Vimal Elaichi Ad Controversy: विमल इलायची के विज्ञापन को लेकर बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ की मुश्किलें फिलहाल महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) के स्तर पर आगे बढ़ गई हैं। तीनों कलाकारों ने FDA की ओर से भेजे गए नोटिस का जवाब विभाग को सौंप दिया है।
महाराष्ट्र FDA कमिश्नर तुकाराम मुंढे ने इसकी जानकारी देते हुए बताया कि तीनों अभिनेताओं के जवाब मिल चुके हैं। इनमें से दो कलाकारों ने व्यक्तिगत सुनवाई की मांग की थी और उनकी सुनवाई भी पूरी हो चुकी है। हालांकि, FDA ने यह स्पष्ट नहीं किया कि सुनवाई का अनुरोध करने वाले दोनों अभिनेता कौन थे।
जवाब मिलने के बाद अब FDA की अगली प्रक्रिया
FDA कमिश्नर के मुताबिक, तीनों अभिनेताओं से जवाब मिलने के बाद विभाग मामले की आगे की प्रक्रिया पूरी करेगा।
इससे पहले FDA की ओर से कहा गया था कि तीनों में से एक अभिनेता ने तय समय तक नोटिस का जवाब नहीं दिया था। उस समय विभाग ने जवाब नहीं मिलने की स्थिति में आगे की कार्रवाई की बात कही थी।
अब तीनों के जवाब रिकॉर्ड में आने के बाद FDA उनके पक्ष और उपलब्ध दस्तावेजों की समीक्षा करेगा।
क्या है विमल इलायची विज्ञापन विवाद?
महाराष्ट्र FDA ने 11 अगस्त 2026 को शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को विमल इलायची के विज्ञापन में शामिल होने को लेकर नोटिस जारी किया था।
विभाग की आपत्ति केवल इलायची उत्पाद तक सीमित नहीं है। FDA ने विज्ञापन में इस्तेमाल होने वाले विमल ब्रांड की पहचान को लेकर सवाल उठाए हैं।
विभाग का कहना है कि विज्ञापन के जरिए विमल पान मसाला का अप्रत्यक्ष प्रचार यानी सरोगेट विज्ञापन किए जाने का सवाल उठता है। महाराष्ट्र में पान मसाला से जुड़े कुछ उत्पादों पर प्रतिबंध लागू है।
एक्टर्स से क्या जानकारी मांगी गई?
FDA ने तीनों कलाकारों से विज्ञापन में उनकी भूमिका को लेकर स्पष्टीकरण मांगा था। इसके साथ ही विज्ञापन और कैंपेन से संबंधित जरूरी दस्तावेज तथा अन्य जानकारी उपलब्ध कराने को कहा गया था।
नोटिस में यह भी पूछा गया था कि विज्ञापन का हिस्सा बनने से पहले कलाकारों ने संबंधित उत्पाद और कैंपेन के बारे में किस तरह की जानकारी या जांच-पड़ताल की थी।
भ्रामक विज्ञापन को लेकर कानून क्या कहता है?
FDA के नोटिस में Food Safety and Standards Act, 2006 की संबंधित धाराओं का उल्लेख किया गया था।
इस कानून की धारा 24 भ्रामक खाद्य विज्ञापनों से संबंधित प्रावधानों से जुड़ी है। वहीं धारा 53 के तहत भ्रामक खाद्य विज्ञापन के प्रकाशन या प्रचार में शामिल होने पर जुर्माने का प्रावधान है, जो कुछ परिस्थितियों में 10 लाख रुपये तक हो सकता है।
FDA कमिश्नर की ओर से पहले यह भी कहा गया था कि किसी उत्पाद का प्रचार करने वाले व्यक्ति की जिम्मेदारी होती है कि वह विज्ञापन में शामिल होने से पहले उत्पाद और उसके दावों के बारे में आवश्यक जानकारी हासिल करे।
मामला दिल्ली हाईकोर्ट भी पहुंचा था
विमल इलायची विज्ञापन से जुड़ा विवाद सितंबर में दिल्ली हाईकोर्ट तक भी पहुंचा था। नोटिस को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई से अदालत ने इनकार कर दिया था।
अदालत ने माना था कि मामले से जुड़े विवाद के लिए महाराष्ट्र की अदालतें अधिक उपयुक्त मंच हैं।
अब तीनों अभिनेताओं के जवाब FDA को मिलने के बाद विभाग दस्तावेजों और उनके स्पष्टीकरण की समीक्षा करेगा। इसके बाद ही इस मामले में आगे की कार्रवाई या निर्णय की स्थिति स्पष्ट होगी।