टाटा ग्रुप के भीतर जारी आंतरिक खींचतान और विवादों के बीच बड़ा फैसला सामने आया है। टाटा सन्स के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन का कार्यकाल अब 2032 तक बढ़ा दिया गया है। यानी वे 70 साल की उम्र में रिटायर होंगे। यह पहली बार है जब टाटा ग्रुप अपनी पारंपरिक रिटायरमेंट पॉलिसी से हटकर किसी चेयरमैन को लंबा एक्सटेंशन दे रहा है।
चंद्रशेखरन का मौजूदा कार्यकाल 2027 में खत्म होना था, लेकिन अब ट्रस्टीज ने उन्हें तीसरा पांच साल का टर्म दे दिया है। वे पहली बार जनवरी 2017 में चेयरमैन बने थे। दिलचस्प बात यह है कि उनका टाटा ग्रुप से सफर 1987 में TCS में इंटर्न के तौर पर शुरू हुआ था।
टाटा ग्रुप में विवाद, सरकार को करना पड़ा हस्तक्षेप
रतन टाटा के निधन (अक्टूबर 2024) के बाद टाटा ग्रुप में गवर्नेंस और बोर्ड अपॉइंटमेंट्स को लेकर खींचतान बढ़ गई। नोएल टाटा को चेयरमैन बनाने के बाद से ही ट्रस्टीज के बीच टकराव तेज हुआ।
स्थिति इतनी बिगड़ी कि 7 अक्टूबर 2025 को टाटा ग्रुप की शीर्ष नेतृत्व टीम को गृहमंत्री अमित शाह और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मिलना पड़ा। सरकार ने स्पष्ट कहा कि इस विवाद का असर टाटा सन्स और ग्रुप की स्थिरता पर नहीं पड़ना चाहिए।
5 पॉइंट में समझें विवाद की जड़
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11 सितंबर की ट्रस्ट मीटिंग में पूर्व रक्षा सचिव विजय सिंह को नॉमिनी डायरेक्टर दोबारा नियुक्त करने का प्रस्ताव रखा गया, लेकिन बहुमत ट्रस्टीज ने मना कर दिया।
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रतन टाटा के निधन के बाद नियम बनाया गया था कि 75 साल से ऊपर डायरेक्टरों को हर साल री-अपॉइंट किया जाए। सिंह 77 साल के थे, इसलिए विरोध हुआ।
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इसके बाद मेहली मिस्त्री को बोर्ड में लाने की कोशिश हुई, लेकिन नोएल टाटा और वेणु श्रीनिवासन ने रोक दिया।
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नाराज होकर विजय सिंह ने टाटा सन्स बोर्ड से इस्तीफा दे दिया।
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मेहली मिस्त्री के नेतृत्व वाले ट्रस्टी शापूरजी पलोनजी फैमिली से जुड़े हैं, जिनकी टाटा सन्स में 18.37% हिस्सेदारी है। उनका आरोप है कि बड़े फैसलों से उन्हें बाहर रखा जा रहा है।
नाराज ट्रस्टीज ने फंडिंग प्लान पर उठाए सवाल
मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के मुताबिक विवाद का एक बड़ा कारण टाटा इंटरनेशनल लिमिटेड (TIL) का ₹1,000 करोड़ का फंडिंग प्लान भी है।
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ट्रस्टीज का आरोप है कि इतने बड़े फैसले पर उचित बहस नहीं हुई।
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उन्होंने टाटा मोटर्स की जुलाई में इवेको ग्रुप के नॉन-डिफेंस व्हीकल बिजनेस डील का भी जिक्र किया और कहा कि इसमें भी उन्हें लेट स्टेज पर जानकारी दी गई।
टाटा ग्रुप की ताकत
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स्थापना: 1868 में जमशेदजी टाटा द्वारा।
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बिजनेस: 10 प्रमुख सेक्टर्स में 30 कंपनियां, 100+ देशों में कारोबार।
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टाटा सन्स: टाटा कंपनियों की होल्डिंग और प्रमोटर कंपनी।
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हिस्सेदारी: टाटा ट्रस्ट्स के पास 66% इक्विटी, जो शिक्षा, स्वास्थ्य, कला और रोजगार पर काम करता है।
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टाटा ग्रुप रेवेन्यू (2023-24): ₹13.86 लाख करोड़
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रोजगार: 10 लाख से अधिक लोग
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प्रोडक्ट्स: चाय पत्ती से लेकर कार, घड़ी और एंटरटेनमेंट तक।
✅ निष्कर्ष यह है कि टाटा ग्रुप में आंतरिक मतभेद गहराए हुए हैं, लेकिन चंद्रशेखरन का कार्यकाल बढ़ाना इस बात का संकेत है कि कंपनी स्थिरता चाहती है। 1987 में इंटर्नशिप से सफर शुरू करने वाले चंद्रा अब 2032 तक भारत की सबसे बड़ी बिजनेस एम्पायर को लीड करेंगे।