प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 76वें जन्मदिन के अवसर पर उनके वर्ष 2014 से अब तक के कार्यकाल में लिए गए कई बड़े नीतिगत और राजनीतिक फैसलों की चर्चा हो रही है। इन फैसलों का असर देश की राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक व्यवस्था, सुरक्षा नीति और न्याय प्रणाली पर पड़ा है।
इनमें से कुछ निर्णयों को सरकार और उसके समर्थक बड़े सुधार के रूप में देखते हैं, जबकि विपक्ष और कई विशेषज्ञों ने इनके प्रभाव, प्रक्रिया और क्रियान्वयन को लेकर सवाल भी उठाए हैं। आइए जानते हैं ऐसे 12 प्रमुख फैसलों के बारे में।
1. जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 और 35A हटाना
5 अगस्त 2019 को केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को प्रभावहीन करने का फैसला लिया। इसके साथ ही जम्मू-कश्मीर राज्य का पुनर्गठन कर दो केंद्रशासित प्रदेश—जम्मू-कश्मीर और लद्दाख बनाए गए।
सरकार ने इस कदम को राष्ट्रीय एकीकरण और सभी केंद्रीय कानूनों के समान लागू होने की दिशा में महत्वपूर्ण निर्णय बताया। इस फैसले को लेकर राजनीतिक और कानूनी बहस भी हुई। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने दिसंबर 2023 में केंद्र के फैसले को बरकरार रखा।
2. नागरिकता संशोधन कानून यानी CAA
नागरिकता संशोधन अधिनियम संसद से पारित होने के बाद 2019 में कानून बना। इसके तहत पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से धार्मिक उत्पीड़न का सामना कर भारत आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदायों के कुछ लोगों के लिए भारतीय नागरिकता प्राप्त करने का रास्ता आसान किया गया।
केंद्र सरकार ने इसके नियम मार्च 2024 में अधिसूचित किए। सरकार इसे पड़ोसी देशों से आए प्रताड़ित अल्पसंख्यकों को राहत देने वाला कानून बताती है। वहीं, विपक्ष और आलोचकों ने कानून में धर्म आधारित प्रावधानों को लेकर आपत्ति जताई है।
3. GST से एकीकृत कर व्यवस्था
1 जुलाई 2017 को वस्तु एवं सेवा कर यानी GST लागू किया गया। इसका उद्देश्य केंद्र और राज्यों के कई अप्रत्यक्ष करों को एक व्यवस्था के तहत लाना था।
GST को ‘एक राष्ट्र, एक कर’ की दिशा में बड़ा कदम माना गया। इससे देशभर में एक साझा बाजार बनाने की कोशिश हुई। हालांकि, कारोबारियों ने शुरुआती दौर में पोर्टल, रिटर्न और अनुपालन से जुड़ी परेशानियां भी उठाईं।
4. नोटबंदी और डिजिटल भुगतान को बढ़ावा
8 नवंबर 2016 को केंद्र सरकार ने 500 और 1,000 रुपए के पुराने नोटों को चलन से बाहर करने की घोषणा की। सरकार ने इस फैसले का उद्देश्य काले धन, नकली नोट और आतंकवाद की फंडिंग पर रोक लगाना बताया था।
नोटबंदी के बाद डिजिटल भुगतान, मोबाइल बैंकिंग और UPI के इस्तेमाल में तेजी आई। हालांकि, इस फैसले से नकदी पर निर्भर छोटे कारोबार, मजदूरों और आम लोगों को तत्काल परेशानियों का सामना करना पड़ा। नोटबंदी के आर्थिक प्रभाव को लेकर आज भी अलग-अलग मत हैं।
5. तीन तलाक के खिलाफ कानून
मोदी सरकार के कार्यकाल में मुस्लिम महिलाओं को एक बार में तीन तलाक यानी तलाक-ए-बिद्दत से कानूनी सुरक्षा देने के लिए कानून बनाया गया।
‘मुस्लिम महिला विवाह अधिकार संरक्षण अधिनियम’ के तहत तत्काल तीन तलाक को अवैध और दंडनीय बनाया गया। सरकार ने इसे मुस्लिम महिलाओं के अधिकार और सम्मान से जुड़ा कदम बताया, जबकि कानून के कुछ प्रावधानों को लेकर राजनीतिक बहस भी हुई।
6. अयोध्या में राम मंदिर निर्माण
अयोध्या भूमि विवाद पर नवंबर 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए विवादित भूमि पर राम मंदिर निर्माण का रास्ता साफ किया। इसके बाद केंद्र सरकार ने ‘श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र’ ट्रस्ट का गठन किया।
22 जनवरी 2024 को अयोध्या में राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम आयोजित हुआ। यह आयोजन धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना गया। मंदिर निर्माण को लेकर लंबे समय से चल रही राजनीतिक और सामाजिक बहस का यह एक प्रमुख पड़ाव रहा।
7. नारी शक्ति वंदन अधिनियम
