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ठंड में बढ़ सकता है सर्दी-जुकाम और वायरल का खतरा, डॉक्टर ने बताए बचाव के जरूरी उपाय

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बदलते मौसम में बुजुर्गों और बच्चों का रखें खास ध्यान, साफ-सफाई, पौष्टिक भोजन और हाथ धोने की आदत से संक्रमण से बचाव में मिलेगी मदद

ठंड की शुरुआत के साथ ही सर्दी-जुकाम, वायरल संक्रमण, फ्लू और सांस संबंधी परेशानियों का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे मौसम में थोड़ी सी लापरवाही सेहत पर भारी पड़ सकती है। खासकर छोटे बच्चों, बुजुर्गों और पहले से सांस संबंधी बीमारी से जूझ रहे लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत होती है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, बदलते मौसम में बचाव के लिए संतुलित खानपान, साफ-सफाई और स्वस्थ दिनचर्या अपनाना जरूरी है। नियमित रूप से हाथ धोना, ठंडी हवा से बचाव और लक्षण दिखने पर समय पर डॉक्टर से सलाह लेना संक्रमण के जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है।

गुनगुना पानी और पौष्टिक भोजन को दें प्राथमिकता

ठंड के मौसम में शरीर को पर्याप्त पानी और पोषण देना जरूरी है। गुनगुना पानी पीना गले को आराम पहुंचा सकता है, जबकि मौसमी फल और सब्जियां शरीर को जरूरी विटामिन और खनिज प्रदान करते हैं।

विटामिन-C युक्त खाद्य पदार्थ, जैसे आंवला, अमरूद, संतरा और नींबू, संतुलित आहार का हिस्सा बनाए जा सकते हैं। हालांकि, केवल विटामिन-C लेने से संक्रमण पूरी तरह नहीं रुकता। शरीर की सेहत के लिए पर्याप्त नींद, नियमित शारीरिक गतिविधि और पौष्टिक भोजन भी महत्वपूर्ण हैं।

सुबह-शाम ठंडी हवा से बचें, बच्चों-बुजुर्गों का रखें ध्यान

सुबह और देर शाम तापमान कम होने पर गर्म कपड़े पहनें। छोटे बच्चों और बुजुर्गों को ठंड से बचाने के लिए विशेष ध्यान दें। जिन लोगों को अस्थमा या सांस संबंधी अन्य समस्याएं हैं, वे ठंडी हवा और धूल-मिट्टी के संपर्क को सीमित रखें।

खानपान में ताजा और पौष्टिक भोजन को प्राथमिकता दें। बाहर के भोजन और लंबे समय तक रखे गए खाद्य पदार्थों को लेकर सावधानी बरतें। ठंडे पेय या आइसक्रीम से हर व्यक्ति को संक्रमण होता है, ऐसा जरूरी नहीं है; लेकिन अगर इनसे गले में परेशानी बढ़ती है, तो इनका सेवन सीमित किया जा सकता है।

हाथ धोने की आदत से संक्रमण का खतरा करें कम

सर्दी-जुकाम और फ्लू जैसे संक्रमणों से बचाव के लिए साफ-सफाई बेहद जरूरी है। किसी संक्रमित सतह को छूने के बाद हाथों के जरिए वायरस आंख, नाक या मुंह तक पहुंच सकते हैं।

कम्युनिटी हेल्थ एक्सपर्ट डॉ. राजेश तिवारी के अनुसार, संक्रमित हाथों से आंख, नाक या मुंह छूने पर वायरस शरीर में प्रवेश कर सकते हैं। इसलिए हाथों को साबुन और पानी से कम से कम 20 सेकंड तक अच्छी तरह धोना चाहिए। जरूरत पड़ने पर हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल भी किया जा सकता है।

खांसते और छींकते समय बरतें सावधानी

खांसते या छींकते समय मुंह और नाक को टिश्यू या कोहनी से ढकें। इस्तेमाल किए गए टिश्यू को तुरंत कूड़ेदान में डालें और हाथ साफ करें। भीड़भाड़ वाली जगहों पर, खासकर संक्रमण फैलने के दौरान, मास्क पहनना उपयोगी हो सकता है।

घर में धूल-मिट्टी जमा न होने दें और कमरों में उचित वेंटिलेशन बनाए रखें। यदि घर में कोई व्यक्ति बीमार है, तो उसके साथ निकट संपर्क सीमित रखें और व्यक्तिगत वस्तुएं साझा करने से बचें।

खुद से दवा लेना पड़ सकता है भारी

बुखार, खांसी या सर्दी-जुकाम होने पर बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक या दर्द निवारक दवाएं लेना उचित नहीं है। एंटीबायोटिक वायरल संक्रमण पर असर नहीं करतीं और इनका गलत इस्तेमाल नुकसान पहुंचा सकता है। कुछ दर्द निवारक दवाएं भी गलत मात्रा या परिस्थितियों में किडनी और लिवर को प्रभावित कर सकती हैं।

यदि बुखार लगातार बना रहे, सांस लेने में परेशानी हो, सीने में दर्द हो या हालत बिगड़ने लगे, तो जल्द चिकित्सा सहायता लें। छोटे बच्चों, बुजुर्गों और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों में लक्षण दिखने पर विशेष सतर्कता जरूरी है।

सावधानी ही बेहतर बचाव

ठंड के मौसम में स्वस्थ दिनचर्या अपनाना, पर्याप्त नींद लेना, पौष्टिक भोजन करना और साफ-सफाई का ध्यान रखना संक्रमण के जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है। याद रखें, समय पर सावधानी और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह ही बेहतर स्वास्थ्य की कुंजी है।

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