Raipur News: वर्क फ्रॉम होम यानी घर से काम करने की सुविधा ने आईटी सेक्टर के कर्मचारियों को रोजाना ऑफिस आने-जाने की परेशानी से राहत दी है। लेकिन इसके साथ अकेलापन, मानसिक थकान और कामकाज व निजी जिंदगी के बीच संतुलन बनाने जैसी चुनौतियां भी सामने आई हैं। रायपुर में 400 से अधिक आईटी कर्मचारियों पर किए गए एक शोध में रिमोट वर्किंग के मानसिक स्वास्थ्य, सामाजिक जीवन और वर्क-लाइफ बैलेंस पर पड़ने वाले प्रभावों का विश्लेषण किया गया है।
डॉ. पूर्ति नागेश द्वारा किए गए इस शोध में महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य, घरेलू जिम्मेदारियों और कर्मचारियों के लिए हाइब्रिड वर्किंग मॉडल की उपयोगिता जैसे अहम पहलुओं पर ध्यान दिया गया है।
महिलाओं में डिप्रेशन के स्तर में 20% तक की गिरावट
शोध के मुताबिक, रोजाना ऑफिस आने-जाने के तनाव और समय की बचत होने से महिलाओं में डिप्रेशन के स्तर में लगभग 20% तक की कमी दर्ज की गई।
हालांकि, घर से काम करने वाली महिलाओं के सामने दूसरी चुनौतियां भी हैं। नौकरी के टारगेट पूरे करने के साथ घरेलू कामकाज, बच्चों की देखभाल और परिवार की जिम्मेदारियां निभाने का दबाव उनकी मानसिक सेहत को प्रभावित कर सकता है।
इस दोहरी जिम्मेदारी के कारण कुछ महिलाओं में मानसिक थकान और भावनात्मक तनाव बढ़ने की समस्या भी देखी गई। ऐसे में परिवार का सहयोग, काम के दौरान मिलने वाला आराम और अपने लिए समय निकालना महत्वपूर्ण हो जाता है।
अकेलापन बढ़ा, काम और निजी जिंदगी के बीच की सीमा धुंधली
ऑफिस में सहकर्मियों के साथ चाय या लंच के दौरान होने वाली बातचीत और आमने-सामने का संपर्क कर्मचारियों के सामाजिक जीवन का अहम हिस्सा होता है। घर से काम करने पर ऐसे अवसर कम हो सकते हैं, जिससे कुछ कर्मचारियों में अकेलेपन की भावना बढ़ती है।
इसके अलावा, घर और ऑफिस के बीच स्पष्ट अंतर नहीं होने से कई कर्मचारियों के काम के घंटे बढ़ सकते हैं। लगातार ऑनलाइन रहने, समय पर काम खत्म नहीं कर पाने और निजी जीवन के लिए पर्याप्त समय न मिलने से मानसिक थकान बढ़ने का खतरा रहता है।
शोध में सामाजिक और भावनात्मक जुड़ाव को बेहतर मानसिक स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण बताया गया है।
हाइब्रिड वर्किंग मॉडल क्यों माना जा रहा बेहतर विकल्प?
शोध के अनुसार, पूरी तरह ऑफिस या पूरी तरह घर से काम करने के बजाय हाइब्रिड मॉडल कई कर्मचारियों के लिए संतुलित विकल्प हो सकता है। इस व्यवस्था में कर्मचारी कुछ दिन ऑफिस और कुछ दिन घर से काम करते हैं।
शोध में शामिल लगभग 33% कर्मचारियों ने हाइब्रिड मॉडल को बेहतर वर्क-लाइफ बैलेंस के लिए उपयोगी माना।
इस मॉडल के प्रमुख फायदे हैं:
- समय की बचत: रोजाना ऑफिस आने-जाने की जरूरत कम होती है।
- सहकर्मियों से संपर्क: ऑफिस के दिनों में टीम के साथ प्रत्यक्ष बातचीत का अवसर मिलता है।
- काम में लचीलापन: घर से काम करने के दिनों में निजी जिम्मेदारियों को बेहतर तरीके से संभालने में मदद मिल सकती है।
- बेहतर वर्क-लाइफ बैलेंस: काम और परिवार के लिए समय तय करना आसान हो सकता है।
हालांकि, हाइब्रिड मॉडल की सफलता कंपनी की नीतियों, काम की प्रकृति और कर्मचारियों की व्यक्तिगत परिस्थितियों पर भी निर्भर करती है।
मानसिक स्वास्थ्य बेहतर रखने के लिए क्या करें?
घर से काम करते समय मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य का ध्यान रखने के लिए कुछ आदतें उपयोगी हो सकती हैं।
- काम के घंटे तय करें: ऑफिस का समय खत्म होने के बाद अनावश्यक काम से बचें।
- नियमित ब्रेक लें: लंबे समय तक लगातार स्क्रीन देखने के बजाय बीच-बीच में आराम करें।
- शारीरिक गतिविधि बढ़ाएं: रोजाना वॉक या व्यायाम के लिए समय निकालें।
- सामाजिक संपर्क बनाए रखें: सहकर्मियों, दोस्तों और परिवार के साथ बातचीत करते रहें।
- निजी समय को प्राथमिकता दें: काम के साथ आराम, नींद और परिवार के लिए भी पर्याप्त समय रखें।
निष्कर्ष
रायपुर में आईटी कर्मचारियों पर किए गए इस शोध से संकेत मिलता है कि वर्क फ्रॉम होम के फायदे और चुनौतियां दोनों हैं। जहां यात्रा का तनाव कम होने से कुछ कर्मचारियों, खासकर महिलाओं को राहत मिल सकती है, वहीं अकेलापन और घरेलू जिम्मेदारियों का दबाव मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है।
हाइब्रिड वर्किंग मॉडल कई कर्मचारियों के लिए उपयोगी विकल्प बन सकता है, लेकिन किसी भी व्यवस्था को अपनाते समय कर्मचारियों की जरूरतों और मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना जरूरी है।
नोट: शोध के नमूने, पद्धति और निष्कर्षों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है। डिप्रेशन में 20% कमी और हाइब्रिड मॉडल को 33% कर्मचारियों की पसंद बताए जाने वाले आंकड़ों को मूल शोध रिपोर्ट से सत्यापित करना उचित होगा।