सितंबर 2023 में संसद के विशेष सत्र के दौरान महिला आरक्षण से संबंधित ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ पारित किया गया।
इस कानून में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया है। इसका क्रियान्वयन परिसीमन और जनगणना से जुड़ी संवैधानिक प्रक्रिया के बाद होना है। सरकार इसे राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने वाला महत्वपूर्ण कदम बताती है।
8. अग्निपथ योजना
2022 में केंद्र सरकार ने सेना में भर्ती के लिए अग्निपथ योजना शुरू की। इसके तहत युवाओं को चार वर्ष की अवधि के लिए अग्निवीर के रूप में थल सेना, नौसेना और वायुसेना में सेवा का अवसर दिया जाता है।
सरकार के अनुसार, योजना का उद्देश्य सशस्त्र बलों की औसत आयु कम करना, युवाओं को सैन्य प्रशिक्षण देना और सेना को अधिक तकनीकी रूप से सक्षम बनाना है। दूसरी ओर, भर्ती की अवधि, स्थायी नियुक्ति और भविष्य की रोजगार सुरक्षा को लेकर युवाओं और विपक्ष की ओर से सवाल उठाए गए हैं।
9. प्रधानमंत्री जन धन योजना
2014 में प्रधानमंत्री जन धन योजना की शुरुआत की गई। इसका उद्देश्य ऐसे लोगों को बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ना था, जिनके पास पहले बैंक खाते नहीं थे।
इस योजना के माध्यम से बड़ी संख्या में बैंक खाते खोले गए। जन धन खातों को आधार और मोबाइल से जोड़कर डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर यानी DBT की व्यवस्था को मजबूत किया गया। इससे सरकारी योजनाओं की राशि सीधे लाभार्थियों तक पहुंचाने की व्यवस्था को बढ़ावा मिला।
10. आयुष्मान भारत स्वास्थ्य योजना
2018 में आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना शुरू की गई। इसके तहत पात्र परिवारों को प्रति वर्ष 5 लाख रुपए तक के स्वास्थ्य कवर का प्रावधान किया गया।
योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को गंभीर बीमारियों के इलाज के खर्च से राहत देना है। पात्र लाभार्थियों को सूचीबद्ध अस्पतालों में कैशलेस इलाज की सुविधा दी जाती है। हालांकि, अस्पतालों की उपलब्धता, कवरेज और दावों के भुगतान को लेकर अलग-अलग राज्यों में चुनौतियां सामने आती रही हैं।
11. सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक
2016 में उरी आतंकी हमले के बाद भारत ने नियंत्रण रेखा पार कर सर्जिकल स्ट्राइक किए जाने की घोषणा की। इसके बाद फरवरी 2019 में पुलवामा आतंकी हमले के बाद बालाकोट एयर स्ट्राइक की गई।
सरकार ने इन कार्रवाइयों को आतंकवाद के खिलाफ भारत की बदली हुई सुरक्षा नीति का संकेत बताया। इन अभियानों के बाद भारत की सैन्य प्रतिक्रिया और सीमा पार कार्रवाई को लेकर राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा हुई।
12. तीन नए आपराधिक कानून
1 जुलाई 2024 से देश में तीन नए आपराधिक कानून लागू किए गए—
- भारतीय न्याय संहिता यानी BNS
- भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता यानी BNSS
- भारतीय साक्ष्य अधिनियम यानी BSA
इन कानूनों ने भारतीय दंड संहिता, दंड प्रक्रिया संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम की जगह ली। सरकार के अनुसार, नए कानूनों में डिजिटल अपराध, संगठित अपराध, महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराध तथा पीड़ित-केंद्रित न्याय व्यवस्था पर जोर दिया गया है।
सरकार ने इन्हें औपनिवेशिक दौर की कानूनी व्यवस्था में बदलाव के रूप में पेश किया है। वहीं, विपक्ष और कानूनी विशेषज्ञों ने कानूनों के कुछ प्रावधानों, पुलिस शक्तियों और इनके क्रियान्वयन को लेकर सवाल उठाए हैं। <Cite refs={[“turn0search0″,”turn0search1″,”turn0search5”]} />
निष्कर्ष
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में अनुच्छेद 370, GST, नोटबंदी, CAA, तीन तलाक कानून, महिला आरक्षण, अग्निपथ योजना, जन धन, आयुष्मान भारत और नए आपराधिक कानून जैसे कई बड़े निर्णय लिए गए।
इन फैसलों को लेकर सरकार, विपक्ष और विशेषज्ञों के दृष्टिकोण अलग-अलग रहे हैं। इनका वास्तविक प्रभाव समझने के लिए इनके उद्देश्य, लागू होने की प्रक्रिया, उपलब्ध आंकड़ों और आम लोगों पर पड़े असर का अलग-अलग मूल्यांकन करना जरूरी है।