राजिम। चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ के प्रभाव से राजिम अंचल में पिछले दो दिनों से हो रही बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। पकने की ओर बढ़ रही धान की फसल खेतों में भरे पानी के बीच डूब गई है। कई गांवों में जलभराव के हालात हैं। ऐसे में किसानों को अब अपनी महीनों की मेहनत और फसल की सुरक्षा की चिंता सताने लगी है।
कई गांवों में खेत जलमग्न, धान की फसल पर संकट
राजिम और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में लगातार बारिश का असर साफ दिखाई दे रहा है। सिंधौरी, श्यामनगर, बरोंडा, सुरसाबांधा, तर्रा, कुरुसकेरा, जेंजरा, मुड़तराई, रवेली, कौंदकेरा, पिपरछेड़ी, बेलटुकरी, भैंसातरा, पथर्रा, पितईबंद, बकली, रॉवड़, पोखरा, किरवई और कुम्ही कोमा सहित कई गांवों में खेत पानी से लबालब हैं।
धान की फसल तैयार होने के इस अहम समय में खेतों में पानी भरने से किसानों की परेशानी बढ़ गई है। यदि बारिश का दौर जारी रहा और पानी की निकासी नहीं हो पाई, तो फसल को नुकसान पहुंचने की आशंका है।
बीज, खाद और मजदूरी पर खर्च, अब नुकसान का डर
किसानों के लिए धान की फसल केवल खेती नहीं, बल्कि सालभर की आजीविका का प्रमुख आधार है। फसल तैयार करने के लिए उन्होंने बीज, खाद, मजदूरी और अन्य कृषि कार्यों पर खर्च किया है। महीनों की मेहनत के बाद जब फसल पकने की ओर बढ़ रही है, तब बारिश ने उनकी उम्मीदों पर संकट खड़ा कर दिया है।
खेतों में भरे पानी को देखकर किसान मौसम साफ होने की आस लगाए बैठे हैं। उन्हें डर है कि यदि खेत लंबे समय तक पानी में डूबे रहे, तो मेहनत और लागत दोनों पर पानी फिर सकता है।
अब प्रशासनिक सर्वे और मुआवजे की उम्मीद
बारिश से फसल प्रभावित होने के बाद किसानों की नजरें अब प्रशासन पर टिकी हैं। प्रभावित गांवों में खेतों का निरीक्षण कर फसल नुकसान का आकलन करने की मांग उठ रही है। किसानों को उम्मीद है कि नुकसान की वास्तविक स्थिति सामने आने पर प्रशासन आवश्यक राहत उपलब्ध कराने की दिशा में कदम उठाएगा।
बारिश थमने के बाद भी खेतों में जलभराव और धान की फसल की स्थिति पर नजर रखना जरूरी होगा। नुकसान का आकलन समय पर होने से प्रभावित किसानों की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी और राहत की प्रक्रिया आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।
आसमान की ओर टिकी अन्नदाताओं की निगाहें
फिलहाल राजिम अंचल के किसानों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि उनकी महीनों की मेहनत से तैयार हो रही धान की फसल कितनी सुरक्षित बच पाएगी। जिस बारिश से कभी खेती को सहारा मिलता है, वही अब किसानों के लिए चिंता का कारण बन गई है।
खेतों में भरे पानी के बीच किसान मौसम खुलने और खेतों से पानी निकलने की उम्मीद कर रहे हैं। अब देखना होगा कि बारिश से प्रभावित खेतों की स्थिति क्या रहती है और प्रशासन नुकसान के आकलन व राहत के लिए क्या कदम उठाता है।