अमेरिका और चीन के बीच चल रहे ट्रेड वॉर से भारतीय उद्योगों के लिए नए दरवाज़े खुल सकते हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने चीन से आने वाले उत्पादों पर 100% अतिरिक्त टैरिफ लगाने का ऐलान किया है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस फैसले से चीन का माल अमेरिका में और महंगा हो जाएगा, जबकि भारतीय उत्पाद तुलनात्मक रूप से सस्ते और आकर्षक दिखेंगे।
ट्रम्प का बड़ा ऐलान
ट्रम्प ने शुक्रवार को घोषणा की कि यह नया टैरिफ 1 नवंबर से लागू होगा। फिलहाल चीन से आने वाले सामानों पर 30% टैरिफ है, लेकिन अब इसमें 100% और जुड़ने से यह कुल 130% हो जाएगा। इसके अलावा ट्रम्प ने सॉफ्टवेयर निर्यात पर भी कुछ पाबंदियों की बात कही है।
दरअसल, चीन ने 9 अक्टूबर को रेयर अर्थ मटेरियल्स के एक्सपोर्ट पर सख्ती की थी, जिसके जवाब में अमेरिका ने यह कदम उठाया।
भारत के लिए सुनहरा मौका
विशेषज्ञों के अनुसार, भारतीय एक्सपोर्टर्स के लिए यह स्थिति बेहद फायदेमंद साबित हो सकती है। चीन के सामानों पर भारी टैरिफ लगने से अमेरिका अब वैकल्पिक स्रोतों की तलाश करेगा। भारत के प्रोडक्ट्स पर फिलहाल औसतन 50% टैरिफ है, जो चीन की तुलना में बहुत कम है। यही वजह है कि भारतीय टेक्सटाइल, फुटवियर, इलेक्ट्रॉनिक्स और खिलौनों जैसे सेक्टर्स को अमेरिकी मार्केट में हिस्सेदारी बढ़ाने का अवसर मिल सकता है।
फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशंस (FIEO) के अध्यक्ष एससी रालहन का मानना है कि भारत का निर्यात, जो फिलहाल 86 बिलियन डॉलर (लगभग 7.3 लाख करोड़ रुपये) है, आने वाले समय में और बढ़ सकता है।
किन सेक्टर्स को सबसे ज्यादा फायदा?
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टेक्सटाइल: अमेरिकी रिटेलर्स पहले से भारतीय सप्लायर्स से संपर्क कर रहे हैं।
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खिलौने: भारतीय खिलौना उद्योग के प्रतिनिधि मनु गुप्ता ने बताया कि टारगेट जैसे अमेरिकी स्टोर्स ने उनसे नए प्रोडक्ट्स के लिए बात की है।
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इलेक्ट्रॉनिक्स और फुटवियर: चीन के मुकाबले भारतीय प्रोडक्ट्स किफायती पड़ेंगे।
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व्हाइट गुड्स और सोलर पैनल्स: अमेरिका की बड़ी कंपनियां अब चीन की जगह भारत से सामान लेने पर विचार कर सकती हैं।
किन देशों पर पड़ेगा असर?
इस ट्रेड वॉर का सबसे ज्यादा असर अमेरिका के करीबी व्यापारिक साझेदारों — मेक्सिको और कनाडा — पर हो सकता है। वहीं एशियाई देश जैसे जापान, दक्षिण कोरिया और सिंगापुर भी सप्लाई चेन में बाधा झेल सकते हैं। खासकर इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री पर इसका दबाव दिखेगा।
ग्लोबल मार्केट की स्थिति
थिंक टैंक GTRI के अनुसार, ईवी (इलेक्ट्रिक व्हीकल्स), विंड टर्बाइन और सेमीकंडक्टर पार्ट्स की कीमतें वैश्विक बाजार में बढ़ सकती हैं। इससे लागत में इज़ाफा होगा और कई देशों की अर्थव्यवस्था पर दबाव पड़ेगा।
भारत-अमेरिका व्यापार का भविष्य
भारत और अमेरिका के बीच 2024-25 में 131.84 बिलियन डॉलर का व्यापार हुआ, जिसमें भारत का निर्यात 86.5 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया। अमेरिका भारत का सबसे बड़ा ट्रेड पार्टनर है और भारत के कुल निर्यात का लगभग 19% हिस्सा वहीं जाता है।
दोनों देशों के बीच बायलैटरल ट्रेड एग्रीमेंट को लेकर बातचीत भी जारी है। ऐसे में ट्रम्प का यह नया टैरिफ भारत के लिए अमेरिकी बाजार में अपनी पकड़ और मजबूत करने का सुनहरा अवसर साबित हो सकता है।