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Jio IPO ने रचा इतिहास: 3 दिन में 1.3 करोड़ से ज्यादा आवेदन, ₹30,213 करोड़ का इश्यू 22.19 गुना सब्सक्राइब

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दुनिया में 1 करोड़ से अधिक आवेदन पाने वाला पहला IPO बनने का रिकॉर्ड, संस्थागत निवेशकों ने दिखाई जबरदस्त दिलचस्पी; देश के सबसे बड़े IPO को मिली रिकॉर्डतोड़ बोलियां

नई दिल्ली। रिलायंस इंडस्ट्रीज की डिजिटल और टेलीकॉम इकाई जियो प्लेटफॉर्म्स के IPO ने भारतीय शेयर बाजार में नया इतिहास रच दिया है। तीन दिनों की बोली प्रक्रिया के दौरान इस इश्यू को निवेशकों का जबरदस्त समर्थन मिला। ₹30,213 करोड़ का यह IPO कुल 22.19 गुना सब्सक्राइब हुआ और इसे 1 करोड़ से अधिक आवेदन मिले।

जियो प्लेटफॉर्म्स का यह इश्यू भारत का अब तक का सबसे बड़ा IPO बना। इसके साथ ही आवेदन संख्या के मामले में भी इसने नया रिकॉर्ड बनाया। इससे पहले वारी एनर्जीज के IPO को करीब 97.3 लाख आवेदन मिले थे। जियो प्लेटफॉर्म्स ने यह आंकड़ा पार कर लिया।

1. निवेशकों ने लगाईं लाखों करोड़ रुपये की बोलियां

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के आंकड़ों के मुताबिक, IPO के लिए उपलब्ध 19.75 करोड़ शेयरों के मुकाबले निवेशकों ने करीब 438.26 करोड़ शेयरों के लिए बोलियां लगाईं। इस तरह इश्यू कुल 22.19 गुना सब्सक्राइब हुआ।

एंकर निवेशकों को मिली हिस्सेदारी सहित कुल मांग का मूल्य लगभग ₹7.4 लाख करोड़ तक पहुंच गया। वहीं, सार्वजनिक सब्सक्रिप्शन के दौरान मिली बोलियों का मूल्य करीब ₹4.9 लाख करोड़ रहा। ध्यान रहे कि ये निवेशकों की बोली का मूल्य है, कंपनी द्वारा जुटाई गई वास्तविक रकम नहीं।

2. दुनिया में पहली बार 1 करोड़ से ज्यादा आवेदन

जियो प्लेटफॉर्म्स के IPO की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक आवेदन संख्या का रिकॉर्ड रहा। इस इश्यू को 1 करोड़ से अधिक आवेदन मिले, जिससे यह दुनिया का पहला ऐसा IPO बना जिसने यह आंकड़ा पार किया।

इससे पहले वारी एनर्जीज का IPO सबसे अधिक आवेदन पाने वाले इश्यू में शामिल था। जियो के IPO में खुदरा निवेशकों के साथ संस्थागत निवेशकों और रिलायंस इंडस्ट्रीज के पात्र शेयरधारकों की भी भागीदारी रही।

3. संस्थागत निवेशकों ने दिखाई सबसे ज्यादा दिलचस्पी

IPO में सबसे मजबूत मांग क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) की ओर से आई। इस श्रेणी का आरक्षित हिस्सा 70.55 गुना सब्सक्राइब हुआ।

नॉन-इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (NII) की श्रेणी 14 गुना सब्सक्राइब हुई, जबकि रिटेल निवेशकों का हिस्सा 2.72 गुना भरा। आंकड़े बताते हैं कि बड़े संस्थागत निवेशकों ने इस इश्यू में विशेष रुचि दिखाई।

4. भारत का सबसे बड़ा IPO बना जियो प्लेटफॉर्म्स

₹30,213 करोड़ के इश्यू आकार के साथ जियो प्लेटफॉर्म्स ने भारत के सबसे बड़े IPO का रिकॉर्ड बनाया। इससे पहले हुंडई मोटर इंडिया का IPO इस मामले में सबसे आगे था।

