छत्तीसगढ़ और देश में नक्सलियों के केंद्रीय कमेटी ने सरकार के सामने सरेंडर करने और हथियार छोड़ने की इच्छा जताई है। CPI (माओवादी) ने प्रेस नोट जारी कर कहा कि फिलहाल वे हथियारबंद संघर्ष को अस्थायी रूप से रोकने और शांति वार्ता के लिए तैयार हैं। संगठन ने यह भी कहा कि सरकार से ईमानदार और गंभीर पहल की उम्मीद है।
पार्टी की शांति पहल की वजह
पार्टी ने बताया कि 2024 से चल रहे अभियान में पुलिस और सुरक्षाबलों के बीच मुठभेड़ें हुई हैं, जिसमें दोनों ओर से नुकसान हुआ। इसी कारण उन्होंने यह निर्णय लिया कि सरकार से एक महीने तक संवाद की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाए और कैद माओवादी नेताओं को वार्ता में शामिल होने का मौका दिया जाए।
नक्सली लीडर अभय ने प्रेस नोट में लिखा कि अगर सरकार सचमुच वार्ता चाहती है, तो जेल में बंद साथियों से विचार-विमर्श की अनुमति दी जाए और इस दौरान संगठन पर पुलिस दबाव न डाला जाए।
सरकार की प्रतिक्रिया
छत्तीसगढ़ के गृह मंत्री विजय शर्मा ने कहा कि नक्सलियों के लेटर की जांच की जाएगी। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री सीएम साय इस पर निर्णय लेंगे। बस्तर के IG सुंदरराज पी ने कहा कि फिलहाल पर्चे की जांच चल रही है और स्पष्ट होने के बाद ही प्रतिक्रिया दी जाएगी।
वार्ता का तरीका
अभय ने कहा कि सरकार से वीडियो कॉल के जरिए विचार-विमर्श करने के लिए भी वे तैयार हैं। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि एक माह के लिए अभियान को रोकने की आवश्यकता है ताकि शांति वार्ता संभव हो सके।
पिछले ऑपरेशन और एनकाउंटर
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11 सितंबर 2025: गरियाबंद मुठभेड़ में 10 नक्सली मारे गए, जिनमें 1.80 करोड़ के इनामी बालाकृष्ण शामिल थे।
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21 मई 2025: 27 नक्सली मारे गए, जिनमें 1.5 करोड़ का इनामी बसवा राजू भी शामिल था।
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कर्रेगुट्टा ऑपरेशन: 31 नक्सलियों को 24 दिनों में मार गिराया गया।
इतिहास में बड़े शहीद
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2007: रानी बोदली में मुठभेड़ में 55 जवान शहीद।
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2010: ताड़मेटला और चिंगावरम घटनाओं में 171 जवान शहीद।
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पिछले 25 साल: बस्तर में 3366 से ज्यादा मुठभेड़ें, 1324 जवान शहीद और 1510 नक्सली मारे गए।
सरकार का डेडलाइन
24 अगस्त 2024 को गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था कि मार्च 2026 तक देश से नक्सलवाद खत्म कर दिया जाएगा। इसके बाद बस्तर में ऑपरेशन तेज हो गए हैं।