डोंगरगढ़। मां बम्लेश्वरी मंदिर में नवरात्रि की पंचमी पर आज पारंपरिक पंचमी भेंट का आयोजन किया जाएगा। पिछले साल गर्भगृह में प्रवेश और पूजा पद्धति को लेकर हुए विवाद के बाद इस बार जिला प्रशासन ने पहले ही सभी पक्षों के साथ बैठक कर सहमति बना ली है। मंदिर ट्रस्ट, खैरागढ़ राजपरिवार के सदस्य भवानी बहादुर सिंह और गोंडवाना समाज के प्रतिनिधियों ने शांतिपूर्ण आयोजन पर सहमति जताई है। इस बार पंचमी भेंट के दौरान मुर्गे की बलि नहीं दी जाएगी।
गोंडवाना समाज ने आयोजन को लेकर व्यापक तैयारियां की हैं। समाज के मुताबिक, बस्तर से आंगादेव और डांग भी लाए जाएंगे। आयोजन में गोंडवाना समाज के साथ अन्य समाजों के लोगों के शामिल होने की भी बात कही गई है। प्रशासन कानून-व्यवस्था संभालेगा, जबकि मंदिर ट्रस्ट मंदिर परिसर की व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी निभाएगा।
पिछले साल पंचमी भेंट के दौरान क्यों हुआ था विवाद?
19 मार्च 2026 को चैत्र नवरात्रि की पंचमी के अवसर पर गोंडवाना समाज के लोग आंगादेव के साथ मां बम्लेश्वरी मंदिर पहुंचे थे। इस दौरान खैरागढ़ राजपरिवार के सदस्य भवानी बहादुर सिंह भी मौजूद थे। पूजा के दौरान गर्भगृह में प्रवेश को लेकर विवाद खड़ा हो गया था।
मंदिर ट्रस्ट की ओर से आरोप लगाया गया था कि भवानी बहादुर सिंह और उनके साथ आए लोगों ने दान पेटी पर चढ़कर गर्भगृह में जबरन प्रवेश किया। इस मामले में ट्रस्ट अध्यक्ष मनोज अग्रवाल ने पुलिस से शिकायत की थी।
घटना के बाद मंदिर की पूजा व्यवस्था, पारंपरिक पूजा पद्धति और अलग-अलग पक्षों की भूमिका को लेकर बहस शुरू हो गई थी। राजपरिवार की ओर से मंदिर में चली आ रही परंपराओं और परिवार की भूमिका का सम्मान किए जाने की बात कही गई, जबकि ट्रस्ट ने मंदिर की निर्धारित व्यवस्था का पालन जरूरी बताया।
मंदिर ट्रस्ट में सभी समाजों को प्रतिनिधित्व देने की मांग
राजपरिवार के सदस्य भवानी बहादुर सिंह का कहना है कि पिछले साल उन्हें मंदिर ट्रस्ट की ओर से नहीं, बल्कि आदिवासी समाज के लोगों ने आमंत्रित किया था। उन्होंने बताया कि उस समय समाज के लोगों के साथ पहले से विवाद चल रहा था।
भवानी बहादुर सिंह के मुताबिक, जब वे पूजा के लिए पहुंचे तो ट्रस्ट का कोई सदस्य वहां नहीं आया। उनका कहना है कि मां बम्लेश्वरी मंदिर में ठाकुर, ब्राह्मण, क्षत्रिय, आदिवासी सहित विभिन्न समाजों के लोग आस्था रखते हैं। ऐसे में मंदिर ट्रस्ट में भी सभी समाजों को प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।
राजपरिवार ने पूजा परंपरा में सम्मान कम होने का लगाया आरोप
भवानी बहादुर सिंह ने पूजा पद्धति में बदलाव को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि पहले राजपरिवार के सदस्य मंदिर में पूजा करते थे और आदिवासी समाज के लोग आंगादेव के साथ पंचमी भेंट करने आते थे।
उन्होंने कहा कि मंदिर में आज भी बैगा परिवार के लोग पूजा करते हैं, लेकिन उनके मुताबिक पारंपरिक व्यवस्था में राजपरिवार के राजबैगा की भी भूमिका रही है। वे चाहते हैं कि मां बम्लेश्वरी की पूजा के दौरान उनके परिवार को पहले की तरह सम्मान मिले।
यह राजपरिवार का पक्ष है। मंदिर ट्रस्ट की ओर से मंदिर की निर्धारित व्यवस्था और पूजा के नियमों के पालन पर जोर दिया जाता रहा है।
मुर्गे की बलि को लेकर भी हो चुका है विवाद
मां बम्लेश्वरी मंदिर में पूजा पद्धति और बलि को लेकर भी अलग-अलग समय पर विवाद सामने आए हैं। मई 2026 में मंदिर की पहाड़ी पर मुर्गे की बलि दिए जाने के मामले ने तूल पकड़ा था। इस घटना को लेकर मंदिर ट्रस्ट की ओर से आपत्ति और पुलिस शिकायत की खबरें सामने आई थीं।
हालांकि, मुर्गे की बलि का यह मामला पिछले साल पंचमी भेंट के दौरान गर्भगृह में प्रवेश को लेकर हुए विवाद से अलग था। दोनों घटनाओं में पूजा परंपराओं और मंदिर की व्यवस्था को लेकर मतभेद सामने आए थे।
ट्रस्ट का कहना है कि मंदिर में पूजा निर्धारित व्यवस्था के अनुसार होती है और बलि की अनुमति नहीं है। दूसरी ओर, पारंपरिक पूजा पद्धतियों से जुड़े लोग अपनी धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं के सम्मान की मांग करते रहे हैं।
इस बार पंचमी भेंट से पहले हुई बैठक में सभी पक्षों ने शांतिपूर्ण आयोजन पर सहमति दी है। इस बार मुर्गे की बलि नहीं होगी।
क्या होते हैं आंगादेव और क्यों होती है पंचमी भेंट?
