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RSS के 100 साल पर PM मोदी ने मोहन भागवत के संबोधन को बताया प्रेरणादायी, ‘पंच परिवर्तन’ से समाज में बदलाव पर जोर

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नई दिल्ली/नागपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के शताब्दी वर्ष विजयादशमी उत्सव में सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत के संबोधन की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सराहना की है। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर उनके भाषण को प्रेरणादायी बताया। उन्होंने कहा कि भागवत ने राष्ट्रीय प्रगति, सामाजिक एकता, आत्मनिर्भरता और समाज के चरित्र को मजबूत बनाने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर अपने विचार रखे।

प्रधानमंत्री ने संघ की 100 वर्षों की यात्रा में स्वयंसेवकों के योगदान, सेवा भावना और राष्ट्र निर्माण के प्रति समर्पण को भी रेखांकित किया। उन्होंने विशेष रूप से ‘पंच परिवर्तन’ की अवधारणा का उल्लेख करते हुए इसे समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की महत्वपूर्ण पहल बताया।

पंच परिवर्तन: समाज में बदलाव के पांच सूत्र

RSS की पंच परिवर्तन अवधारणा का उद्देश्य सामाजिक जीवन, पारिवारिक संस्कार, पर्यावरण और नागरिक जिम्मेदारियों को मजबूत करना है। इसके अंतर्गत पांच प्रमुख विषय शामिल हैं।

1. सामाजिक समरसता: समाज में भेदभाव को दूर करना, आपसी सद्भाव बढ़ाना और सभी वर्गों के बीच सहयोग की भावना मजबूत करना।

2. कुटुंब प्रबोधन: परिवार में संस्कार, संवाद, जिम्मेदारी और आपसी रिश्तों को मजबूत बनाने पर जोर देना।

3. पर्यावरण संरक्षण: प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी निभाना और पर्यावरण के अनुकूल जीवनशैली अपनाना।

4. स्वदेशी और स्व बोध: भारतीय संस्कृति, परंपराओं और पहचान के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा स्वदेशी उत्पादों को प्रोत्साहित करना।

5. नागरिक अनुशासन: संविधान और कानून के प्रति सम्मान, नागरिक कर्तव्यों का पालन तथा राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करना।

पीएम मोदी ने संघ की शताब्दी यात्रा को सेवा और राष्ट्र निर्माण से जुड़ा महत्वपूर्ण पड़ाव बताया। उन्होंने स्वयंसेवकों के योगदान की सराहना करते हुए राष्ट्र प्रथम की भावना के साथ समाज की सेवा करने वाले लोगों को याद किया।

मोहन भागवत बोले—स्वतंत्रता के बाद भी समर्पण की जरूरत

नागपुर के रेशिमबाग मैदान में आयोजित विजयादशमी उत्सव में मोहन भागवत ने कहा कि देश की स्वतंत्रता के लिए जिस तपस्या और समर्पण की आवश्यकता थी, आज की परिस्थितियों में भी देशहित के लिए गंभीर प्रयास करने होंगे।

उन्होंने कहा कि समाज को अपनी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को समझते हुए जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में सकारात्मक बदलाव लाने की जरूरत है। उनके अनुसार, पंच परिवर्तन केवल किसी एक वर्ष तक चलने वाला अभियान नहीं है, बल्कि जीवन के व्यवहार और आचरण में परिवर्तन लाने की प्रक्रिया है।

भागवत ने समाज के सभी वर्गों से इन पांचों विषयों को अपने दैनिक जीवन में अपनाने की अपील की।

OTT प्लेटफॉर्म और नई पीढ़ी को लेकर चिंता

संघ प्रमुख ने डिजिटल माध्यमों से मिलने वाली सूचनाओं और उनके प्रभाव पर भी विचार रखे। उन्होंने चिंता जताई कि नई पीढ़ी कई बार जानकारी की सत्यता और उसके प्रभाव का आकलन किए बिना उसे स्वीकार कर लेती है।

उन्होंने OTT प्लेटफॉर्म पर उचित नियमों और जिम्मेदार व्यवहार की आवश्यकता का मुद्दा उठाया। साथ ही, तकनीक के विवेकपूर्ण इस्तेमाल और युवाओं में नैतिक मूल्यों को मजबूत करने पर जोर दिया।

भागवत के संदेश के अनुसार, डिजिटल युग में केवल जानकारी हासिल करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसकी सत्यता, उद्देश्य और सामाजिक प्रभाव को समझना भी जरूरी है।

पर्यावरण संरक्षण और नशे की समस्या पर भी जोर

मोहन भागवत ने विकास के साथ पर्यावरण संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने विशेष रूप से हिमालयी क्षेत्र में विकास गतिविधियों के दौरान प्रकृति की सुरक्षा को प्राथमिकता देने का संदेश दिया।

सामाजिक सद्भाव को मजबूत करने और सोशल मीडिया पर प्रसारित सूचनाओं का विवेकपूर्ण उपयोग करने की अपील भी की गई।

नशे की बढ़ती समस्या को गंभीर चुनौती बताते हुए उन्होंने कहा कि इसके समाधान के लिए शासन, प्रशासन और समाज को मिलकर प्रयास करना चाहिए। नई पीढ़ी को नशे से दूर रखने और उसमें सही निर्णय लेने की क्षमता विकसित करने में परिवार तथा अभिभावकों की भूमिका महत्वपूर्ण है।

1925 में हुई थी RSS की स्थापना, 2025 में पूरे हुए 100 साल

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना वर्ष 1925 में विजयादशमी के दिन नागपुर में डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने की थी। वर्ष 2025 में संघ ने अपने 100 वर्ष पूरे किए। इसी अवसर पर नागपुर के रेशिमबाग मैदान में शताब्दी वर्ष विजयादशमी उत्सव आयोजित किया गया।

कार्यक्रम में मोहन भागवत ने शस्त्र पूजन किया और संघ के संस्थापक डॉ. हेडगेवार को पुष्पांजलि अर्पित की। उत्सव की शुरुआत स्वयंसेवकों के पथ संचलन के साथ हुई।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी संघ के स्वयंसेवकों को बधाई देते हुए सेवा, सामाजिक सद्भाव और राष्ट्र निर्माण की भावना को आगे बढ़ाने का संदेश दिया।

निष्कर्ष: RSS के शताब्दी वर्ष के अवसर पर मोहन भागवत के संबोधन और पीएम मोदी की प्रतिक्रिया में सामाजिक एकता, स्वदेशी, पारिवारिक संस्कार, पर्यावरण संरक्षण और नागरिक कर्तव्यों जैसे विषय प्रमुखता से सामने आए। पंच परिवर्तन को इन उद्देश्यों को व्यवहार में उतारने की पहल के रूप में प्रस्तुत किया गया।

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