न्यूयॉर्क। भारत और अमेरिका के बीच व्यापार और टैरिफ से जुड़े मतभेदों के बीच विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भारत की सुरक्षा प्राथमिकताओं को लेकर अहम टिप्पणी की है। न्यूयॉर्क में एशिया सोसाइटी के कार्यक्रम में जयशंकर ने कहा कि भारत के लिए सुरक्षा संबंधी चिंताएं बेहद महत्वपूर्ण हैं और यदि कोई साझेदार देश इन चिंताओं को पर्याप्त रूप से नहीं समझता या उनकी गंभीरता को महसूस नहीं करता, तो इसका असर द्विपक्षीय संबंधों पर पड़ सकता है।
आतंकवाद पर भारत की चिंता
जयशंकर ने किसी देश का नाम लिए बिना पड़ोसी देश से आने वाले आतंकवाद को भारत की प्रमुख सुरक्षा चिंताओं में शामिल बताया। उनके बयान को भारत की लंबे समय से चली आ रही सीमापार आतंकवाद संबंधी चिंताओं के संदर्भ में देखा जा रहा है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत-अमेरिका संबंधों को आगे बढ़ाने की इच्छा है, लेकिन दोनों देशों के बीच मौजूद मतभेदों को संबोधित करना जरूरी होगा।
UN में भी आतंकवाद पर भारत का सख्त रुख
जयशंकर की यह टिप्पणी उनके हालिया संयुक्त राष्ट्र महासभा संबोधन के बाद आई है। 26 सितंबर को UNGA में उन्होंने आतंकवाद को सामान्य बनाने और आतंकवाद को प्रायोजित करने वाली सरकारों को जवाबदेह ठहराने की आवश्यकता पर जोर दिया था।
व्यापार और रूस से तेल खरीद भी अहम मुद्दे
भारत-अमेरिका संबंधों में इस समय केवल सुरक्षा ही नहीं, बल्कि व्यापार, टैरिफ और रूस से कच्चे तेल की खरीद भी महत्वपूर्ण मुद्दे हैं। 23 सितंबर को जयशंकर और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की न्यूयॉर्क में मुलाकात हुई थी, जिसमें दोनों पक्षों ने रणनीतिक साझेदारी के साथ रूस और ईरान से जुड़े प्रतिबंधों तथा मध्य पूर्व की स्थिति पर चर्चा की।
रूस से ऊर्जा खरीद को लेकर भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक हितों से जुड़ी चिंताएं अमेरिका के सामने रखी हैं। इसी बीच वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल 29 सितंबर से 5 अक्टूबर तक अमेरिका की यात्रा पर हैं, जहां प्रस्तावित भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत आगे बढ़ाने की योजना है।
जयशंकर के बयान का व्यापक संकेत
जयशंकर के ताजा बयान से यह स्पष्ट होता है कि भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी के बावजूद सुरक्षा, आतंकवाद, व्यापार, टैरिफ और ऊर्जा जैसे मुद्दों पर दोनों देशों के बीच बातचीत और मतभेद दोनों जारी हैं। भारत अपनी सुरक्षा चिंताओं को द्विपक्षीय संबंधों का महत्वपूर्ण हिस्सा मानता है, जबकि आर्थिक और रणनीतिक मुद्दों पर भी दोनों पक्ष समाधान तलाश रहे हैं।