्रशिक्षण पर जोर
अरुणाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी सीमावर्ती क्षेत्रों में कठिन भौगोलिक परिस्थितियां सुरक्षा बलों के लिए बड़ी चुनौती हैं। ऐसे में कमांडो प्रशिक्षण, ड्रोन निगरानी, एंटी-ड्रोन प्रणाली और आधुनिक वाहनों पर निवेश को सीमा सुरक्षा की तैयारियों का अहम हिस्सा माना जा रहा है।
ITBP की योजनाओं का उद्देश्य सीमावर्ती क्षेत्रों में जवानों की निगरानी, त्वरित प्रतिक्रिया और अभियान चलाने की क्षमता को मजबूत करना है।