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मेहुल चोकसी को भारत लाने की तैयारी तेज: 15 सितंबर से बेल्जियम कोर्ट में सुनवाई, सबूत न पेश कर पाए तो मिल सकती है रिहाई

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पंजाब नेशनल बैंक के ₹13,850 करोड़ घोटाले के मुख्य आरोपी और भगोड़े कारोबारी मेहुल चोकसी को भारत प्रत्यर्पित कराने की प्रक्रिया अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। 15 सितंबर से बेल्जियम की अदालत में इस मामले पर सुनवाई शुरू होगी। भारत सरकार ने बेल्जियम प्रशासन को आश्वासन दिया है कि प्रत्यर्पण सफल होने पर चोकसी को मुंबई की आर्थर रोड जेल की बैरक नंबर-12 में रखा जाएगा।

केंद्र ने अपने पत्र में कहा है कि जेल में उसे सभी मानवीय सुविधाएं दी जाएंगी। उसे विशेष आहार, मेडिकल केयर, व्यायाम और मनोरंजन जैसी 14 से अधिक सुविधाओं का लाभ मिलेगा।


आर्थर रोड जेल की व्यवस्था

गृह मंत्रालय ने बताया कि बैरक नंबर-12 की कोठरियों में वेंटिलेटर, ग्रिल वाली खिड़कियां और पंखे लगे हैं। मुंबई के मौसम को देखते हुए यहां एयर कंडीशनर की आवश्यकता नहीं होती। हर कोठरी में अटैच्ड टॉयलेट-बाथरूम है और साफ-सफाई का विशेष ध्यान दिया जाता है।
जेल में डॉक्टर, नर्स और मेडिकल ऑफिसर्स की 24 घंटे की टीम मौजूद रहती है। यहां 20 बेड वाला हॉस्पिटल और ICU की सुविधा भी उपलब्ध है। जरूरत पड़ने पर कैदियों को JJ हॉस्पिटल में शिफ्ट किया जाता है।


बेल्जियम में गिरफ्तारी और स्विट्जरलैंड भागने की योजना

मेहुल चोकसी को 12 अप्रैल को बेल्जियम में अरेस्ट किया गया था। सूत्रों का कहना है कि वह स्विट्जरलैंड भागने की तैयारी कर रहा था। उसके पास दो गिरफ्तारी वारंट थे जिन्हें मुंबई की अदालत ने 2018 और 2021 में जारी किया था।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, चोकसी अपनी पत्नी प्रीति (बेल्जियम की नागरिक) के साथ वहीं रह रहा था। उसने 2023 में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बेल्जियम का ‘एफ रेजिडेंसी कार्ड’ हासिल किया था और अपनी भारतीय व एंटीगुआ की नागरिकता छिपाई थी।


पहले भी भाग चुका है कानून से

2017 में चोकसी ने एंटीगुआ-बारबूडा की नागरिकता ले ली थी और 2018 में भारत छोड़ दिया था। तब से वह खराब सेहत का हवाला देकर भारत आने से बचता रहा। उसकी कई संपत्तियां भारत में जब्त की जा चुकी हैं।
2021 में चोकसी को डोमिनिका में गिरफ्तार किया गया था और 51 दिन जेल में रहना पड़ा था। बाद में उसे एंटीगुआ लौटा दिया गया। डोमिनिका जेल में रहते हुए उसने खुद पर हमले के आरोप भी लगाए थे।


अब देखने वाली बात यह होगी कि 15 सितंबर से शुरू हो रही बेल्जियम कोर्ट की कार्यवाही में CBI और विदेश मंत्रालय चोकसी के खिलाफ ठोस सबूत पेश कर पाते हैं या नहीं। अगर भारत अपने पक्ष को मज़बूती से साबित नहीं कर पाया, तो चोकसी को रिहाई का रास्ता मिल सकता है।

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