रिलायंस पावर के CFO अशोक पाल गिरफ्तार: फर्जी बैंक गारंटी और फंड ट्रांसफर घोटाले में बड़ी कार्रवाई

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प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अनिल अंबानी के रिलायंस ग्रुप से जुड़े एक बड़े वित्तीय घोटाले में कार्रवाई करते हुए रिलायंस पावर लिमिटेड के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर और CFO अशोक कुमार पाल को गिरफ्तार कर लिया है। उन पर लगभग ₹68.2 करोड़ की फर्जी बैंक गारंटी और इनवॉइसिंग में शामिल होने का आरोप है।

ईडी ने पाल से देर रात तक पूछताछ की और शुक्रवार (10 अक्टूबर) को उन्हें अरेस्ट कर लिया। शनिवार (11 अक्टूबर) को उन्हें दिल्ली की विशेष अदालत में पेश किया गया, जहां एजेंसी ने कस्टडी की मांग की। कोर्ट ने उन्हें दो दिन की रिमांड पर भेज दिया है। अब सोमवार (13 अक्टूबर) को दोबारा पेशी होगी।

ED के आरोप

ईडी का कहना है कि पाल ने रिलायंस होम फाइनेंस और रिलायंस कॉमर्शियल फाइनेंस के जरिए लगभग ₹12,524 करोड़ के लोन बांटे, जिनमें से ज्यादातर रकम रिलायंस ग्रुप की अन्य कंपनियों को डायवर्ट की गई। आरोप है कि इस दौरान पाल ने फर्जी दस्तावेजों को मंजूरी दी और पैसों का गलत तरीके से ट्रांसफर कराया।

अनिल अंबानी से भी पूछताछ

अगस्त 2025 में ईडी ने अनिल अंबानी को भी इस मामले में पूछताछ के लिए बुलाया था। इसके बाद मुंबई और अन्य जगहों पर करीब 35 ठिकानों पर छापेमारी की गई, जिनमें 50 कंपनियां और 25 लोग शामिल थे। इसी जांच से जुड़े सिलसिले में सीबीआई ने भी अगस्त में अंबानी के घर पर रेड डाली थी।

यस बैंक फ्रॉड केस से कनेक्शन

CBI ने सितंबर में यस बैंक घोटाले को लेकर अनिल अंबानी और यस बैंक के पूर्व CEO राणा कपूर समेत कई लोगों के खिलाफ चार्जशीट दायर की थी। आरोप है कि रिलायंस ग्रुप की कमजोर वित्तीय स्थिति वाली कंपनियों को बैंक फंड्स ट्रांसफर किए गए और बदले में राणा कपूर के परिवार की कंपनियों को फायदे पहुंचाए गए।

यह घोटाला पहली बार 2022 में तब सामने आया जब यस बैंक के चीफ विजिलेंस ऑफिसर ने CBI को शिकायत दी। जांच में पाया गया कि बैंक को करीब ₹2,796 करोड़ का नुकसान हुआ।

जांच में सामने आई गड़बड़ियां

ईडी और सीबीआई की रिपोर्ट में कई अनियमितताओं का खुलासा हुआ, जैसे—

  • बिना वेरिफिकेशन के कंपनियों को लोन देना।

  • एक ही एड्रेस और डायरेक्टर वाली शेल कंपनियों का इस्तेमाल।

  • लोन से जुड़े अधूरे या नकली दस्तावेज।

  • फर्जी कंपनियों में पैसे ट्रांसफर करना।

  • पुराने लोन चुकाने के लिए नए लोन देना (एवरग्रीनिंग)।

आगे की कार्रवाई

इस पूरे मामले में अब न सिर्फ ईडी और सीबीआई बल्कि सेबी, नेशनल हाउसिंग बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा और नेशनल फाइनेंशियल रिपोर्टिंग अथॉरिटी जैसी संस्थाएं भी जानकारी साझा कर रही हैं। फिलहाल पाल की गिरफ्तारी को इस केस की बड़ी कड़ी माना जा रहा है, और माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में जांच और भी कंपनियों और व्यक्तियों तक पहुंच सकती है।

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