Nobel Peace Prize 2025 इस बार वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो को मिला है। इंजीनियर से राजनीति में आईं मचाडो लंबे समय से अपने देश में लोकतंत्र और मानवाधिकारों की लड़ाई लड़ रही हैं। दिलचस्प पहलू यह है कि उन्होंने साल की शुरुआत में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की एक सख्त नीति का बचाव किया था।
ट्रम्प की कठोर नीति का समर्थन
जनवरी 2025 में दिए एक इंटरव्यू में मचाडो ने ट्रम्प के उस फैसले की सराहना की थी, जिसमें उन्होंने अमेरिकी तेल कंपनियों को वेनेजुएला में काम करने की अनुमति रद्द कर दी थी। मचाडो के मुताबिक, यह कदम राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के “अपराधी शासन” को कमजोर करने के लिए बेहद ज़रूरी था।
उनका कहना था कि मादुरो सरकार अपनी पकड़ अवैध व्यापार, ड्रग्स, सोने और तेल की तस्करी से मिलने वाले पैसों पर बनाए रखती है। इसलिए इस आय को रोकना लोकतंत्र बहाली के लिए अहम है।
बाइडन की नीति पर कटाक्ष, ट्रम्प की तारीफ
मचाडो ने यह भी कहा था कि जब जो बाइडन ने अमेरिकी कंपनियों को वेनेजुएला से तेल आयात की सीमित इजाज़त दी, तो उस पैसे का कोई फ़ायदा जनता को नहीं मिला।
उन्होंने साफ कहा—
“ये पैसे पेंशन, स्कूल या अस्पतालों में नहीं जाते, बल्कि सीधे भ्रष्ट नेताओं की जेब में चले जाते हैं।”
विचारधारा में अंतर, लक्ष्य एक
हालाँकि, यह भी सच है कि मचाडो और ट्रम्प की राजनीतिक विचारधाराएँ एक जैसी नहीं हैं।
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मचाडो – लिबरल और सुधारवादी नेता, जो पारदर्शिता और मानवाधिकारों की हिमायती हैं।
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ट्रम्प – राष्ट्रवादी और पॉपुलिस्ट नेता, जो अक्सर बहुपक्षीय संस्थाओं से टकराते हैं।
इसके बावजूद दोनों का कॉमन गोल है – निकोलस मादुरो के शासन का अंत।
नोबेल सम्मान से बढ़ी वैश्विक पहचान
नोबेल शांति पुरस्कार मिलने के साथ ही मचाडो की अंतरराष्ट्रीय पहचान और भी मज़बूत हो गई है। उन्होंने 15 साल का एक लोकतांत्रिक और आर्थिक रोडमैप तैयार किया है, जिसमें वेनेजुएला को पारदर्शी शासन और वैश्विक अर्थव्यवस्था से जोड़ने की योजना शामिल है।
ट्रम्प की नीति पर उनका समर्थन यह सवाल भी उठाता है कि —
क्या लोकतंत्र के लिए संघर्ष में कभी-कभी कठोर फैसले भी जरूरी हो सकते हैं?