गोंडवाना समाज की धार्मिक मान्यताओं में आंगादेव का विशेष महत्व है। समाज की पारंपरिक मान्यता के अनुसार, आंगादेव किसी व्यक्ति के शरीर में अवतरित होते हैं। उन्हें नारियल और सुपारी देकर आमंत्रित करने की परंपरा बताई जाती है। इसके बाद आंगादेव के साथ पूजा और भेंट की जाती है।
यह परंपरा समाज की धार्मिक आस्था और पूर्वजों से चली आ रही मान्यताओं से जुड़ी हुई है। गोंडवाना महासभा के संचालक रमेश उइके के मुताबिक, पंचमी भेंट उनके पूर्वजों के समय से होती आ रही है।
उन्होंने बताया कि पहले समाज के चार-पांच लोग मंदिर में भेंट करके लौट आते थे और आयोजन बड़े स्तर पर नहीं होता था। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में पंचमी भेंट का आयोजन व्यापक स्तर पर होने लगा है।
रमेश उइके के अनुसार, इस बार भी समाज ने विशेष तैयारियां की हैं। बस्तर से आंगादेव और डांग लाए जाएंगे। आयोजन में गोंडवाना समाज के अलावा अन्य समाजों के लोगों के शामिल होने की भी बात कही गई है।
ट्रस्ट अध्यक्ष बोले- पूजा करने आएंगे तो स्वागत करेंगे
मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष मनोज अग्रवाल ने कहा कि मंदिर में वैदिक पूजा के साथ बैगा पद्धति से भी पूजा होती है। उनके मुताबिक, ट्रस्ट पिछले दो-तीन वर्षों से पंचमी भेंट के आयोजन की व्यवस्था देख रहा है।
मनोज अग्रवाल ने बताया कि इस बार प्रशासन की मौजूदगी में आयोजन की व्यवस्था तय की गई है। कानून-व्यवस्था संभालने की जिम्मेदारी प्रशासन की होगी, जबकि मंदिर की व्यवस्था ट्रस्ट देखेगा।
उन्होंने कहा, “अच्छे मन से वे पूजा करने आते हैं तो उनका स्वागत है। ट्रस्ट की तरफ से माता के किसी भी भक्त का स्वागत किया जाएगा। राजपरिवार के सदस्य भी पंचमी भेंट में उनके साथ आते हैं तो उनका भी स्वागत है।”
ट्रस्ट का कहना है कि मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं का स्वागत करना और मंदिर की व्यवस्था बनाए रखना उसकी जिम्मेदारी है। वहीं, राजपरिवार की ओर से पुरानी पूजा परंपराओं और ट्रस्ट में सभी समाजों की भागीदारी की मांग उठाई जा रही है।
इस बार पंचमी भेंट को लेकर क्या बनी सहमति?
पंचमी भेंट से पहले जिला प्रशासन ने मंदिर ट्रस्ट, राजपरिवार के सदस्य भवानी बहादुर सिंह और गोंडवाना समाज के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की। बैठक में सभी पक्षों ने बिना विवाद के आयोजन कराने पर सहमति जताई।
- प्रशासन: कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालेगा।
- मंदिर ट्रस्ट: मंदिर परिसर और पूजा संबंधी व्यवस्थाएं देखेगा।
- गोंडवाना समाज: आंगादेव के साथ पारंपरिक पंचमी भेंट में शामिल होगा।
- बलि पर सहमति: इस बार मुर्गे की बलि नहीं दी जाएगी।
पिछले साल गर्भगृह में प्रवेश को लेकर हुआ विवाद, बलि का अलग मामला और पूजा पद्धति पर उठे सवाल इस बार के आयोजन की पृष्ठभूमि हैं। अब सभी पक्षों की सहमति के बीच पंचमी भेंट को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराना प्रशासन और मंदिर प्रबंधन की प्राथमिकता है।