नागपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने विजयादशमी उत्सव के अवसर पर भारत की एकता, सामाजिक सद्भाव, विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि दुनिया में ऐसी शक्तियां मौजूद हैं, जो भारत को दबाना चाहती हैं। उनका उद्देश्य केवल सत्ता परिवर्तन करना नहीं, बल्कि अपने समर्थकों को सत्ता में बैठाना है। भागवत ने यह भी चिंता जताई कि देश और हिंदू समाज को विभाजित करने की कोशिशों को कुछ नेताओं का समर्थन मिलता है।
मंगलवार को नागपुर स्थित संघ मुख्यालय में आयोजित विजयादशमी कार्यक्रम में भागवत ने कहा कि देश को ऐसी ताकतों से सतर्क रहने की जरूरत है। उन्होंने समाज से एकजुट रहने और किसी भी परिस्थिति में आपसी विश्वास बनाए रखने की अपील की। कार्यक्रम में उन्होंने शस्त्र पूजन भी किया।
गौरतलब है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना वर्ष 1925 में विजयादशमी के दिन हुई थी। संघ हर साल इस अवसर पर स्थापना दिवस और विजयादशमी उत्सव आयोजित करता है।
भागवत के भाषण की 5 प्रमुख बातें
1. आंदोलनों का उद्देश्य समाधान हो, समाज में विभाजन नहीं
मोहन भागवत ने कहा कि समाज में समस्याओं के समाधान के लिए आंदोलन होना स्वाभाविक है, लेकिन आंदोलनों का उद्देश्य समाधान तलाशना होना चाहिए। यदि आंदोलनों के जरिए समाज में द्वेष, वैमनस्य और विभाजन पैदा किया जाता है, तो यह देश और समाज के हित में नहीं है।
उन्होंने कहा कि कई बार आंदोलनों का इस्तेमाल दूसरे उद्देश्यों के लिए किया जाता है और वे राजनीतिक स्वार्थों का माध्यम बन जाते हैं। समाज की समस्याओं का समाधान केवल नेताओं के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता। इसके लिए समाज की सक्रिय भागीदारी भी आवश्यक है।
2. एकजुट भारत को कमजोर करना आसान नहीं
भागवत ने कहा कि दुनिया में कुछ ऐसी शक्तियां हैं, जो भारत को कमजोर करना चाहती हैं। ऐसे प्रयासों के प्रभाव में आकर समाज को उत्तेजित होने के बजाय संयम और एकता बनाए रखनी चाहिए।
उन्होंने बंगाल विभाजन का उदाहरण देते हुए लॉर्ड कर्जन की नीति का उल्लेख किया। उनके अनुसार, बंगाल का विभाजन हिंदू-मुस्लिम आधार पर किया गया था, जिसे बाद में वापस लेना पड़ा। वहीं, 1947 में देश का विभाजन इसलिए नहीं रोका जा सका, क्योंकि समाज के एक हिस्से में अलगाव की भावना गहरी हो गई थी।
उन्होंने संदेश दिया कि सामाजिक एकता और आपसी विश्वास ही देश की सबसे बड़ी ताकत हैं।
3. पूर्वज और संस्कृति साझा, पहचान का सम्मान जरूरी
RSS प्रमुख ने कहा कि भारत के लोगों के पूर्वज एक हैं और देश की सांस्कृतिक जड़ों में भी समानता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि किसी की अलग पहचान मिटाए बिना सभी को साथ लेकर चलना चाहिए।
भागवत के अनुसार, भारत की परंपराओं और विचारधारा में दुनिया की अनेक समस्याओं का समाधान प्रस्तुत करने की क्षमता है। इसके लिए समाज में संवाद, परस्पर सम्मान और एकता को मजबूत करना जरूरी है।
4. विकास ऐसा हो, जिससे प्रकृति को नुकसान न पहुंचे
विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन पर जोर देते हुए भागवत ने कहा कि देश की प्रगति के लिए तकनीक और आधुनिक संसाधनों को बढ़ावा देना आवश्यक है, लेकिन विकास की कीमत प्रकृति को नुकसान पहुंचाकर नहीं चुकाई जानी चाहिए।
उन्होंने नेपाल में बाढ़ की घटनाओं का संदर्भ देते हुए कहा कि विकास की योजनाओं में अर्थव्यवस्था के साथ पर्यावरण और नैतिक मूल्यों का भी ध्यान रखा जाना चाहिए। उनका संदेश था कि टिकाऊ विकास ही भविष्य की जरूरत है।
5. OTT प्लेटफॉर्म पर नियम और AI का जिम्मेदार इस्तेमाल जरूरी
डिजिटल माध्यमों के बढ़ते प्रभाव पर चिंता जताते हुए भागवत ने कहा कि आज लोगों तक हर तरह की जानकारी पहुंच रही है, लेकिन बिना सही-गलत का आकलन किए उसका इस्तेमाल नुकसानदायक हो सकता है।
उन्होंने OTT प्लेटफॉर्म के लिए उचित नियमों की जरूरत पर जोर दिया और कहा कि सरकार तथा प्रशासन को इस विषय पर ध्यान देना चाहिए। साथ ही, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग भी जिम्मेदारी के साथ किया जाना चाहिए, ताकि तकनीक का लाभ समाज को मिले और उसके दुरुपयोग से बचा जा सके।
विजयादशमी कार्यक्रम में कई प्रमुख हस्तियां रहीं मौजूद
नागपुर में आयोजित इस कार्यक्रम में पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ और उनकी पत्नी डॉ. सुदेश धनखड़, इजराइल के काउंसल जनरल यानिव रेवाच, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी सहित कई प्रमुख हस्तियां उपस्थित रहीं।
अपने संबोधन में मोहन भागवत ने राष्ट्रीय एकता, सामाजिक सद्भाव, पर्यावरण संरक्षण और तकनीक के जिम्मेदार इस्तेमाल को महत्वपूर्ण बताया। उनके भाषण का प्रमुख संदेश यही रहा कि भारत की मजबूती के लिए समाज का एकजुट रहना और देशहित को प्राथमिकता देना आवश्यक है।