जियो का इश्यू 27 करोड़ नए इक्विटी शेयरों का फ्रेश इश्यू है। इसमें मौजूदा निवेशकों की हिस्सेदारी बेचने वाला ऑफर फॉर सेल (OFS) शामिल नहीं है।

5. फ्रेश इश्यू से जुटाई जाएगी रकम

जियो प्लेटफॉर्म्स के IPO में नए शेयर जारी किए गए हैं। इसका अर्थ है कि इश्यू से प्राप्त रकम कंपनी को मिलेगी, जिसका इस्तेमाल घोषित उद्देश्यों के अनुसार किया जाएगा।

कंपनी के इश्यू दस्तावेजों के मुताबिक, जुटाई गई रकम का बड़ा हिस्सा कर्ज चुकाने और शेष राशि का इस्तेमाल सामान्य कॉरपोरेट जरूरतों के लिए करने की योजना है।

6. पहले दिन से ही निवेशकों का उत्साह

जियो प्लेटफॉर्म्स का IPO 21 अक्टूबर को खुला और 23 अक्टूबर को बंद हुआ। बोली प्रक्रिया के दौरान निवेशकों की दिलचस्पी लगातार बनी रही। शुरुआती दिनों में ही इश्यू पूरी तरह सब्सक्राइब हो गया था और अंतिम दिन तक कुल सब्सक्रिप्शन 22.19 गुना पहुंच गया।

इश्यू के लिए ₹1,065 से ₹1,119 प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया गया था। अंतिम मूल्य ऊपरी सीमा पर तय होने की उम्मीद जताई गई।

7. लिस्टिंग के बाद ₹10 लाख करोड़ से अधिक का मार्केट कैप संभव

₹1,119 प्रति शेयर के ऊपरी मूल्य पर जियो प्लेटफॉर्म्स का अनुमानित पोस्ट-इश्यू मार्केट कैपिटलाइजेशन करीब ₹10.3 लाख करोड़ बैठता है। इस मूल्यांकन के आधार पर कंपनी शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने के बाद भारत की सबसे मूल्यवान कंपनियों में शामिल हो सकती है।

हालांकि, वास्तविक बाजार पूंजीकरण लिस्टिंग के बाद शेयर की कीमत पर निर्भर करेगा। IPO में मिले भारी समर्थन का अर्थ यह नहीं है कि लिस्टिंग के दिन शेयर का भाव निश्चित रूप से बढ़ेगा।

फ्रेश इश्यू और OFS में क्या अंतर है?

फ्रेश इश्यू: कंपनी नए शेयर जारी करके पूंजी जुटाती है। इससे प्राप्त रकम कंपनी को मिलती है और उसका इस्तेमाल घोषित उद्देश्यों के लिए किया जाता है।

ऑफर फॉर सेल (OFS): इसमें मौजूदा शेयरधारक अपने शेयर बेचते हैं। बिक्री से मिलने वाली रकम संबंधित शेयरधारकों को मिलती है, कंपनी को नहीं।

निवेशकों के लिए क्या है इसका मतलब?

जियो प्लेटफॉर्म्स के IPO में मिली रिकॉर्डतोड़ मांग निवेशकों की कंपनी और उसके कारोबार में दिलचस्पी दिखाती है। लेकिन केवल ज्यादा सब्सक्रिप्शन या बड़े आवेदन आंकड़े देखकर निवेश का फैसला करना उचित नहीं है।

निवेशकों को कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन, मूल्यांकन, जोखिमों और अपनी निवेश क्षमता का आकलन करना चाहिए। IPO में आवेदन करने से पहले कंपनी के आधिकारिक दस्तावेज पढ़ना भी जरूरी है।

निष्कर्ष: जियो प्लेटफॉर्म्स का IPO आवेदन संख्या, इश्यू आकार और निवेशकों की मांग के लिहाज से भारतीय पूंजी बाजार की बड़ी घटनाओं में शामिल हो गया है। अब बाजार की नजर शेयरों के आवंटन और प्रस्तावित लिस्टिंग पर रहेगी।

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